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'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- उद्विग्न, जिसका अर्थ है- उद्वेगयुक्त, आकुल, घबराया हुआ। प्रस्तुत है संगम मिश्र की रचना- वेदना के गीत
आज दशकों का पुराना,
घाव फिर से लहलहाया।
मन पुनः उद्विग्न होकर,
वेदना के गीत गाया॥
कष्टकर कण्टकित पथ में,
दूर तक फैला अँधेरा।
हर कदम पर व्याधियों ने,
शत्रुओं-सा पन्थ घेरा।
एक रत्ती स्नेह भी जब,
हो गया दुर्लभ जगत में।
रो पड़ीं सम्भावनायें,
जानकर दुर्भाग्य मेरा।
रात दिन विपदाग्नि में जब,
प्राण पंछी छटपटाया।
मन पुनः उद्विग्न होकर,
वेदना के गीत गाया॥
क्षुब्ध रहता मन निरन्तर,
देखकर असमानताएं।
सर्वथा सम्पन्न केवल
लोक में सम्मान पाएं।
विश्व की उत्पत्ति में यह
कष्टदायक दोष कैसे?
एक को समृद्ध जीवन,
दूसरे को वेदनाएँ।
लोक का यह चित्र मुझको
जब न किंचित रास आया।
मन पुनः उद्विग्न होकर,
वेदना के गीत गाया।
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12 घंटे पहले
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