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हिंदी हैं हम
– फोटो : amar ujala
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एक प्रमुख हिंदी समाचार पत्र होने के नाते अमर उजाला भाषा के गौरव को फिर से जगाना और बढ़ाना चाहता है और लोगों के जीवन में इसका सार वापस लाना चाहता है, जिनके लिए यह उनकी संस्कृति में गहराई से निहित है। इसलिए अमर उजाला ने “हिंदी- अपनों की भाषा, सपनों की भाषा – हिंदी हैं हम” नाम से एक पहल शुरू की है। अभियान का नाम ही इसकी समृद्धि को दर्शाता है।
दरअसल, भारत में हिंदी सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है, जहां लगभग 61.5 करोड़ लोग इस भाषा का उपयोग करते हैं। हिंदी भाषा इतनी लोकप्रिय है कि गूगल और फेसबुक जैसे वैश्विक दिग्गजों को लगातार बढ़ते बाजार को पूरा करने के लिए भाषा उपकरणों में निवेश करना पड़ा है। इस दौड़ में हालिया शामिल होने वाला वैश्विक खिलाड़ी नेटफ्लिक्स है, जो उपयोगकर्ता की सुविधा के लिए अपना पूरा इंटरफेस हिंदी में लॉन्च कर रहा है।
हिंदी भाषा का प्रभाव और महत्व इतना प्रबल रहा है कि दुनिया भर के विभिन्न देशों में लोगों ने इसका अध्ययन करना शुरू कर दिया है। जैसे अंग्रेजी दुनिया को बांधती है, वैसे ही हिंदी एक ऐसा सेतु है जो दुनिया भर के लोगों को जोड़ता है।
दुनिया भर में कई ऐसे लोग हैं जो विदेशों में भाषा और साहित्य के माध्यम से भारत की संस्कृति को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए समर्पित रूप से काम कर रहे हैं। वे युवा पीढ़ी को इसके साहित्य और विश्वासों में निहित भारत की संस्कृति को सीखने में मदद कर रहे हैं। अलग-अलग देशों के ऐसे लोग जो भारत से नहीं हैं या कभी भारत नहीं आए हैं, हिंदी सीखने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं।
एक ऐसी भाषा जिसमें हम सपने देखते हैं क्योंकि यह हमारी संवेदनाओं को शब्द देती है और हमारी अभिव्यक्ति को जीवंत करती है। हिंदी: अपनों की भाषा, सपनों की भाषा: पढ़ें, बोलें, सीखें। गर्व करें। यह अभियान हिंदी भाषा के महत्व को बढ़ाने के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और भाषा के प्रति प्रेम के माध्यम से परिवारों को जोड़ने का एक अच्छा तरीका है। इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए अमर उजाला 7 अक्टूबर 2022 को शाम 5.30 बजे एक वेबिनार आयोजित कर रहा है, जिसमें राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध हिंदी के विद्वान भाग ले रहे हैं।
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