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फिल्म ‘अनवर’ के गाने ‘जावेदा जिंदगी’ से आपने शुरुआत की और आज आपके गाने हर व्यक्ति की जुबान पर है। ये 15 साल आपके लिए कैसे रहे ?
मैं अपने आपको बहुत ही खुशनसीब मानती हूं कि मुझे इतने महान लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। मैंने जिन भी लोगों के साथ काम किया है वह ऐसे लोग हैं जिनसे मैंने संगीत से लेकर जीवन के बारे में बहुत सी चीजें सीखी हैं। आज जो देश दुनिया से मुझे प्यार मिल रहा है उसके लिए मैं बहुत ही आभारी हूं। लेकिन मेरा मानना है कि यह जो मैंने इतने साल में किया है उसको मैं अकेले नहीं कर सकती थी। मुझे लगता है कि कोई भी व्यक्ति अकेले आगे नहीं बढ़ सकता है। मेरे साथ कई लोग रहे जिन्होंने मुझे यहां तक पहुंचने में मदद की है।
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वे कौन लोग हैं जिन्होंने आपकी मदद की?
लोगों की लिस्ट तो बहुत ही लंबी है। हरिहरन जी के बारे में तो आप लोग जानते ही होंगे। क्योंकि मैं उनका नाम अक्सर लेती ही रहती हूं। इनके अलावा उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान साहब, मिथुन, शंकर महादेवन सहित कई लोग हैं। अगर और लोगों की बात करूं तो विशाल और शेखर, सिद्धार्थ आनंद, प्रीतम जैसे लोगों ने मुझे शुरुआत में काफी कुछ सिखाया है।
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आपने संगीत की तालीम किससे ली? और आप संगीत में किसको अपना गुरू मानती हैं?
मेरे सबसे पहले गुरु मेरे पिता रहे हैं। उन्होंने मुझे बहुत बचपन से ही शास्त्रीय संगीत की तालीम देना शुरू कर दिया था। आज मैं जो कुछ भी हूं उसमें बहुत बड़ा हिस्सा उनका है। उसके बाद हरिहरन जी, गुलाम मुस्तफा खान जी से भी काफी कुछ सीखा। इन्हीं लोगों से मैं बचपन से संगीत सीखती आ रही हूं। आज भी कुछ पूछना होता है या रियाज करना होता है तो मैं हरिहरन जी के पास जाती हूं। मुझे लगता है पूरी जिंदगी इन लोगों की शिष्या बनी रहूंगी। क्योंकि हम सभी पूरी जिंदगी किसी न किसी से कुछ ना कुछ सीखते हैं।
संगीत को पेशा बनाना है यह कब सोचा?
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