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अमेरिका में मुद्रास्फीति एक बुरे चरम में प्रवेश के संकेत दे रही है। इससे निपटने के लिए अमेरिकी केंद्रीय बैंक ‘फेडरल रिजर्व’ के कठोर कदम उठाने के अनुमान हैं। ऐसे में वित्तीय बाजार भयभीत हैं और मंदी की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिकी सरकार ने कहा कि महंगाई दर जुलाई से अगस्त के बीच 0.1 फीसदी और वार्षिक आधार पर 8.3 फीसदी बढ़ी है। हालांकि यह जून के चार दशक के उच्चतम स्तर 9.1 प्रतिशत से कम है। खाद्य और ऊर्जा जैसी अस्थिर श्रेणियों को छोड़ दें तो अमेरिका में बुनियादी दाम भी अनुमान से कहीं अधिक तेजी से बढ़े हैं और ये जुलाई से अगस्त के बीच 0.6 फीसदी बढ़ गए। मुद्रास्फीति में वृद्धि लंबे समय तक रुकने की स्थिति में आपूर्ति शृंखला में गड़बड़ी, तेल के दामों में बढ़ोतरी को रोकने के उपाय विफल साबित हो रहे हैं। यही कारण है कि महंगाई के कारण काफी परेशानी आ रही है।
वेतन वृद्धि के चलते भी उत्पाद महंगे
अमेरिका में कुछ अन्य कारण भी हालात चिंताजनक बना रहे हैं। अमेरिकी बाजार में अब दाम नहीं बढ़ रहे क्योंकि पहले ही महंगाई आसमान छू चुकी है। उधर, दबाव के चलते कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के कारण भी कंपनियों को उनके उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। इसका असर भी महंगाई पर पड़ा है।
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