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फिल्म इंडस्ट्री में कैसेट किंग के नाम से मशहूर गुलशन कुमार की हत्या के साथ अंडरवर्ल्ड की सीधी दखल सामने आई थी। उससे पहले तक सब कुछ परदे के पीछे ही होता रहता था और हिंदी फिल्मों में पैसे लगाने के मामले में अंडरवर्ल्ड का दखल सीधे निर्माता के जरिये होता रहता था। फिल्मों में हीरोइनों के चयन से लेकर किसी खास फिल्म वितरण क्षेत्र के अधिकारों तक के फैसले अंडरवर्ल्ड के पास पहुंचने शुरू हो चुके थे।
ऋतिक रोशन की बतौर हीरो पहली फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ के समय भी मुंबई में गोलियां चली थीं। इस फिल्म की सफलता के बाद अंडरवर्ल्ड के लोग रंगदारी के रूप में उनसे फिल्म की कमाई का हिस्सा मांग रहे थे लेकिन राकेश रोशन ने उनकी नहीं सुनी। यही वजह रही कि उन्हें डराने और रंगदारी वसूलने को उन पर गोली चलाई गई। लेकिन, उनकी जान बच गई थी।
इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ को लेकर सुर्खियों में बनी हुईं मनीषा कोइराला भी इस दहशत के माहौल दो चार हो चुकी हैं। ये उन दिनों की बात है जब अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम ने अपने गुर्गों की बदौलत इंडस्ट्री के कई दिग्गज कलाकारों से रंगदारी वसूली। मनीषा कोइराला के पीए अजीत देवानी की रंगदारी नहीं देने पर सलेम गैंग के गुर्गों ने वर्ष 2001 में मुंबई शहर के अंधेरी इलाके में हत्या कर दी थी।
अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम का नाम गुलशन कुमार, राकेश रोशन के बाद गायक दलेर मेहंदी पर हुए हमले से भी जुड़ा। दलेर मेहंदी ने खुद इसकी पुष्टि एक साक्षात्कार में की। उन्होंने बताया कि गोली चलाने से पहले अबू सलेम का फोन आया था और गोली चलाने के बाद भी फोन आया और बोला अब विश्वास हो गया कि मैं अबू सलेम हूं। अबू सलेम ने उनसे रंगदारी वसूलने को लेकर वर्ष 2000 में अपने गुर्गे उस्मान से उन पर गोली चलवाई थी, जिसके बाद उनके साथ एक साल तक 17 पुलिस वाले रहे।
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