Home Breaking News Exclusive: दिगंबर कामत बोले- यहां CM बनने नहीं आया हूं, कांग्रेस सुधारे रवैया, नहीं तो मिलते रहेंगे ‘सरप्राइज’

Exclusive: दिगंबर कामत बोले- यहां CM बनने नहीं आया हूं, कांग्रेस सुधारे रवैया, नहीं तो मिलते रहेंगे ‘सरप्राइज’

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Exclusive: दिगंबर कामत बोले- यहां CM बनने नहीं आया हूं, कांग्रेस सुधारे रवैया, नहीं तो मिलते रहेंगे ‘सरप्राइज’

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कांग्रेस को इस बात का अहसास ही नहीं है कि वह पूरी तरीके से खोखली हो रही है। सिर्फ दिगंबर कामत ही नहीं बल्कि आने वाले दिनों में अगर कांग्रेस का यह रवैया नहीं सुधरा तो उनको ऐसे और भी कई ‘सरप्राइज’ मिलते रहेंगे। गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ जैसे न जाने कितने कद्दावर नेता पार्टी छोड़ गए। कांग्रेस, पार्टी को जोड़ने की बजाय भारत जोड़ो अभियान में लगी है। इससे कोई वोट बैंक नहीं बढ़ने वाला। गोवा की तर्ज पर अभी और भी कई नेता पार्टी छोड़ेंगे और मैं यहां पर कोई मुख्यमंत्री बनने नहीं आया हूं। मेरी पूरी कमान भाजपा के हाथ में है। यह कहना है गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे और बुधवार को कांग्रेस को बड़ा झटका देकर भाजपा में शामिल होने वाले दिगंबर कामत का। दिगंबर कामत ने अमर उजाला डॉट कॉम के आशीष तिवारी से विशेष बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश।

सवाल: आप गोवा के मुख्यमंत्री रहे हैं। कांग्रेस के बड़े चेहरे रहे। फिर ऐसा क्या हो गया कि आप ने पार्टी का दामन छोड़ दिया।

जवाब: पार्टी में कोई लीडरशिप तो दिखती नहीं है। खोखली हो रही है पार्टी। कांग्रेस आलाकमान और पार्टी को इस बात की कोई परवाह ही नहीं है कि अगर कोई नेता जमीन से जुड़कर काम करना चाहे, तो उसे कैसे अच्छा मुहैया कराया जाए। ऐसे में और कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं होता है।

सवाल: कांग्रेस इस वक्त भारत जोड़ो यात्रा कर रही है। पार्टी के कई कद्दावर नेता दामन छोड़ कर जा चुके हैं। ऐसे में पार्टी की ओर से बनाए गए एक मुख्यमंत्री का कठिन परिस्थितियों में साथ छोड़ देना, सवाल तो उठते हैं आप पर।

जवाब: सिर्फ मैं अकेला पूर्व मुख्यमंत्री ही पार्टी छोड़ कर नहीं गया है, कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने इस्तीफा दे दिया। गुलाम नबी आजाद कांग्रेस पार्टी की रीढ़ की हड्डी थे, उन्होंने इस्तीफा दे दिया। कपिल सिब्बल बड़े नेताओं में शुमार किए जाते थे उन्होंने इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस के कई राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं ने इस्तीफा दे दिया और पार्टी को इस बात की कोई परवाह ही नहीं है कि नेता छोड़कर क्यों जा रहे हैं। वह अपनी कमियां ढूंढने की वजह नेताओं के जाने के बेकार से बहाने ढूंढते हैं।

सवाल: आपको पार्टी की इतनी ही चिंता है, तो आपको यह बात पार्टी फोरम पर भी रखनी चाहिए थी। क्या कभी आपने ऐसी बातें आलाकमान तक पहुंचाई।

जवाब: वहां किसी के पास फुर्सत ही कहां है। पार्टी के बड़े नेताओं से मिलने का वक्त ही नहीं मिलता है। जितने बड़े नेता पार्टी छोड़कर गए हैं आज पार्टी की नजरों में सब दागदार हैं। आप देखते रहिए, अगर यही हालत पार्टी की रही, तो कांग्रेस पार्टी को ऐसे और भी बहुत से ‘सरप्राइज’ मिलते रहेंगे।

सवाल: कहा जा रहा है कि चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से आपको जो जिम्मेदारियां दी जानी थीं, वह नहीं मिलीं। इसीलिए आप नाराज होकर पार्टी छोड़ गए।

जवाब: सवाल जिम्मेदारियों के मिलने और न मिलने का है ही नहीं। सवाल तो पब्लिक का है। सवाल जनता का है। जब उनके चुने हुए नुमाइंदों को पार्टी की ओर से काम करने की आजादी मिलेगी नहीं। उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए पार्टी आलाकमान कोई रणनीति और रूपरेखा तैयार ही नहीं करेगा। तो क्या होगा। हम तो जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं। हमें तो हर पांच साल बाद जनता के बीच में जाना ही जाना है।

सवाल: लेकिन कांग्रेस ने कहा है कि गोवा में भारतीय जनता पार्टी ने ‘ऑपरेशन कीचड़’ किया है। क्या आपको भी लगता है कि आप लोगों को किसी ऑपरेशन के तहत भाजपा में शामिल कराया गया है।

जवाब: कांग्रेस पार्टी की ओर से दिए गए इस बयान से ही स्पष्ट होता है कि पार्टी को इस बात से बिल्कुल परवाह नहीं है कि उनके नेता क्यों छोड़ कर जा रहे हैं। पार्टी को आत्ममंथन करना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है। बल्कि पार्टी के लोग इसको न जाने कौन से ऑपरेशन की संज्ञा दे रहे हैं। मैं और हमारे कोई भी साथी किसी भी ऑपरेशन के तहत भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं।

सवाल: राहुल गांधी, पार्टी नेतृत्व और कांग्रेस की पदयात्रा। अब इसे लेकर आप क्या सोच रहे हैं?

जवाब: यह सब सोचने का काम हमारा नहीं है अब। जब यह काम हमारा था तो मैं पार्टी को हमेशा सचेत करता रहता था। हमेशा सचेत करता रहता था। तब ना तो वहां कोई सुनने वाला था और न उस पर कोई जवाब देने वाला। अब यह काम कांग्रेस का है। लेकिन एक बात तय है कि पदयात्रा से वोट बैंक नहीं बढ़ा करते हैं। पार्टी अभी भी बहुत बड़ी-बड़ी गलतियां कर रही है।

सवाल: भाजपा तो बाहर से आए हुए नेताओं को मुख्यमंत्री भी बना देती है। कुछ इस तरीके का भविष्य के लिए कोई इशारा मिला है क्या?

जवाब: मैं भाजपा का सच्चा सिपाही हूं। सभी कुछ पार्टी पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया है। वह जो तय करेगी उसके मुताबिक हम और हमारे कार्यकर्ता काम करेंगे। पूरे देश और दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डंका बज रहा। हमें उनके विजन और मिशन को आगे लेकर बढ़ना। गोवा के मुख्यमंत्री इतना अच्छा काम कर रहे हैं कि कांग्रेस से आए नेता न सिर्फ उनकी मदद करेंगे, बल्कि भाजपा की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाएंगे।

विस्तार

कांग्रेस को इस बात का अहसास ही नहीं है कि वह पूरी तरीके से खोखली हो रही है। सिर्फ दिगंबर कामत ही नहीं बल्कि आने वाले दिनों में अगर कांग्रेस का यह रवैया नहीं सुधरा तो उनको ऐसे और भी कई ‘सरप्राइज’ मिलते रहेंगे। गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ जैसे न जाने कितने कद्दावर नेता पार्टी छोड़ गए। कांग्रेस, पार्टी को जोड़ने की बजाय भारत जोड़ो अभियान में लगी है। इससे कोई वोट बैंक नहीं बढ़ने वाला। गोवा की तर्ज पर अभी और भी कई नेता पार्टी छोड़ेंगे और मैं यहां पर कोई मुख्यमंत्री बनने नहीं आया हूं। मेरी पूरी कमान भाजपा के हाथ में है। यह कहना है गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे और बुधवार को कांग्रेस को बड़ा झटका देकर भाजपा में शामिल होने वाले दिगंबर कामत का। दिगंबर कामत ने अमर उजाला डॉट कॉम के आशीष तिवारी से विशेष बातचीत की। पेश है बातचीत के कुछ अंश।

सवाल: आप गोवा के मुख्यमंत्री रहे हैं। कांग्रेस के बड़े चेहरे रहे। फिर ऐसा क्या हो गया कि आप ने पार्टी का दामन छोड़ दिया।

जवाब: पार्टी में कोई लीडरशिप तो दिखती नहीं है। खोखली हो रही है पार्टी। कांग्रेस आलाकमान और पार्टी को इस बात की कोई परवाह ही नहीं है कि अगर कोई नेता जमीन से जुड़कर काम करना चाहे, तो उसे कैसे अच्छा मुहैया कराया जाए। ऐसे में और कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं होता है।

सवाल: कांग्रेस इस वक्त भारत जोड़ो यात्रा कर रही है। पार्टी के कई कद्दावर नेता दामन छोड़ कर जा चुके हैं। ऐसे में पार्टी की ओर से बनाए गए एक मुख्यमंत्री का कठिन परिस्थितियों में साथ छोड़ देना, सवाल तो उठते हैं आप पर।

जवाब: सिर्फ मैं अकेला पूर्व मुख्यमंत्री ही पार्टी छोड़ कर नहीं गया है, कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने इस्तीफा दे दिया। गुलाम नबी आजाद कांग्रेस पार्टी की रीढ़ की हड्डी थे, उन्होंने इस्तीफा दे दिया। कपिल सिब्बल बड़े नेताओं में शुमार किए जाते थे उन्होंने इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस के कई राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं ने इस्तीफा दे दिया और पार्टी को इस बात की कोई परवाह ही नहीं है कि नेता छोड़कर क्यों जा रहे हैं। वह अपनी कमियां ढूंढने की वजह नेताओं के जाने के बेकार से बहाने ढूंढते हैं।

सवाल: आपको पार्टी की इतनी ही चिंता है, तो आपको यह बात पार्टी फोरम पर भी रखनी चाहिए थी। क्या कभी आपने ऐसी बातें आलाकमान तक पहुंचाई।

जवाब: वहां किसी के पास फुर्सत ही कहां है। पार्टी के बड़े नेताओं से मिलने का वक्त ही नहीं मिलता है। जितने बड़े नेता पार्टी छोड़कर गए हैं आज पार्टी की नजरों में सब दागदार हैं। आप देखते रहिए, अगर यही हालत पार्टी की रही, तो कांग्रेस पार्टी को ऐसे और भी बहुत से ‘सरप्राइज’ मिलते रहेंगे।

सवाल: कहा जा रहा है कि चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से आपको जो जिम्मेदारियां दी जानी थीं, वह नहीं मिलीं। इसीलिए आप नाराज होकर पार्टी छोड़ गए।

जवाब: सवाल जिम्मेदारियों के मिलने और न मिलने का है ही नहीं। सवाल तो पब्लिक का है। सवाल जनता का है। जब उनके चुने हुए नुमाइंदों को पार्टी की ओर से काम करने की आजादी मिलेगी नहीं। उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए पार्टी आलाकमान कोई रणनीति और रूपरेखा तैयार ही नहीं करेगा। तो क्या होगा। हम तो जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं। हमें तो हर पांच साल बाद जनता के बीच में जाना ही जाना है।

सवाल: लेकिन कांग्रेस ने कहा है कि गोवा में भारतीय जनता पार्टी ने ‘ऑपरेशन कीचड़’ किया है। क्या आपको भी लगता है कि आप लोगों को किसी ऑपरेशन के तहत भाजपा में शामिल कराया गया है।

जवाब: कांग्रेस पार्टी की ओर से दिए गए इस बयान से ही स्पष्ट होता है कि पार्टी को इस बात से बिल्कुल परवाह नहीं है कि उनके नेता क्यों छोड़ कर जा रहे हैं। पार्टी को आत्ममंथन करना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है। बल्कि पार्टी के लोग इसको न जाने कौन से ऑपरेशन की संज्ञा दे रहे हैं। मैं और हमारे कोई भी साथी किसी भी ऑपरेशन के तहत भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं।

सवाल: राहुल गांधी, पार्टी नेतृत्व और कांग्रेस की पदयात्रा। अब इसे लेकर आप क्या सोच रहे हैं?

जवाब: यह सब सोचने का काम हमारा नहीं है अब। जब यह काम हमारा था तो मैं पार्टी को हमेशा सचेत करता रहता था। हमेशा सचेत करता रहता था। तब ना तो वहां कोई सुनने वाला था और न उस पर कोई जवाब देने वाला। अब यह काम कांग्रेस का है। लेकिन एक बात तय है कि पदयात्रा से वोट बैंक नहीं बढ़ा करते हैं। पार्टी अभी भी बहुत बड़ी-बड़ी गलतियां कर रही है।

सवाल: भाजपा तो बाहर से आए हुए नेताओं को मुख्यमंत्री भी बना देती है। कुछ इस तरीके का भविष्य के लिए कोई इशारा मिला है क्या?

जवाब: मैं भाजपा का सच्चा सिपाही हूं। सभी कुछ पार्टी पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया है। वह जो तय करेगी उसके मुताबिक हम और हमारे कार्यकर्ता काम करेंगे। पूरे देश और दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डंका बज रहा। हमें उनके विजन और मिशन को आगे लेकर बढ़ना। गोवा के मुख्यमंत्री इतना अच्छा काम कर रहे हैं कि कांग्रेस से आए नेता न सिर्फ उनकी मदद करेंगे, बल्कि भाजपा की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाएंगे।

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