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स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना को लेकर फिर से गंभीरता बरतने की आवश्यकता है, लापरवाही के कारण हालात बिगड़ सकते हैं। कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का सभी लोगों को लगातार पालन करते रहने की सलाह दी गई है।
नए वैरिएंट JN.1 को लेकर अब तक हुए अध्ययनों में पाया गया है कि इसके कारण भी ज्यादातर लोगों में हल्के-मध्यम स्तर के लक्षण ही देखे जा रहे हैं। हालांकि चीन की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि वहां संक्रमितों में मौत के बढ़े मामलों के लिए JN.1 एक प्रमुख कारक हो सकता है। तो क्या कोरोना के इस नए सब-वैरिएंट के कारण मौत का खतरा भी बढ़ रहा है? आइए इस बारे में समझते हैं।
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनियाभर में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के बीच, चीन में कथित तौर पर JN.1 के कारण मृत्यु दर में वृद्धि देखी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के शवदाह गृह कोविड-19 से मौतों में वृद्धि के कारण चौबीस घंटे काम कर रहे हैं। अधिकारी इस बात की पुष्टि नहीं कर रहे हैं कि मौत के मामले कोरोना से संबंधित है। हालांकि ज्यादातर मृतकों में कोरोना की पुष्टि की भी खबर है।
रिपोर्ट में एक स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है, बुजुर्गों के अलावा, युवा लोग और बच्चे भी मर रहे हैं। अंतिम संस्कार गृहों में अचानक लाशों की वृद्धि डराने वाली है। चीन में निमोनिया के मामले भी पिछले महीनों में समस्या बढ़ा चके हैं, ऐसे में ज्यादा स्पष्ट नहीं है कि ये मौतें कोविड-19 के कारण हैं या निमोनिया के।
भारत में कोरोना की स्थिति की बात करें तो यहां पिछले 24 घंटे में 529 नए मामले की पुष्टि के साथ और पांच मौतें दर्ज की गईं। नया कोविड सब-वैरिएंट JN.1 नौ राज्यों में फैल गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक बुधवार को महाराष्ट्र में दो मौतों की पुष्टि की गई, जो तीन महीनों में राज्य में पहली कोरोना से मौत है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा, संक्रमण के मामले जरूर बढ़े हैं, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के मामले कम हैं। ज्यादातर लोगों में लक्षण हल्के हैं। गंभीर संक्रमण या मौत का खतरा उन लोगों में ही अधिक हो सकता है जो पहले से ही कोमोरबिडिटी के शिकार रहे हैं।
देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के देखते हुए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) दिल्ली ने बुधवार को कोरोना के साथ संदिग्ध या पुष्टि किए गए लोगों के लिए निर्देश जारी किए हैं। एम्स दिल्ली के निदेशक ने बुधवार को कोविड -19 के लिए आकस्मिक उपायों पर चर्चा करने के लिए अस्पताल के विभाग प्रमुखों के साथ एक बैठक भी बुलाई।
कोरोना के परीक्षण को लेकर जारी निर्देश के मुताबिक परीक्षण उन्हीं लोगों का किया जाना चाहिए जिनमें SARI (सीवियर एक्यूट रेस्पोरेटरी इंफेक्शन) जैसे श्वसन संक्रमण, लगातार तेज बुखार, पिछले 10 दिनों से खांसी की समस्या हो। इसके अलावा सभी लोगों को बचाव के उपायों का पालन करते रहना चाहिए।
कर्नाटक देश के उन राज्यों में से है जहां संक्रमण के मामले सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किए जा रहे हैं, यहां बढ़ते संक्रमण के जोखिमों को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने घोषणा की है कि राज्य में कोविड-19 से संक्रमित पाए गए लोगों को एक सप्ताह के लिए होम आइसोलेशन बहुत जरूरी है। राज्य में अब तक 36 लोगों को कोविड-19 के JN.1 वैरिएंट से संक्रमित पाया गया है। देश में कोरोना के एक्टिव मामले भी बढ़ते जा रहे हैं, संक्रमण के जोखिमों से बचाव करते रहना सभी के लिए आवश्यक है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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