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अनोखे अंदाज में प्रदर्शन कर हरियाणा के रोहतक जिले के रहने वाले 102 वर्षीय दुलीचंद सोशल मीडिया पर छा चुके हैं। जिंदा होने के बाद भी उनकी बुढ़ापा पेंशन काट दी गई थी। अब इस मामले की सरकार जांच कराएगी। मामला हरियाणा के सीएम मनोहर लाल तक पहुंचा तो उन्होंने रोहतक के एडीसी को जांच का आदेश दिया। पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि देखा जाएगा कि आखिर पेंशन क्यों काटी गई। पेंशन गलती से कटी है तो दोबारा शुरू कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि एक दो उदाहरण कि वजह से सिस्टम को गलत बताना ठीक नहीं है। सरकार ने सिर्फ गलत जानकारी देने वालों की पेंशन काटी है। किसी की पेंशन गलती से कटी है तो एडीसी लेवल पर इस प्रकार के मुद्दों के निपटाने का प्रावधान है। सीएम ने कहा कि पात्र बुजुर्ग ही पेंशन लें। सरकार का ध्येय पारदर्शी तरीके से सरकारी सुविधाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कांग्रेस पर भी हमला बोला। कहा, कांग्रेस ने बुजुर्गों को वसूली के नोटिस भेजे थे लेकिन हमारी सरकार ऐसा नहीं करेगी।
बैंड बाजे के साथ पहुंचे थे जीवित होने का प्रमाण देने
रोहतक के गांव गांधरा निवासी 102 वर्षीय दुलीचंद बुढ़ापा पेंशन काटे जाने से आहत होकर गुरुवार को बैंड बाजे के साथ अपने जीवित होने का प्रमाण देने एडीसी कार्यालय पहुंचे थे। दुलीचंद पगड़ी पहन, हाथ में फरसा लेकर रथ पर सवार होकर निकले थे। दुलीचंद के हाथ में पट्टिका थी, जिस पर लिखा था ‘थारा फूफा जिंदा है’।
रथ के आगे बैंड की धुन पर लोग डांस कर रहे थे। यह सब देख एडीसी महेंद्रपाल ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। सामाजिक कार्यकर्ता नवीन जयहिंद ने बताया था कि सरकार ने अपने रिकॉर्ड में दुलीचंद को मृत घोषित कर उनकी बुढ़ापा पेंशन काट दी।
24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद भी प्रशासन ने पेंशन दुरुस्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया तो प्रदर्शन स्वरूप बरात निकाली गई। बुजुर्ग के आधार कार्ड, पैन कार्ड, फैमिली आईडी व बैंक स्टेटमेंट भी प्रशासन व पूर्व मंत्री को दिखाए गए।
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