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पंजाब की एक अध्यापिका ने बड़ी मिसाल पेश की है। महिला अध्यापिका ने खुद की जायदाद का कोई वारिस न होने के कारण लुधियाना के पाश इलाके भाई रणधीर सिंह नगर में स्थित अपनी 200 गज की आलीशन कोठी गुरुद्वारा सिंह सभा को दान में दे दी। जब इस बात की चर्चा शहर में हुई तो लोगों ने महिला के इस कार्य की सराहना की। लोगों ने उन्हें एक नेक दिल महिला बताया। महिला अध्यापिका ने कहा कि वह समाजसेवा में विश्वास रखती हैं और उनकी कोई औलाद नहीं है। इस कारण उनकी इस कोठी पर गरीबों के लिए अस्पताल बनाया जाए। महिला ने इस कोठी के सारे कागजात भी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को सौंप दिए हैं।
पठानकोट के एक स्कूल में पढ़ाने वालीं वरिंदर कौर वालिया ने कहा कि उनकी कोई औलाद नहीं है। उनके पास लुधियाना के पाश इलाके में 200 गज की आलीशान कोठी है, जिसकी कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये है। जायदाद का कोई वारिस नहीं था। रिश्तेदारों ही निगाहें जायदाद पर थी। वरिंदर कौर वालिया ने कहा कि उनको यह कोठी गुरु ने दी थी और इस कोठी को गुरु चरणों में समर्पित कर दिया।
वह गुरु के चरणों में ही नतमस्तक होकर कोठी लोकसेवा के लिए दे रही हैं। वरिंदर कौर ने कहा कि उनकी सोच रही है कि सामाजिक कार्य करती रहें। जरूरतमंद लोग बिना इलाज के दम तोड़ रहे हैं, उनके लिए इस जगह पर अस्पताल बनवाया जाएगा। गुरुद्वारा प्रबंधकों ने कहा कि गुरु चरणों में जो कोई भी कुछ अर्पित करता है तो गुरु उसे दोगुना करके वापस देते है। सिख धर्म ने हमेशा समाज के प्रति एकता का संदेश दिया है। यहां जो अस्पताल बनेगा, उसमें प्रत्येक नागरिक का बढ़िया उपचार करवाया जाएगा।
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