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न जाने क्यों, लेकिन प्रिया उस जगह की खौफनाक फ़िज़ाओं को अपने बदन पर महसूस कर रही थी… उसकी शक्ल पर बेचैनी और हाथों की कपकपाहट यह साफ ज़ाहिर कर रही थी, कि शायद यहां सब कुछ ठीक नहीं हैं, यह जगह प्रिया को मानों काटने दौड़ रही थी, लेकिन विनय और अजय की जिद के आगे वो बेबस थी…
अजय ने थोड़ी ही देर में टेंट गाड़कर आग जला दी… तीनों उस तपिश को चारों तरफ से घेरे अपनी-अपनी बातों में मशरूफ थे… प्रिया भी अपने अंजान से डर को नज़रअंदाज करने की नाकाम कोशिशें कर रही थी..उसका जिस्म अजीब सी ठंडक का शिकार हो रहा था…कि तभी एकाएक जंगल से एक अजीब आवाज़ गूंज उठी…रात के काले सन्नाटे में शोर मचाती यह आवाज़ जितनी भयानक थी, उतनी ही चुभन भरी भी…
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