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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव।
– फोटो : अमर उजाला
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भारतीय रेलवे के सुरक्षा पर खर्च को लेकर कुछ हलकों की ओर से कैग रिपोर्ट का हवाला दिए जाने के जवाब में सरकारी सूत्रों ने सोमवार को कहा कि रिपोर्ट की चुनिंदा जानकारी का इस्तेमाल गलत ढंग से किया जा रहा है। रेलवे जल्द ही इस पर संसद में जवाब देगा।
शीर्ष सूत्रों ने कहा, सुरक्षा से जुड़े कामों समेत भारतीय रेलवे की सभी परियोजनाओं पर होने वाला खर्च तीन प्रमुख स्रोतों से वित्तपोषित होता है। सकल बजटीय समर्थन, भारतीय रेलवे की आंतरिक अर्जित राशि और बाहरी उधारी वित्त पोषण के लिए तीन प्रमुख स्रोत हैं। सरकार ने महत्वपूर्ण सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए 2017 में एक समर्पित गैर-व्यपगत निधि, राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष (आरआरएसके) की स्थापना की थी। इसमें 2017-18 से पांच वर्षों की अवधि में उपयोग करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये की सीमा तय की गई थी।
रेल मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 से 2021-22 की अवधि में, रेलवे ने आरआरएसके कार्यों पर एक लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए। फरवरी 2022 में, केंद्र सरकार ने 2022-23 से आरआरएसके की वैधता को और पांच साल के लिए बढ़ा दिया। सूत्रों के मुताबिक भारतीय रेलवे में पटरी से उतरने पर भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की 2022 की रिपोर्ट संख्या 22 को पिछले साल 21 दिसंबर को संसद में पेश किया गया था। रेल मंत्रालय जल्द ही रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विस्तार से जवाब देगा।
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