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56 लाख का मकान हड़पने के लिए निर्भया जैसी दरिंदगी की झूठी कहानी गढ़ने वाली 38 वर्षीय नर्स को अस्पताल से छुट्टी मिलते ही पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। पुलिस ने यह कार्रवाई दिल्ली के जीटीबी अस्पताल से मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद की। रिपोर्ट से साफ हो गया कि नर्स ने प्राइवेट पार्ट पर खुद ही चोट मारी थी। साजिश से अनजान भाई से कह दिया था कि उसके प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाली गई है। लोहे के छह इंच के जिस तार (टंग क्लीनर) से उसने चोट मारी, उसे ही प्राइवेट पार्ट में रख लिया था।
13 साल से पति से अलग रह रही दिल्ली के कबीरनगर क्षेत्र की निवासी नर्स पर पुलिस को शक तो तभी हो गया था, जब 18 अक्तूबर की सुबह उसने गाजियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल में उपचार कराने से इनकार कर दिया था।
उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया जाने लगा तो वह इस जिद पर अड़ गई कि उसे जीटीबी अस्पताल ही भेजा जाए। बाद में पता चला कि वह जीटीबी में नर्स रही है, इसलिए उसे उम्मीद थी कि वहां झूठी कहानी को सच साबित करने के लिए फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनवाना आसान रहेगा, लेकिन ऐसा हो न सका।
मेडिकल रिपोर्ट में कोई अंदरूनी चोट नहीं
पुलिस ने बताया कि शनिवार को मिली मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट में साफ है कि उसे कोई अंदरूनी चोट नहीं थी। इससे पहले उसके मोबाइल की लोकेशन से साफ हो गया था कि न तो उसका अपहरण हुआ और न ही उसे दो दिन बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
पुलिस ने बताया कि शनिवार को मिली मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट में साफ है कि उसे कोई अंदरूनी चोट नहीं थी। इससे पहले उसके मोबाइल की लोकेशन से साफ हो गया था कि न तो उसका अपहरण हुआ और न ही उसे दो दिन बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
एफआईआर में उसके भाई ने बताया था कि 16 अक्तूबर की रात जब वह उसके जन्म दिन समारोह से लौट रही थी तब आश्रम रोड से चार लोगों ने उसका अपहरण किया। वे उसे जंगल में ले गए। वहां एक पहले से मौजूद था। पांचों ने दरिंदगी की और 18 की बोरे में बंद करके उसे आश्रम रोड पर फेंक गए।
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