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उत्तर प्रदेश में विश्वस्तरीय ट्राइबल म्यूजियम बनेगा। इसके लिए लखनऊ पहुंचे केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. नवलजीत कपूर के साथ विशेष कार्ययोजना बनाई गई है। इस म्यूजियम में जहां आदिवासियों की संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी, वहीं उनके उत्पादों की बिक्री के लिए दुकानें भी होंगी। संयुक्त सचिव ने समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण से भी मुलाकात कर प्रदेश में जनजाति कल्याण की योजनाओं में तेजी लाने के लिए विचार-विमर्श किया।
राष्ट्रपति चुने जाने से पहले द्रौपदी मुर्मू जब यूपी के विधायकों व सांसदों से वोट मांगने आई थीं तो यहां प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आदिवासियों ने आकर उनका स्वागत किया था। मुर्मू ने इन क्षणों को यादगार बनाने के लिए ग्रुप फोटो करवाया था। साथ ही यहां आदिवासियों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं में विशेष रुचि ली थी। इसके बाद से यहां आदिवासियों के लिए केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को लागू करने के लिए लगातार काम हो रहे हैं।
हाल ही लखनऊ में ट्राइबल म्यूजियम बनाने के लिए मोहान रोड पर जमीन चिह्नित की गई। इसे देखने केंद्रीय मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. नवलजीत कपूर बृहस्पतिवार शाम लखनऊ पहुंचे। शुक्रवार को उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं की प्रगति को समझा। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण के साथ भी वार्ता की। तय हुआ है कि अन्य प्रदेशों में बनाए गए ट्राइबल म्यूजियम का यूपी की टीम अध्ययन करेगी। म्यूजियम यूपी की 13-14 लाख जनजाति आबादी का प्रतिनिधित्व करेगा। बैठक में जनजाति कल्याण विभाग की उप निदेशक प्रियंका वर्मा भी मौजूद रहीं।
योजनाओं में तेजी लाने का प्रयास : असीम अरुण
समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने कहा कि केंद्र सरकार जनजातियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें से एकलव्य स्कूल योजना उनके आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक विकास के लिए काफी अहम है। प्रदेश सरकार का प्रयास रहेगा कि इस योजना के तहत अधिक से अधिक एकलव्य स्कूल यूपी में खोले जा सकें।
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