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Mahua Moitra
– फोटो : Social Media
विस्तार
लोकसभा में सवाल पूछने के बदले रिश्वत लेने के आरोप में घिरीं तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। सदस्यता जाने के बाद भी महुआ को आपराधिक मुकदमे से भी दो चार होना होगा। दरअसल, समिति ने लॉग-इन जानकारी को दूसरे पक्ष से साझा करने को राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ खतरा मानते हुए महुआ के खिलाफ जांच की सिफारिश की है। इसका मतलब है, महुआ के खिलाफ जांच एजेंसियों की ओर से कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, लोकपाल ने भी उनके खिलाफ सीबीआई जांच का निर्देश दिया है।
अपनी 500 पेज की रिपोर्ट में समिति ने इस मामले को ऑपरेशन दुर्योधन से भी गंभीर माना है। रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि एक स्टिंग ऑपरेशन में 11 सांसदों ने रिश्वत लेकर सवाल पूछने पर हामी भरी थी, जबकि यह मामला सवाल पूछने के लिए रिश्वत लेने तक सीमित न होकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। वह इसलिए कि सांसद ने अपनी लॉग-इन जानकारी किसी तीसरे पक्ष से साझा की और उसमें दुबई से सवाल पूछे गए। ऐसे में इस मामले की आपराधिक जांच भी जरूरी है। ऑपरेशन दुर्योधन मामले में साल 2005 में 11 सांसदों को अपनी सदस्यता गंवानी पड़ी थी।
दानिश का आरोप..
बसपा सांसद दानिश अली ने आरोप लगाया, आचार समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार सोनकर और इसमें शामिल भाजपा सदस्यों ने तृणमूल कांग्रेस की नेता के मामले में समिति की कार्यवाही की जानकारी लीक की जो नियमों का उल्लंघन है।
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