[ad_1]
सिनेमा के बड़े परदे पर कभी-कभी छोटे किरदार भी लोगों के दिलों में अपनी छाप छोड़ जाते हैं। फिल्ममेकिंग की भाषा में इन किरदारों को निभाने वालों को चरित्र अभिनेता कहते हैं। एक दौर था हिंदी सिनेमा का जब दिग्गज निर्देशक फिल्में बनाते समय सुपर सितारों के साथ-साथ अपनी कहानियों में ऐसे किरदार भी गढ़ते थे, जिनकी वजह से एक कलाकार सुपरस्टार बन पाता था। लेकिन, हिंदी सिनेमा में दमदार किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले तमाम दिग्गज कलाकार इन दिनों मीडिया के हाशिये पर हैं। उर्फी जावेद और मलाइका अरोड़ा से हिट्स पाने की दौड़ में ये कलाकार कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं। लेकिन, हमने ये तय किया है कि हम अपने पाठकों को इन कलाकारों के बारे में बताएंगे और मीडिया के हाशिये पर पहुंच चुके इन सितारों को बनाएंगे, ‘हाशिये के सुपरस्टार’। आइए आपको मिलाते हैं इस सीरीज के अब तक के सुपर सितारों से…
इस सीरीज में हम आपको उन ‘सितारों’ से मिलवाएंगे, जिन्हें आप चेहरा देखते ही पहचान जाते हैं। लेकिन, जिनके बारे में आप ज्यादा जानते नहीं। ऐसा ही एक किरदार है फिल्म ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ के मकसूद भाई का। सफाई कर्मी का ये किरदार छोटा था लेकिन आज भी फिल्म में उन्हें मुन्नाभाई से मिली जादू की झप्पी करोड़ों लोगों को याद है। मकसूद भाई के इस किरदार को परदे पर जीवंत किया अभिनेता सुरेंद्र राजन ने। सुरेंद्र राजन को हिंदी सिनेमा मकसूद भाई के किरदार से ही जानता है, हालांकि इससे पहले सुरेंद्र राजन को लोग गांधी के किरदार के लिए ही ज्यादा जानते थे।
जो दर्जा हिंदी मनोरंजन जगत में प्राण के किरदार राका, अमजद खान के किरदार गब्बर सिंह, कुलभूषण खरबंदा के किरदार शाकाल, मुकेश तिवारी के किरदार जगीरा, नवाजुद्दीन सिद्दीकी के किरदार गणेश गायतोंडे को हासिल है, वही दर्जा धारावाहिक ‘चंद्रकांता’ के क्रूर सिंह के रूप में हासिल है अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र को। और, सिर्फ कूर सिंह ही नहीं, अखिलेंद्र के निभाए तमाम और किरदार उनका जिक्र भर करने से आंखों के सामने तुरंत कौंध जाते हैं। जैसे, फिल्म ‘सरफरोश’ का ‘मिर्ची सेठ’, फिल्म ‘लगान’ का ‘अर्जन’, फिल्म ‘गंगाजल’ का बेईमान पुलिसवाला ‘भूरेलाल’ या फिर फिल्म ‘द लीजेंड ऑफ भगत सिंह’ में चंद्रशेखर आजाद का किरदार। हर किरदार को अखिलेन्द्र ने शिद्दत के साथ जिया है।
बड़ी फिल्मों के छोटे किरदार अपने अभिनय से अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं। किरदार ही उनकी पहचान बनकर रह जाता है। लेकिन, कभी ऐसा भी होता है लोगों को किरदार तो उस नाम से याद रह जाता है लेकिन अधिकतर दर्शकों को ये पता नहीं होता कि ये किरदार किस कलाकार ने परदे पर पर निभाया है। ‘हाशिये के सुपरस्टार’ की तीसरी कड़ी में आज बात उस कलाकार की जिसने फिल्म ‘स्वदेस’ में एक यादगार रोल निभाया। फिल्म रिलीज होने के बाद इसके निर्देशक आशुतोष गोवारिकर के पास तमाम दिग्गज निर्माता, निर्देशकों के फोन आए, सिर्फ ये पता करने को उनकी फिल्म में किसान का किरदार किसने निभाया है? ये कलाकार हैं बचन पचेरा। चलिए उनकी यादों में झांकते हैं, थोड़ा उनको जानते हैं और थोड़ा उनको और अच्छे से पहचानते हैं।
हिंदी सिनेमा में जिन चंद चरित्र अभिनेताओं को उनके चाहने वाले उनकी आवाज से पहचान लेते हैं, उनमें दमदार कलाकार वीरेंद्र सक्सेना का नाम सबसे आगे की कतार में आता है। अपने परिचितों के बीच ‘वीरू’ के नाम से पहचाने जाने वाले वीरेंद्र सक्सेना का संबंध कान्हा की नगरी मथुरा से है। तीन भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे वीरेंद्र सक्सेना के पिता राज बहादुर सक्सेना स्टेनोग्राफर थे। के डी डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन करने वाले वीरेंद्र को पढ़ाई ज्यादा रास आई नहीं। ऐसा इसलिए भी कि पढ़ाई का असल उद्देश्य क्या है, ये बात समझाने की तरकीबें मध्यमवर्गीय परिवार में कम ही मिलती हैं। ‘हाशिये के सुपरस्टार’ की इस कड़ी में बात इन्हीं वीरेंद्र सक्सेना की…
हाशिये के सुपरस्टार: वीरेंद्र सक्सेना ने सुनाई मथुरा से मुंबई तक की कहानी, हर मोड़ पर मिले मददगार
[ad_2]
Source link