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Jharkhand: झारखंड विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के तीन निलंबित विधायकों की अयोग्यता मामले की सुनवाई स्थगित की

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Jharkhand: झारखंड विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के तीन निलंबित विधायकों की अयोग्यता मामले की सुनवाई स्थगित की

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झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने बुधवार को तीन निलंबित कांग्रेस विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने के मामले की सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी। संक्षिप्त सुनवाई के बाद अध्यक्ष ने यह कहते हुए मामले को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया कि विधायकों ने और समय की मांग करते हुए एक हलफनामा पेश किया है। स्पीकर ने कहा कि ‘मैं इस पर विचार करूंगा और उन्हें अपने फैसले से अवगत कराऊंगा।

जमानत की शर्तों के कारण कोलकाता में फंसे विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के न्यायाधिकरण के समक्ष एक याचिका दायर कर मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय मांगा। तीनों की ओर से पेश वकील इंद्रजीत सिन्हा ने विधायकों के लिए समय मांगा। वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही में शामिल होने वाले कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे अपनी जमानत शर्तों के कारण कोलकाता में फंस गए हैं। वहीं, शिकायतकर्ता के वकील उज्जवल आनंद ने दावा किया कि यह प्रतिवादियों द्वारा देरी करने की रणनीति है। आनंद ने कहा, “वे आठ सप्ताह का समय मांग रहे हैं। अगर वे वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ट्रिब्यूनल के सामने पेश हो सकते हैं, तो वे अपना जवाब भी दाखिल कर सकते हैं।” स्पीकर ने तीनों विधायकों से एक सितंबर तक जवाब मांगा था।

इससे पहले स्पीकर को भेजे गए ईमेल में तीनों ने दलील दी थी कि वर्चुअल मोड में कार्यवाही में शामिल होने के लिए उनके पास लैपटॉप या स्मार्टफोन मौजूद नहीं है। उन्होंने कम से कम 10 नवंबर तक कोलकाता में रहने की उनकी अंतरिम जमानत की शर्त पूरी होने तक कार्यवाही स्थगित करने का अनुरोध किया था। 17 अगस्त को उन्हें तीन महीने के लिए अंतरिम जमानत देते हुए, कलकत्ता हाईकोर्ट ने विधायकों को इस अवधि के दौरान कोलकाता की नगरपालिका सीमा के भीतर रहने का निर्देश दिया था। अंतरिम जमानत 17 नवंबर तक जारी रहेगी और इस मामले को 10 नवंबर को फिर से हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा।

कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजकर इरफान अंसारी, नमन बिक्सल कोंगारी और राजेश कच्छप को विधायकों के रूप में अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। इन्हें 30 जुलाई को पश्चिम बंगाल में लगभग 49 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी के साथ गिरफ्तार किया गया था। वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें कोलकाता छोड़कर बाहर नहीं जाने को कहा है। झारखंड में झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल कांग्रेस ने दावा किया था कि भाजपा उनके विधायकों को 10-10 करोड़ रुपये और मंत्री पद की पेशकश करके हेमंत सोरेन सरकार को गिराने की कोशिश कर रही थी।

पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के पंचला में 30 जुलाई को राष्ट्रीय राजमार्ग 16 पर एक वाहन को रोके जाने के बाद तीनों विधायकों को गिरफ्तार किया गया था और कार में लगभग 49 लाख रुपये नकद पाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि था यह पैसा झारखंड में एक आदिवासी त्योहार के लिए साड़ी खरीदने के लिए लाए थे। पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच बाद में राज्य सीआईडी को सौंप दी थी।

राज्यपाल के फैसले में देरी को लेकर मीडिया ने सोरेन से किया सवाल
वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधायक के रूप में बने रहने और उनकी अयोग्यता पर राज्यपाल के फैसले में देरी के बारे में जब मीडिया ने सोरेन से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि “मैंने इस बारे में विधानसभा में बात की है क्योंकि यह बोलने का हमारा मंच है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों (राज्यपाल) से पूछा जाना चाहिए। हम तभी जवाब देंगे जब उनकी तरफ से कुछ फैसला आएगा।”

विस्तार

झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने बुधवार को तीन निलंबित कांग्रेस विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने के मामले की सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी। संक्षिप्त सुनवाई के बाद अध्यक्ष ने यह कहते हुए मामले को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया कि विधायकों ने और समय की मांग करते हुए एक हलफनामा पेश किया है। स्पीकर ने कहा कि ‘मैं इस पर विचार करूंगा और उन्हें अपने फैसले से अवगत कराऊंगा।

जमानत की शर्तों के कारण कोलकाता में फंसे विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के न्यायाधिकरण के समक्ष एक याचिका दायर कर मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय मांगा। तीनों की ओर से पेश वकील इंद्रजीत सिन्हा ने विधायकों के लिए समय मांगा। वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यवाही में शामिल होने वाले कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे अपनी जमानत शर्तों के कारण कोलकाता में फंस गए हैं। वहीं, शिकायतकर्ता के वकील उज्जवल आनंद ने दावा किया कि यह प्रतिवादियों द्वारा देरी करने की रणनीति है। आनंद ने कहा, “वे आठ सप्ताह का समय मांग रहे हैं। अगर वे वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ट्रिब्यूनल के सामने पेश हो सकते हैं, तो वे अपना जवाब भी दाखिल कर सकते हैं।” स्पीकर ने तीनों विधायकों से एक सितंबर तक जवाब मांगा था।

इससे पहले स्पीकर को भेजे गए ईमेल में तीनों ने दलील दी थी कि वर्चुअल मोड में कार्यवाही में शामिल होने के लिए उनके पास लैपटॉप या स्मार्टफोन मौजूद नहीं है। उन्होंने कम से कम 10 नवंबर तक कोलकाता में रहने की उनकी अंतरिम जमानत की शर्त पूरी होने तक कार्यवाही स्थगित करने का अनुरोध किया था। 17 अगस्त को उन्हें तीन महीने के लिए अंतरिम जमानत देते हुए, कलकत्ता हाईकोर्ट ने विधायकों को इस अवधि के दौरान कोलकाता की नगरपालिका सीमा के भीतर रहने का निर्देश दिया था। अंतरिम जमानत 17 नवंबर तक जारी रहेगी और इस मामले को 10 नवंबर को फिर से हाईकोर्ट में पेश किया जाएगा।


कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजकर इरफान अंसारी, नमन बिक्सल कोंगारी और राजेश कच्छप को विधायकों के रूप में अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। इन्हें 30 जुलाई को पश्चिम बंगाल में लगभग 49 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी के साथ गिरफ्तार किया गया था। वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें कोलकाता छोड़कर बाहर नहीं जाने को कहा है। झारखंड में झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल कांग्रेस ने दावा किया था कि भाजपा उनके विधायकों को 10-10 करोड़ रुपये और मंत्री पद की पेशकश करके हेमंत सोरेन सरकार को गिराने की कोशिश कर रही थी।

पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के पंचला में 30 जुलाई को राष्ट्रीय राजमार्ग 16 पर एक वाहन को रोके जाने के बाद तीनों विधायकों को गिरफ्तार किया गया था और कार में लगभग 49 लाख रुपये नकद पाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि था यह पैसा झारखंड में एक आदिवासी त्योहार के लिए साड़ी खरीदने के लिए लाए थे। पश्चिम बंगाल के पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच बाद में राज्य सीआईडी को सौंप दी थी।

राज्यपाल के फैसले में देरी को लेकर मीडिया ने सोरेन से किया सवाल

वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधायक के रूप में बने रहने और उनकी अयोग्यता पर राज्यपाल के फैसले में देरी के बारे में जब मीडिया ने सोरेन से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि “मैंने इस बारे में विधानसभा में बात की है क्योंकि यह बोलने का हमारा मंच है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों (राज्यपाल) से पूछा जाना चाहिए। हम तभी जवाब देंगे जब उनकी तरफ से कुछ फैसला आएगा।”

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