Home Breaking News Russia: मोदी-पुतिन की बैठक से पहले रूस का बड़ा बयान, US के दबाव के बावजूद हमने समय पर दिए S-400 मिसाइल सिस्टम

Russia: मोदी-पुतिन की बैठक से पहले रूस का बड़ा बयान, US के दबाव के बावजूद हमने समय पर दिए S-400 मिसाइल सिस्टम

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Russia: मोदी-पुतिन की बैठक से पहले रूस का बड़ा बयान, US के दबाव के बावजूद हमने समय पर दिए S-400 मिसाइल सिस्टम

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रूस ने यूक्रेन से युद्ध के बीच भी भारत को एस-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम्स की आपूर्ति बेहतर ढंग से की थी। इतना ही नहीं उसने वाशिंगटन के दबाव और अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत को अपनी सबसे उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली एस-400 समय पर पहुंचा दी है। भारत में रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव ने बुधवार को ये दावा किया। उन्होंने कहा कि मास्को और नई दिल्ली अपने राष्ट्रीय हितों के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं।

भारत में रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव का ये बयान तब आया है जब इस सप्ताह उज्बेकिस्तान में एससीओ शिखर सम्मेलन के मौके पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक बैठक होनी है। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच एशिया प्रशांत क्षेत्र और संयुक्त राष्ट्र और जी20 के भीतर द्विपक्षीय सहयोग और रणनीतिक स्थिरता के मुद्दों पर चर्चा करने की उम्मीद है। डेनिस एलिपोव ने कहा कि हम और हमारे भारतीय साझेदार समय सीमा सहित अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में रुचि रखते हैं। उन्होंने  कहा कि रूस और भारत ने कई प्रमुख पहलों को सफलतापूर्वक लागू कर लिया है, जिसकी वजह से हमारा सहयोग अद्वितीय रहा है। 

उन्होंने कहा कि इन पहलों में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना, एके-203 राइफल निर्माण कार्यक्रम, लड़ाकू विमान निर्माण में सहयोग, मुख्य युद्धक टैंक के निर्माण के साथ-साथ फ्रिगेट, पनडुब्बी, ब्रह्मोस और अन्य मिसाइल परियोजनाओं का निर्माण शामिल है। एलिपोव ने कहा, ‘‘रूस भारत के साथ समान और सम्मानजनक संबंध रखता है। हमारा सहयोग वैश्विक शांति, स्थिरता और सतत विकास के लिए एक निर्णायक कारक की भूमिका निभाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। हम अपनी क्षमता का उपयोग करने और दोनों मित्र देशों के लोगों के लाभ के लिए नए क्षितिज तलाशने को आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।’’

गौरतलब है कि रूस ने पिछले साल दिसंबर में मिसाइल की पहली रेजिमेंट की डिलीवरी शुरू की थी। S-400 को रूस की सबसे उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली के रूप में जाना जाता है। ‘ट्रायम्फ’ इंटरसेप्टर-आधारित यह मिसाइल प्रणाली आने वाले शत्रुतापूर्ण विमानों, मिसाइलों और यहां तक कि 400 किमी तक की दूरी पर ड्रोन को भी नष्ट कर सकती है। 
इस मिसाइल प्रणाली को पहले से ही इस तरह से तैनात किया गया है कि यह उत्तरी क्षेत्र में चीन के साथ सीमा के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पाकिस्तान के साथ सीमा को भी कवर कर सके।

दोनों देशों के बीच बढ़ रहा व्यापार
साथ ही भारत में रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव ने दोनों देशों के बीच व्यापार पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि साल 2022 के पहले हह महीनों में रूस और भारत के बीच व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इस समयावधि में दोनों के बीच व्यापार 11 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि हम कह सकते हैं कि हमारा व्यापार और आर्थिक सहयोग बदल रहा है। इस दौरान उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार 2025 तक बढ़कर 30 अरब डॉलर के स्तर को पार कर सकता है।

विस्तार

रूस ने यूक्रेन से युद्ध के बीच भी भारत को एस-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम्स की आपूर्ति बेहतर ढंग से की थी। इतना ही नहीं उसने वाशिंगटन के दबाव और अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत को अपनी सबसे उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली एस-400 समय पर पहुंचा दी है। भारत में रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव ने बुधवार को ये दावा किया। उन्होंने कहा कि मास्को और नई दिल्ली अपने राष्ट्रीय हितों के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं।

भारत में रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव का ये बयान तब आया है जब इस सप्ताह उज्बेकिस्तान में एससीओ शिखर सम्मेलन के मौके पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक बैठक होनी है। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच एशिया प्रशांत क्षेत्र और संयुक्त राष्ट्र और जी20 के भीतर द्विपक्षीय सहयोग और रणनीतिक स्थिरता के मुद्दों पर चर्चा करने की उम्मीद है। डेनिस एलिपोव ने कहा कि हम और हमारे भारतीय साझेदार समय सीमा सहित अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में रुचि रखते हैं। उन्होंने  कहा कि रूस और भारत ने कई प्रमुख पहलों को सफलतापूर्वक लागू कर लिया है, जिसकी वजह से हमारा सहयोग अद्वितीय रहा है। 

उन्होंने कहा कि इन पहलों में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना, एके-203 राइफल निर्माण कार्यक्रम, लड़ाकू विमान निर्माण में सहयोग, मुख्य युद्धक टैंक के निर्माण के साथ-साथ फ्रिगेट, पनडुब्बी, ब्रह्मोस और अन्य मिसाइल परियोजनाओं का निर्माण शामिल है। एलिपोव ने कहा, ‘‘रूस भारत के साथ समान और सम्मानजनक संबंध रखता है। हमारा सहयोग वैश्विक शांति, स्थिरता और सतत विकास के लिए एक निर्णायक कारक की भूमिका निभाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। हम अपनी क्षमता का उपयोग करने और दोनों मित्र देशों के लोगों के लाभ के लिए नए क्षितिज तलाशने को आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।’’

गौरतलब है कि रूस ने पिछले साल दिसंबर में मिसाइल की पहली रेजिमेंट की डिलीवरी शुरू की थी। S-400 को रूस की सबसे उन्नत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली के रूप में जाना जाता है। ‘ट्रायम्फ’ इंटरसेप्टर-आधारित यह मिसाइल प्रणाली आने वाले शत्रुतापूर्ण विमानों, मिसाइलों और यहां तक कि 400 किमी तक की दूरी पर ड्रोन को भी नष्ट कर सकती है। 

इस मिसाइल प्रणाली को पहले से ही इस तरह से तैनात किया गया है कि यह उत्तरी क्षेत्र में चीन के साथ सीमा के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पाकिस्तान के साथ सीमा को भी कवर कर सके।

दोनों देशों के बीच बढ़ रहा व्यापार

साथ ही भारत में रूसी राजदूत डेनिस एलिपोव ने दोनों देशों के बीच व्यापार पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि साल 2022 के पहले हह महीनों में रूस और भारत के बीच व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इस समयावधि में दोनों के बीच व्यापार 11 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि हम कह सकते हैं कि हमारा व्यापार और आर्थिक सहयोग बदल रहा है। इस दौरान उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार 2025 तक बढ़कर 30 अरब डॉलर के स्तर को पार कर सकता है।

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