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नई दिल्ली. टेस्ट क्रिकेट में ऐसे कई बैटर हैं जिन्होंने जिस मैच में शतकीय पारी खेली, टीम को हार का सामना नहीं करना पड़ा. भारत के लिहाज से इसमें सबसे चर्चित नाम गुंडप्पा विश्वनाथ का है. भारत के इस स्टालिश बैटर ने टेस्ट करियर में 14 शतक जड़े, इन सभी टेस्ट में भारतीय टीम को या तो जीत हासिल हुई या फिर मैच ड्रॉ रहा. इस मामले में शीर्ष स्थान पर दक्षिण अफ्रीका के ग्रीम स्मिथ का नाम है. बाएं हाथ के बैटर और कई टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के कप्तान रहे स्मिथ के नाम 27 शतक दर्ज हैं. उन्होंने जिस टेस्ट में शतक लगाया, उसमें से किसी में टीम की हार नहीं हुई. इंग्लैंड के दिग्गज बैट्समैन ज्योफ बायकॉट, वॉली हेमंड और इयान बेल के नाम भी 22-22 टेस्ट शतक हैं. बैटरों की इस ‘तिकड़ी’ ने जब भी टेस्ट शतक बनाया, इनकी टीम मैच नहीं हारी. या तो मैच इंग्लैंड टीम जीती या फिर मैच ड्रॉ रहा.
इसके उलट कुछ ऐसे अनलकी बैटर भी हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में जब भी शतक लगाया, टीम को या तो हार मिली या फिर मैच ड्रॉ रहा. इन्होंने जिस मैच में शतक जड़ा, उसमें टीम को जीत नसीब नहीं हुई. इसमें भारत के विजय मांजरेकर का नाम शामिल है. 1980 और 1990 के दशक में भारत के लिए खेले संजय मांजरेकर के पिता विजय मांजेरकर ने 1951 से 1965 के बीच 55 टेस्ट में 7 शतक लगाए लेकिन भारतीय टीम को इसमें से किसी में जीत नहीं मिली.
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वे प्रमुख बदकिस्मत बैटर जिन्होंने जिस टेस्ट में शतकीय पारी खेली उसमें टीम को या तो हार मिली या मैच ड्रॉ रहा.
असांका गुरुसिंघे ने नाम हैं 7 टेस्ट शतक

श्रीलंका के बाएं हाथ के बैटर असांका गुरुसिंघा (Asanka Gurusinha) ने वर्ष 1985 से लेकर 1996 तक 41 टेस्ट और 147 वनडे मैच खेले. गुरुसिंघा 1996 की वर्ल्डकप चैंपियन श्रीलंका टीम के प्रमुख सदस्य थे. उन्होंने टूर्नामेंट के 6 मैचों में 51.16 के औसत से 307 रन बनाए थे. गुरुसिंघा ने टेस्ट में 7 शतक जड़े और 143 रन उनका सर्वोच्च स्कोर रहा जो उन्होंने 1995 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न टेस्ट में बनाया था. एक टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने का कमाल भी वे कर चुके हैं. उन्होंने फरवरी 1991 में न्यूजीलैंड के खिलाफ हेमिल्टन टेस्ट की पहली पारी में 119 और दूसरी पारी में 102 रन बनाए थे. बहरहाल, गुरुसिंघा ने जिस भी टेस्ट में शतक लगाए किसी श्रीलंका को जीत नसीब नहीं हुई. जिन छह टेस्ट में उन्होंने 7 शतक (एक टेस्ट की दोनों पारियों में शतक) लगाए, उनमें से दो में श्रीलंका को हार मिली जबकि चार ड्रॉ रहे.
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फास्ट बॉलिंग का सामना करने में माहिर थे विजय मांजरेकर

दाएं हाथ के बेहतरीन बल्लेबाज विजय मांजरेकर (Vijay Manjrekar) ने भारत के लिए 55 टेस्ट खेलते हुए 39.12 के औसत से 3208 रन बनाए जिसमें 7 टेस्ट शतक रहे. टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 189 रन रहा जो उन्होंने दिसंबर 1961 में इंग्लैंड के खिलाफ दिल्ली में बनाया था. अपने दौर के ज्यादातर बैटरों से अलग विजय मांजरेकर फास्ट बॉलिंग का सामना करने में माहिर थे. उन्होंने जिन सात टेस्ट में सैकड़ा जमाया उसमें से एक में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा जबकि छह हार-जीत के बिना ड्रॉ समाप्त हुए.
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लॉरेस रोव ने डेब्यू टेस्ट की दोनों पारियों में जड़े थे शतक

वेस्टइंडीज के लॉरेंस रोव (Lawrence Rowe) ने टेस्ट करियर का धमाकेदार आगाज किया था. 1972 में अपने डेब्यू टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में दोहरा शतक और दूसरी पारी में नाबाद शतक जमाया था. हालांकि शुरुआती दौर की चमक को वे लंबे समय तक बरकरार नहीं रख सके. क्रिकेट करियर के दौरान ही उनके ‘विजन’ में समस्या आई. घास से अलर्जी के कारण भी उनके करियर पर असर पड़ा. इस कारण 30 टेस्ट और 11 वनडे ही रोव खेल सके. 30 टेस्ट में 43.55 के औसत से 2017 रन रोव के नाम पर दर्ज हैं जिसमें 7 शतक शामिल हैं. टेस्ट क्रिकेट में एक तिहरा और एक दोहरा शतक भी रोव ने लगाया लेकिन उनके इन सात शतकों के दौरान कभी भी इंडीज टीम को जीत नसीब नहीं हुई. जिन छह टेस्ट में उन्होंने रोव ने यह शतक (एक टेस्ट की दोनों पारियों में शतक) लगाए उसमें से चार ड्रॉ रहे जबकि दो में इंडीज टीम को हार का सामना करना पड़ा.
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बैटिंग-बॉलिंग, दोनों में बेजोड़ थे बेवन कांगडोन
न्यूजीलैंड के बेवन कांगडोन (Bevan Congdon) ने 1965 से 1975 के बीच ऑलराउंडर की हैसियत से 61 टेस्ट और 11 वनडे खेले. दाएं हाथ के बैटर और मध्यम गति के बॉलर कांगडोन ने कुछ टेस्ट में कीवी टीम की बैटिंग और बॉलिंग की शुरुआत भी की. टेस्ट क्रिकेट में 32.22 के बेहतरीन औसत से 3448 रन (7 शतक) बनाने वाले कांगडोन ने 36.50 के औसत से 59 विकेट भी लिए. टेस्ट क्रिकेट में उनका सर्वोच्च स्कोर 176 रन रहा. ODI में उन्होंने 56.33 के औसत से 338 रन (एक शतक, सर्वोच्च स्कोर 101) बनाने के अलावा 7 विकेट भी लिए. जिन सात टेस्ट में शतक लगाए उसमें से एक में कीवी टीम को हार मिली जबकि 6 ड्रॉ समाप्त हुए.
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एंड्यू जोंस टेस्ट की दोनों पारियों में लगा चुके हैं शतक

एंड्रयू जोंस (Andrew Jones) की गिनती अपने दौर के न्यूजीलैंड के भरोसेमंद बैटरों में होती थी.1987 से 1995 के बीच 39 टेस्ट और 87 वनडे मैच उन्होंने खेले. टेस्ट क्रिकेट में 44.27 के औसत से जोंस ने 2922 रन बनाए जिसमें 7 शतक शामिल रहे. इस दौरान 186 रन एंड्रयू जोंस का टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च स्कोर रहा.जोंस एक काबिल बैटर थे और एक टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने और तीसरे विकेट के लिए मार्टिन क्रो के साथ 467 रन की साझेदारी की उपलब्धि भी उनके नाम पर दर्ज है. जोंस ने 1991 के वेलिंगटन टेस्ट में मार्टिन क्रो के साथ 467 रन जोड़े थे जो तीसरे विकेट के लिए अब तक की दूसरी सबसे बड़ी पार्टनरशिप है. इसी वर्ष श्रीलंका के खिलाफ हेमिल्टन टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में 122 और दूसरी पारी में नाबाद 100 रन बनाए थे. वनडे में 93 के सर्वोच्च स्कोर और 35.69 के औसत के साथ जोंस ने 2784 रन बनाए जिसमें 25 अर्धशतक शामिल रहे, दुर्भाग्यवश अपने किसी अर्धशतक को वे शतक में कन्वर्ट नहीं कर सके. जोंस की बदकिस्मती रही कि जिन 6 टेस्ट में उन्होंने शतक (एक टेस्ट की दोनों पारियों में शतक) लगाए, उनमें से किसी में टीम को जीत नहीं मिली. यह सभी छह टेस्ट ड्रॉ रहे.
Tags: Cricket, Srilanka, Team india, Test cricket
FIRST PUBLISHED : May 15, 2024, 16:04 IST
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