Home Breaking News Pasmanda Muslim: कौन हैं पसमांदा मुस्लिम जिनका जिक्र करते हैं PM, इनके भाजपा से जुड़ने से क्या बदलेगा?

Pasmanda Muslim: कौन हैं पसमांदा मुस्लिम जिनका जिक्र करते हैं PM, इनके भाजपा से जुड़ने से क्या बदलेगा?

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Pasmanda Muslim: कौन हैं पसमांदा मुस्लिम जिनका जिक्र करते हैं PM, इनके भाजपा से जुड़ने से क्या बदलेगा?

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क्या हैं राजनीतिक मायने?
माना जाता है कि पसमांदा समाज के लोग देश के लगभग 18 राज्यों में हैं। यूपी, बिहार, राजस्थान, तेलगांना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश में इनकी संख्या अधिक है। सबसे ज्यादा संख्या उत्तर प्रदेश में है। हर विधानसभा सीट पर इनकी उपस्थिति अच्छी खासी संख्या में है, जिनमें करीब 44 जातियां जैसे राइनी, इदरीसी, नाई, मिरासी, मुकेरी, बारी, घोसी शामिल हैं।

आंकड़ों के हिसाब से यह वोट बैंक लोकसभा की सौ से अधिक सीटों पर अपना प्रभाव रखता है। जनसंख्या के आधार पर देखें, तो असम और बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या 25-30 प्रतिशत, बिहार में करीब 17 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में करीब 20 प्रतिशत, दिल्ली में भी 10-12 प्रतिशत, महाराष्ट्र में करीब 12 प्रतिशत है, केरल में 30 प्रतिशत संख्या मुस्लिम समुदाय की है। बीजेपी मुस्लिम समुदाय के उस वर्ग पर फोकस करने की कोशिश कर रही है जो आमतौर पर विपक्षी दलों का वोट बैंक है।

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में दूसरी बार सत्ता में आने के बाद पसमांदा मुसलमान दानिश अंसारी को जगह देकर इसके संकेत भी दिए। यही नहीं, इसके बाद, मोदी कैबिनेट के बड़े मुस्लिम चेहरे मंत्रिमंडल से गायब हो गए और उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया।

गौरतलब है कि यूपी-बिहार के विधानसभा चुनाव में सोशल एक्सपेरिमेंट के जरिए जिस तरह से बीजेपी ने गैर-यादव ओबीसी और गैर जाटव दलितों के बीच घुसपैठ की थी उसी के तहत एक कोशिश यहां भी बीजेपी करती दिख रही है।

इसे इस तरह से भी देखा जा सकता है कि जैसे योगी सरकार से मिले लाभों की वजह से देवबंद जैसी सीटों पर कुछ मुस्लिम वोट भी बीजेपी को मिले हैं। बीजेपी की पूरी कोशिश है कि समुदाय के एक बड़े हिस्से का वोटबैंक हासिल किया जाए।

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