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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में हो रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन में शिरकत की और दुनिया के सामने भारत का नजरिया रखा। शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और समूह के अन्य नेता भी शामिल हुए। इस मौके पर पीएम मोदी ने कोरोना और यूक्रेन संकट के कारण पैदा हुए संकटों को दूर करने के लिए एससीओ से भरोसेमंद और लचीली आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बेहतर संपर्कऔर सदस्य देशों द्वारा पारगमन सुविधाओं का पूर्ण अधिकार दिया जाना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अहम हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक उज्बेक शहर समरकंद में आठ सदस्यीय समूह के शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के इस साल 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है और भारत एससीओ के सदस्य देशों के बीच वृहद सहयोग और परस्पर विश्वास का समर्थन करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड-19 और यूक्रेन में उपजे हालात के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधित हुई है, जिससे विश्व के समक्ष अभूतपूर्व खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा संकट पैदा हुआ।
करीब 28 महीने पहले पूर्वी लद्दाख में भारत व चीन के बीच सीमा गतिरोध की शुरुआत होने के बाद से यह पहला मौका है जब मोदी और शी इस शिखर सम्मेलन में आमने-सामने हुए। पीएम मोदी ने कहा कि भारत एससीओ सदस्यों के बीच वृहद सहयोग और परस्पर विश्वास का समर्थन करता है। महामारी और यूक्रेन संकट के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला में कई व्यवधान आए जिससे दुनिया को अभूतपूर्व ऊर्जा एवं खाद्य संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एससीओ को हमारे क्षेत्र में विश्वस्त, लचीला और विविधतापूर्ण आपूर्ति शृंखला विकसित करने के लिए प्रयत्न करने चाहिए। इसके लिए बेहतर संपर्क की आवश्यकता तो होगी ही, साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि हम सभी एक दूसरे को पारगमन का पूरा अधिकार दें।
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की
प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एससीओ के वार्षिक शिखर सम्मेलन से इतर बातचीत की। इस साल फरवरी में यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली मुलाकात रही। ऐसा समझा जाता है कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। भारत ने यूक्रेन पर आक्रमण के लिए अब तक रूस की आलोचना नहीं की है। भारत बातचीत के जरिए संकट के समाधान पर जोर दे रहा है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा, मैं यूक्रेन में संघर्ष पर आपकी स्थिति और आपकी चिंताओं के बारे में भी जानता हूं। हम चाहते हैं कि यह सब जल्द से जल्द खत्म हो। हम आपको वहां क्या हो रहा है, इसकी जानकारी देंगे। वहीं, पीएम मोदी ने कहा, आज का युग युद्ध का नहीं है और मैंने इस बारे में आपसे फोन पर बात की है। आज हमें बात करने का अवसर मिलेगा कि हम शांति के पथ पर कैसे आगे बढ़ सकते हैं। भारत-रूस कई दशकों से एक-दूसरे के साथ रहे हैं।
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