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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से द्वारका-शारदा एवं ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य रहे स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को मरणोपरांत भारत रत्न देने के लिए आवाज उठाई गई।
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के धर्म प्रचार के कार्यों, आंदोलनों पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज ने केंद्र सरकार का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए कई बड़े आंदोलनों के जरिए समाज को ताकत दी थी।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि शंकराचार्य ने सनातन धर्म की ध्वजा को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपना समूचा जीवन लगा दिया। वह आखिरी सांस तक सनातन धर्म के का संरक्षण, संवर्धन के लिए संघर्ष करते रहे। चाहे अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन रहा हो या फिर शिरडी साईं मंदिर और ईस्कान मंदिर विवाद, वह हमेशा सनातनी हिंदू समाज के विकास और रक्षा के लिए संघर्षरत रहे।
उन्होंने गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा भी दिलाया और अविरल-निर्मल धारा के लिए देशव्यापी आंदोलन चलाया था। देश में हिंदू सनातन धर्म को बढ़ाने के लिए उन्होंने सैकड़ों आंदोलन किए और जेल की भी यात्राएं कीं। ऐसे महान संत को भारत रत्न से विभूषित किया जाना चाहिए। इससे संत समाज का गौरव बढ़ेगा।
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री और पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक महंत हरि गिरि ने ने भी शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज को भारत रत्न से विभूषित करने के लिए आवाज उठाई। कहा कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने सनातन परंपरा को बढ़ाने के लिए अनेक बड़े धार्मिक आयोजन और कार्यशालाएं आयोजित कीं थीं। राष्ट्र निर्माण के उनके कार्यों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
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