Home Breaking News M-777 Howitzer: अरुणाचल सेक्टर में LAC पर चीन को जवाब देंगी अल्ट्रा-लाइट M-777 हॉवित्जर तोप, जानें इनकी खासियत

M-777 Howitzer: अरुणाचल सेक्टर में LAC पर चीन को जवाब देंगी अल्ट्रा-लाइट M-777 हॉवित्जर तोप, जानें इनकी खासियत

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M-777 Howitzer: अरुणाचल सेक्टर में LAC पर चीन को जवाब देंगी अल्ट्रा-लाइट M-777 हॉवित्जर तोप, जानें इनकी खासियत

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वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सामरिक और संवेदनशील क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना अपनी तैयारियों को धार दे रही है। चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना अपने नवीनतम हथियारों को सीमा पर तैनात कर रही है। इसी क्रम में अब अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में नए एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर्स तोपों को तैनात किया है। चीन के साथ सीमा पर जारी गतिरोध के बीच लद्दाख सेक्टर के कई संवेदनशील इलाकों में हॉवित्जर तैनात किए जाने के बाद अरुणाचल प्रदेश के इन क्षेत्रों में सेना की मारक क्षमता में इजाफा हुआ है। एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर्स तोपें दुश्मन के खिलाफ तेज और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है। 

भारत सीमा पर बढ़ा रहा अपनी ताकत
गौरतलब है कि जून-2020 में गलवान घाटी में चीनी सैनिकों और भारतीय सैनिकों के बीच संघर्ष के बाद से भारत अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ा रहा है। लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी एलएसी के साथ सभी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत ने कई हथियारों को तैनात किया है। सेना के अधिकारियों ने बताया कि सामरिक और संवेदनशील क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में एम-777 हॉवित्जर की तैनाती के साथ मानव रहित हवाई वाहनों, सैन्य विमानों और निगरानी उपकरणों सहित अतिरिक्त हवाई संपत्ति ने अरुणाचल प्रदेश क्षेत्र में भारत की सैन्य तैयारियों को बढ़ाया है।

ये है खासियत
गौरतलब है कि अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं M777 होवित्जर तोपों को इस्तेमाल करती रही हैं। अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में इन तोपों का इस्तेमाल किया था। साल 2018 में इन्हें भारतीय सेना में शामिल किया गया था। इन तोपों को 70 फीसदी हिस्सा अमेरिका में बनता है और बाकी ब्रिटेन में। M777 तोपों अपनी ही पूर्ववर्ती M198 से 42 फीसदी हल्की हैं। इनका वजन लगभग 4,100 केजी है। टाइटेनियम की बनी होने का कारण इनका वजन कम है। इन तोपों को CH-47 हेलीकॉप्टरों और ट्रकों से आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। इनमें डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम लगे हैं। इसके अलावा इन तोपों में जीपीएस भी जोड़ा जा सकता है, जिसके बाद ये 40 किमी तक सटीक निशाना लगा सकती हैं।

हो चुकी है कई दौर की वार्ता
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तीन साल से गतिरोध कायम है। दोनों देशों की सेनाओं ने वहां मोर्चेबंदी कर रखी है। दोनों देशों ने इस सीमा पर करीबन 50 से 60 हजार सैनिकों को तैनात कर रखा है। इलाके से सेना की वापसी और शांति बनाए रखने के लिए अब तक दोनों देशों के बीच 15 बार सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता हो चुकी है। 
 

विस्तार

वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सामरिक और संवेदनशील क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना अपनी तैयारियों को धार दे रही है। चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना अपने नवीनतम हथियारों को सीमा पर तैनात कर रही है। इसी क्रम में अब अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में नए एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर्स तोपों को तैनात किया है। चीन के साथ सीमा पर जारी गतिरोध के बीच लद्दाख सेक्टर के कई संवेदनशील इलाकों में हॉवित्जर तैनात किए जाने के बाद अरुणाचल प्रदेश के इन क्षेत्रों में सेना की मारक क्षमता में इजाफा हुआ है। एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर्स तोपें दुश्मन के खिलाफ तेज और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है। 

भारत सीमा पर बढ़ा रहा अपनी ताकत

गौरतलब है कि जून-2020 में गलवान घाटी में चीनी सैनिकों और भारतीय सैनिकों के बीच संघर्ष के बाद से भारत अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ा रहा है। लगभग 3,500 किलोमीटर लंबी एलएसी के साथ सभी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत ने कई हथियारों को तैनात किया है। सेना के अधिकारियों ने बताया कि सामरिक और संवेदनशील क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में एम-777 हॉवित्जर की तैनाती के साथ मानव रहित हवाई वाहनों, सैन्य विमानों और निगरानी उपकरणों सहित अतिरिक्त हवाई संपत्ति ने अरुणाचल प्रदेश क्षेत्र में भारत की सैन्य तैयारियों को बढ़ाया है।

ये है खासियत

गौरतलब है कि अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं M777 होवित्जर तोपों को इस्तेमाल करती रही हैं। अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में इन तोपों का इस्तेमाल किया था। साल 2018 में इन्हें भारतीय सेना में शामिल किया गया था। इन तोपों को 70 फीसदी हिस्सा अमेरिका में बनता है और बाकी ब्रिटेन में। M777 तोपों अपनी ही पूर्ववर्ती M198 से 42 फीसदी हल्की हैं। इनका वजन लगभग 4,100 केजी है। टाइटेनियम की बनी होने का कारण इनका वजन कम है। इन तोपों को CH-47 हेलीकॉप्टरों और ट्रकों से आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। इनमें डिजिटल फायर कंट्रोल सिस्टम लगे हैं। इसके अलावा इन तोपों में जीपीएस भी जोड़ा जा सकता है, जिसके बाद ये 40 किमी तक सटीक निशाना लगा सकती हैं।

हो चुकी है कई दौर की वार्ता

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तीन साल से गतिरोध कायम है। दोनों देशों की सेनाओं ने वहां मोर्चेबंदी कर रखी है। दोनों देशों ने इस सीमा पर करीबन 50 से 60 हजार सैनिकों को तैनात कर रखा है। इलाके से सेना की वापसी और शांति बनाए रखने के लिए अब तक दोनों देशों के बीच 15 बार सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता हो चुकी है। 

 

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