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'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- नखशिख, जिसका अर्थ है- पैर के नख से सिर तक के सभी अंग, श्रृंगार रस में नायिका के पैर के नाख़ून से लेकर सिर तक के सभी अंगों का वर्णन। प्रस्तुत है दूधनाथ सिंह की कविता- आँखों में आँखें नहीं हैं
सभी आवाज़ें मिलकर—गड्डमगड्ड सुबक रही हैं...
मेरे सिरहाने, टप-टप अकेली एक बूँद टपक रही है।
आँखों में आँखें नहीं हैं, दर्पण में
दर्पण नहीं है, चुप में चुप नहीं है,
फिर भी तुम्हारे लिए आँसू बहते हैं, दर्पण लहकते हैं,
आँधी में कई-कई स्वर मेरे होंठों में बहते हैं।
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1 hour ago
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