Home Breaking News Karnataka Election: कर्नाटक में कांग्रेस का यह दांव क्या साबित होगा गेम चेंजर? भाजपा भी चली उसी राह पर

Karnataka Election: कर्नाटक में कांग्रेस का यह दांव क्या साबित होगा गेम चेंजर? भाजपा भी चली उसी राह पर

0
Karnataka Election: कर्नाटक में कांग्रेस का यह दांव क्या साबित होगा गेम चेंजर? भाजपा भी चली उसी राह पर

[ad_1]

Karnataka Election: Congress and BJP have not yet announced the face of the Chief Minister

Karnataka Election: कर्नाटक में प्रत्याशियों के नामों पर मंथन करते कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल गांधी
– फोटो : Agency

विस्तार

कर्नाटक में कांग्रेस के दो धुरंधर नेताओं के बीच हो रही खींचतान से पार्टी को ‘बड़ा मौका’ मिल गया है। यह बड़ा मौका मिला है मुख्यमंत्री का चेहरा न घोषित करने के तौर पर। दरअसल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के सिद्धारमैया और प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार के बीच चल रही तनातनी से जब मुख्यमंत्री का चेहरा ही घोषित नहीं होगा, तो उसका फायदा कांग्रेस जातिगत समीकरणों के तौर पर उठा सकती है। वहीं भाजपा ने भी इस बार अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा न घोषित करके बासवराज बोम्मई के नाम पर चुनाव लड़ने का एलान तो किया है, लेकिन कर्नाटक के सियासी गलियारों में ‘मोदी बनाम कांग्रेस’ के नाम पर ही चुनाव की चर्चा हो रही है। फिलहाल दोनों बड़ी पार्टियों की ओर से इस बार सियासी समीकरण भी कुछ ऐसे बन रहे हैं, जिसमें नाम न घोषित करना दोनों पार्टियों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।

दोनों दलों ने नहीं किया चेहरों का एलान

कर्नाटक में जैसे-जैसे चुनावों की तारीख नजदीक आती जा रही है, सियासत भी गर्म हो रही है। प्रत्याशियों के चयन और घोषणा से लेकर सारी सियासी चौसर कर्नाटक में बिछा ली गई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक भाजपा से लेकर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। कर्नाटक के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसा न करके दोनों पार्टियां सियासी तौर पर माइलेज ले रही हैं। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार सुदर्शन कहते हैं कि यह सवाल तो उठता है कि आखिर दोनों पार्टियों की ओर से मुख्यमंत्री के चेहरे का एलान क्यों नहीं किया जा रहा है। वह इसका तर्क देते हुए कहते हैं कि कांग्रेस ने नाम न घोषित करके खुद को कर्नाटक की राजनीति में जातिगत समीकरणों के आधार पर सबसे मजबूत साबित करने की कोशिश में जुटी है। उनका तर्क है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं। जबकि पार्टी के बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ओबीसी चेहरे हैं और कोरबा समुदाय से आते हैं।

यह भी पढ़ें: Karnataka Election: चुनाव में BJP उतारेगी खास सुपर-50 टीम, गुजरात के इस फॉर्मूले से पार्टी को जीत की उम्मीद



[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here