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LS Polls: ‘भारत में आम चुनाव प्रभावित करने के लिए बड़ी साजिश’, डिसइंफो लैब की रिपोर्ट में चौंकाने वाले दावे

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LS Polls: ‘भारत में आम चुनाव प्रभावित करने के लिए बड़ी साजिश’, डिसइंफो लैब की रिपोर्ट में चौंकाने वाले दावे

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Attempts were made to influence Lok Sabha elections in India on a large scale, claims Disinfo Lab

डिसइंफो लैब की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार


‘भारत में आम चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की गई।’ डिसइंफो लैब नाम के एक संगठन ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। डिसइंफो की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में मतदाताओं की मानसिकता को प्रभावित करने के लिए आम चुनाव में हस्तक्षेप की कोशिश की गई। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इन सबके पीछे अमेरिका की हेनरी लुइस फाउंडेशन (एचएलएफ) और जॉर्ज सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (ओएसएफ) का हाथ है। 

डिसइंफो लैब की रिपोर्ट में चौंकाने वाले दावे

डिसइंफो लैब के अनुसार ‘भारत में मतदान के दौरान अलग अलग माध्यमों से से चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशें कीं गईं। सिर्फ विदेशी मीडिया ही नहीं बल्कि भारत में मौजूद कुछ संस्थानों द्वारा चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की गई। बड़ी संख्या में अलग अलग लेख और शोध पत्रों के माध्यम से आम चुनाव को लेकर कई तरह की टिप्पणियां कीं गईं।’ डिसइंफो लैब ने अपनी रिपोर्ट में हेनरी लुइस फाउंडेशन (एचएलएफ) और जॉर्ज सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (ओएसएफ) का भी जिक्र किया गया है। इस रिपोर्ट में जिन समूहों और व्यक्तियों का नाम उजागर किया गया है, वे फ्रांस और संयुक्त राज्य अमेरिका से संचालित किए गए हैं। रिपोर्ट में कुछ और भी बड़े आरोप लगाए गए हैं। 

डिसइंफो लैब की रिपोर्ट में फ्रांस के क्रिस्टोफ जॉफरलॉट पर आरोप  

डिसइंफो लैब ने कहा ‘भारतीय चुनावों पर वैश्विक रिपोर्ट्स का विश्लेषण करते समय यह पाया गया कि कुछ मीडिया कवरेज में मतदाताओं की मानसिकता को प्रभावित करने की कोशिश की गई। यह देखकर भी आश्चर्य हुआ कि फ्रांस के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों द्वारा भी ऐसा किया गया। इसमें फ्रांस के राजनीतिक विश्लेषक क्रिस्टोफ जॉफरलॉट के बयानों के आधार पर लेख तैयार किए गए।’ डिसइंफो लैब ने अपने रिपोर्ट में कनाडा के रिकन पटेल का नाम भी लिया है। दावा किया गया है कि भारत में आम चुनाव को प्रभावित करने के लिए रिकन पटेल के संस्थान नामती को एचएलएफ और ओएसएफ ने आर्थिक मदद पहुंचाई। डिसइंफो लैब के अनुसार ‘एचएलएफ ने नामती को तीन लाख डॉलर, जबकि ओएसएफ ने 13.85 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद की।’ 

एचएलएफ ने पाकिस्तान की आईएसआई की आर्थिक मदद की थी – डिसइंफो लैब

डिसइंफो ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा दावा करते हुए बताया ‘एचएलएफ द्वारा इससे पहले कट्टरपंथी इस्लामियों और पाकिस्तान की आईएसआई को भी आर्थिक मदद पहुंचाई गई थी।’ डिसइंफों ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया ‘क्रिस्टोफ और उनके सहयोगी गाइल्स वर्नियर्स ने अशोक विश्वविद्यालय में त्रिवेदी सेंटर फॉर पॉलिटिकल डेटा (टीसीपीडी) के माध्यम एक कहानी को जबरन बढ़ावा दिया। इस बात पर जोर दिया गया कि भारत की राजनीति में निचली जातियों का कम प्रतिनिधित्व है।’ रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि क्रिस्टोफर ने वर्ष 2021 में ‘जाति जनगणना की आवश्यकता’ पर एक लेख लिखा था। डिसइंफो लैब की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसके एवज में क्रिस्टोफ जॉफरलेट को अमेरिका के हेनरी लुइस फाउंडेशन (एचएलएफ) ने अत्यधिक धनराशि दी थी। डिसइंफो लैब के अनुसार ‘जाफरलॉट को ‘हिंदू बहुसंख्यकों के समय में मुस्लिम’ (Muslims in a Time of Hindu Majoritarianism) नाम की योजना पर काम करने के लिए 3.85 लाख डॉलर की धनराशि दी गई।’ 

भारत विरोधी एजेंडे के लिए इन्हें पहुंचाई गई आर्थिक मदद- डिसइंफो लैब

1- डिसइंफो लैब ने दावा किया है कि एचएलएफ ने वर्ष 2020 से लेकर वर्ष 2024 तक भात विरोधी एजेंडा चलाने के लिए कुछ और भी संस्थानों को धनराशि मुहैया कराई। डिसइंफो ने अपनी रिपोर्ट में बर्कले सेंटर फॉर रिलिजन, पीस एंड वर्ल्ड अफेयर्स (Berkley Center for Religion, Peace and World Affairs) का भी नाम उजागर किया है।  

2- रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बर्कले को 3.46 डॉलर की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके बाद बर्कले संस्थान ने हिंदू अधिकार और भारत की धार्मिक कूटनीति (The Hindu Right and India’s Religious Diplomacy) पर एक रिपोर्ट तैयार की। 

3- डिसइंफो की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एचएलएफ ने सीईआईपी यानी कार्नेगी इडॉमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस (Carnegie Endowment for International Peace) को सत्तावादी दमन, हिंदू राष्ट्रवाद (Authoritarian repression, Hindu Nationalism) और बढ़ते हिंदुओं पर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए 1.20 लाख डॉलर की धनराशि दी गई। 

4- डिसइंफो के अनुसार सीईआईपी को इसके बाद एक और रिपोर्ट तैयार करने के लिए 40 हजार डॉलर की धनराशि दी गई। आरोप है कि यह धनराशि वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ‘सत्ता में भाजपा: भारतीय लोकतंत्र और धार्मिक राष्ट्रवाद’ (The BJP in Power: Indian Democracy and Religious Nationalism) पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए दी गई।

5- डिसइंफों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एचएलएफ ने ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) रो एशिया में हिंसा पर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए तीन लाख डॉलर की धनराशि दी गई। एचआरडब्ल्यू ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान और अफगानिस्तान नहीं बल्कि भारत का नाम लिया। 

6- डिसइंफो ने यह आरोप भी लगाया है कि  इसके अलावा ऑड्रे ट्रुश्के के संस्थान साउथ एशिया एक्टिविस्ट कलेक्टिव (एसएएसएसी) को एचएलएफ ने हिंदू राष्ट्रवाद पर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए भी धनराशि दी।




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