[ad_1]

ग्राफिक्स
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें
राजस्थान में सरकारी भुगतान की प्रक्रिया में गबन और फर्जीवाड़े के जो मामले सामने आ रहे हैं, इसकी चेतावनी सीएजी ने डेढ़ साल पहले ही सरकार को दे दी थी। वित्त विभाग ने सीएजी की चेतावनी और आपत्तियों को अनसुना कर महज एक सॉफ्टवेयर के जरिए राजस्थान की समस्त भुगतान प्रणाली को सेंट्रलाइज कर लिया।
संवैधानिक प्रावधान कहते हैं कि किसी नियम में संशोधन किया जाना है तो पहले एक्ट फिर नियम और अंत में प्रक्रिया में बदलाव होता है। वित्त विभाग के अफसरों ने भुगतान को केंद्रीकृत करने के लिए सीधे प्रक्रिया ही बदल डाली। इसके लिए ई- सीलिंग सॉफ्टवेयर बनाकर भुगतान करने शुरू कर दिए गए, जबकि ट्रेजरी के नियमों और प्रक्रिया में इसका उल्लेख कहीं भी नहीं है। ई-सीलिंग मॉड्यूल का इस तरह से उपयोग पूरी तरह अवैध है।
भुगतान प्रणाली को सेंट्रलाइज करने का कारण बताते हुए एजी को यह तक लिख दिया कि सरकार में ट्रेजरी ऑफिस बिना कारण के बिलों के भुगतान अटकाते हैं। इसके साथ ही बिना नियम संशोधन के यह प्रावधान कर दिया कि ट्रेजरी में 2 दिन बिल पेंडिंग रहता है तो तीसरे दिन यह ऑटो पेमेंट में चला जाएगा।
[ad_2]
Source link