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पी-20 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
– फोटो : Amar Ujala
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यशोभूमि अधिवेशन केंद्र में जी20 के सदस्य देशों की संसदों के पीठासीन सभापतियों (पी20) के नौवें सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह समिट एक प्रकार से दुनिया भर की अलग-अलग संसदीय प्रथाओं का महाकुंभ है। आप सभी प्रतिनिधि अलग-अलग संसदीय कार्यशैली के अनुभवी हैं। आपका इतने समृद्ध लोकतांत्रिक अनुभवों के साथ भारत आना हम सभी के लिए बहुत सुखद है।
पीएम मोदी ने इस्राइल में उपजे संकट का नाम लिए बिना कहा कि दुनिया के अलग कोनों में जो कुछ भी घट रहा है, उससे आज कोई भी अछूता नहीं है। संघर्ष की वजह से आज दुनिया संकटों से जूझ रही है। यह किसी के भी हित में नहीं है। मानवता के सामने जो बड़ी चुनौती है, उसका समाधान बंटी हुई दुनिया नहीं दे सकती। यह शांति और भाईचारे का समय है। साथ आगे बढ़ने का समय है। यह सबके विकास और कल्याण का समय है। हमें वैश्विक विश्वास के संकट को दमर करना होगा और मानव केंद्रित सोच पर आगे बढ़ना होगा। हमें विश्व को एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य के साथ आगे बढ़ाना होगा।
पीएम मोदी ने कहा कि करीब 20 साल पहले आतंकवादियों ने हमारी संसद को निशाना बनाया था। उस समय संसद का सत्र चल रहा था और आतंकवादियों की मंशा सांसदों को बंदी और उनको खत्म करने की थी। दुनिया को भी एहसास हो रहा है कि आतंकवाद दुनिया के लिए कितनी बड़ी चुनौती है। आतंकवाद जहां भी होता, किसी भी कारण, किसी भी रूप में होता वह मानवता के विरुद्ध होता है। ऐसे में आतंकवाद को लेकर हम सभी को सख्ती बरतनी होगी। आतंकवाद की परिभाषा को लेकर आम सहमति ना बन पाना बहुत दुखद है। आज भी UN भी इसका इंतजार कर रहा है। दुनिया के इसी रवैया का फायदा मानवता के दुश्मन उठा रहे हैं। दुनिया भर के प्रतिनिधियों को सोचना होगा की आतंकवाद के खिलाफ हम कैसे काम कर सकते हैं।
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