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सैलानियों ने कर्तव्य पथ पर जाकर रविवार की छुट्टी का भरपूर आनंद उठाया। दोपहर से यहां भारी हुजूम इकट्ठा हो गया था। सूरज ढलने तक यहां चलने भर की जगह नहीं बची। इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक नजारा कुछ तरह था, मानो पैदल मार्च निकल रहा हो। लोग सेल्फी खींचते, रंगबिरंगी लाइटिंग देखते आउटिंग का भरपूर मजा लिया।
यहां से देखो, इंडिया गेट कितना सुंदर लग रहा है। शालिनी ने पति का हाथ पकड़कर कुछ इस अंदाज में फोटो खींचने के लिए रोका। दोनों अपनी छोटी सी बेटी को लेकर बदरपुर से इंडिया गेट घूमने आए थे। रविवार को शाम ढलते ही इंडिया गेट के ठीक ऊपर बड़े आकार का चांद निकला था, जो इसकी सुंदरता और बढ़ा रहा था। यहां बीते दो दिन की अपेक्षा ज्यादा भीड़ थी। लोग अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर यहां पहुंचे थे। इंडिया गेट से लेकर राष्ट्रपति भवन तक कर्तव्य पथ के दोनों तरफ के लॉन भरे थे। वाटर पार्क के किनारे शांतिभाव से बैठकर लोग परिवार के साथ बातचीत करते नजर आए।
नेताजी को सलामी दिए बिना नहीं जाएंगे
सादिक नगर से आए चंदनराम आर्य ने कहा कि इंडिया गेट को पास से देखे वर्षों बीत गए थे। अब फिर से खुला तो परिवार को घुमाने ले आए हैं। उन्होंने बताया कि वो नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को सलामी देने जा रहे हैं। जब भी इंडिया गेट आएंगे तो बिना नेताजी को सलामी दिए वापस नहीं जाएंगे।
बुजुर्ग दोस्तों ने तय किया, इंडिया गेट चलते हैं
गाजियाबाद से आए चार बुजुर्ग दोस्त पीसी डाबर(75 साल), श्रीप्रकाश गुप्ता(75 साल), शुभाष ठाकुर(62 साल) और संजीव (63 साल) बचपन के दोस्त हैं। ये हमेशा साथ में इंडिया गेट घूमने आते रहे हैं। लेकिन ऐसा इंडिया गेट पहली बार देखा है। पीसी डाबर ने चहकते हुए कहा कि इंडिया गेट अलग सा लग रहा है। पंडरा रोड पर वह नौकरी करते थे। लेकिन इंडिया गेट का ऐसा नजारा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।
लाइट साउंड शो होता तो और मजा आता
रविवार को इंडिया गेट पर लाइट साउंड शो नहीं आयोजित किया गया। लेकिन अधिकतर लोग देर शाम विशेष रूप से ये शो ही देखने आए थे। नोएडा से आए संजीव और कमल ने कहा कि लाइट साउंड शो होता तो और मजा आता। दोस्तों ने उन्हें बताया था कि यहां शाम को रोजाना भव्य शो होता है।
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