Home Breaking News आज का शब्द: गृहस्थी और जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविता- देखो तो कहाँ गुम हो गई रसीद !

आज का शब्द: गृहस्थी और जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविता- देखो तो कहाँ गुम हो गई रसीद !

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आज का शब्द: गृहस्थी और जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविता- देखो तो कहाँ गुम हो गई रसीद !

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- गृहस्थी, जिसका अर्थ है- गृहस्था-श्रम, घर के काम-धंधे, परिवार, घर का सामान, खेती-बारी। प्रस्तुत है जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविता- देखो तो कहाँ गुम हो गई रसीद !
                                                                                                
                                                     
                            

देखो तो कहाँ गुम हो गई रसीद !

देखो न
तुम तो बैठी हो चुपचाप
अब हँसों नहीं खोजो
बहुत ज़रूरी है रसीदों को बचाकर रखना

हम कोई धन्ना-सेठ तो नहीं
जो ख़राब हो जाएँ हाल-फिलहाल की ख़रीदी चीज़ें
तो बिसरा दें उन्हें
ख़रीद लाएँ दूसरी-तीसरी

हमारे लिए तो हर नई चीज़
किसी न किसी सपने का सच होना है
हमारे सपनों में कई ज़रूरी-ज़रूरी चीज़ें हैं
और ख़रीदी गई चीज़ों में बसे हैं कुछ पुराने सपने

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25 minutes ago

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