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अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मंचों पर अपना दबदबा रखने वाले अमेरिका में हिंदी को विरासत भाषा का दर्जा प्राप्त है और सौ विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है। छुट्टियों में चलने वाली विशेष कक्षाओं में भारतीय मूल के अलावा अमेरिकी बच्चे भी हिंदी पढ़ते हैं। कुछ बच्चे तो बॉलीवुड फिल्में देखने के लिए हिंदी पढ़ते हैं।
डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल के भाषा संशोधन साल 2015 के अध्ययन के आंकड़ों से पता चलता है, संपूर्ण विश्व में हिंदी बोलने या जानने वालों की संख्या 18 फीसदी है। वहीं, अमेरिका में 22,12,415 लोग हिंदी बोलते और जानते हैं। फिर भी अमेरिकी सरकार हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हिंदी कार्यक्रम चलाती है। अमेरिकी सरकार के शिक्षा विभाग में हिंदी कार्यक्रम के निदेशक अशोक ओझा बताते हैं कि अमेरिका में हिंदी को विरासत की भाषा का दर्जा प्राप्त है और सौ विश्वविद्यालयों में हिंदी शिक्षा की व्यवस्था है।
ओझा ने हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए युवा हिंदी संस्थानम और हिंदी संगम फाउंडेशन की स्थापना की है। इसके जरिये छुट्टियों में अलग कक्षाएं भी चलाई जाती हैं। वह बताते हैं कि इस दौरान वे छात्रों को केवल भाषा का ही ज्ञान नहीं देते, बल्कि उन्हें भारत की विरासत के बारे में भी जानकारी देते हैं।
16 नवंबर को मुंबई पहुंचेगा अमेरिकी छात्रों का दल
अशोक ओझा ने बताया कि अमेरिका के हिंदी के छात्रों का एक दल 16 नवंबर को मुंबई आने वाला है। वह एक महीने भारत में रहकर जलवायु परिवर्तन के खतरे पर अध्ययन करेगा। इसमें हिंदी छात्रों के अलावा अमेरिका के विश्वविद्यालय की टीम भी होगी। यह टीम मुंबई, राजस्थान और उत्तराखंड की तराई में प्रवास करेगी। यहां से एकत्र की गई अध्ययन सामग्रियों से अमेरिका में पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।
छात्रों का भारत दौरा हिंदी की सेवा के लिए भारत के राष्ट्रपति की ओर से पुरस्कृत न्यूयाॅर्क विश्वविद्यालय की प्रो. गैब्रिएला निक इलेवा के मार्गदर्शन में निश्चित हुआ है। बतौर अकेडमी चीफ जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन की रूपरेखा भी उन्होंने ही तैयार की है।
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