Home Breaking News Telangana: अमित शाह और केसीआर ने क्यों बोली ‘भूल’ जाने की बात, पलक झपकते ही क्यों मचेगी उथल-पुथल?

Telangana: अमित शाह और केसीआर ने क्यों बोली ‘भूल’ जाने की बात, पलक झपकते ही क्यों मचेगी उथल-पुथल?

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Telangana: अमित शाह और केसीआर ने क्यों बोली ‘भूल’ जाने की बात, पलक झपकते ही क्यों मचेगी उथल-पुथल?

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तेलंगाना में शनिवार को राजनीतिक दल, एक-दूसरे पर निशाना साधने में लगे रहे। केंद्र सरकार और भाजपा ने 17 सितंबर को 75वें ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ के तौर पर मनाया, जबकि तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने ‘तेलंगाना जतेय समिक्यता दिनोत्सवम’ यानी तेलंगाना राष्ट्रीय एकता दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया। केंद्र की तरफ से खुद गृह मंत्री अमित शाह ने समारोह में शिरकत की। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ‘केसीआर’ ने तेलंगाना राष्ट्रीय एकता दिवस पर अपनी बात रखी। दोनों नेताओं ने एक दूसरे पर तंज कसा। अमित शाह ने कहा, सत्ता में आकर इन उद्देश्यों को जो लोग भूल जाते हैं, जनता भी उन्हें भूल जाती है। समारोह के थोड़ी देर बाद केसीआर ने भी बयान जारी कर दिया। उन्होंने कहा, एक खतरा है कि पलक झपकते ही भूल जाने पर समाज को उथल-पुथल में डाल दिया जाएगा। उनका इशारा भाजपा की तरफ था।

मजबूत राजनीतिक पारी खेलने की तैयारी में भाजपा

भाजपा इस बार तेलंगाना में मजबूत राजनीतिक पारी खेलने की योजना बना रही है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भले ही भाजपा के खाते में एक सीट आई थी, मगर उसे 6.98 फीसदी वोट मिले थे। भाजपा ने इस छोटी सी बढ़त को 2019 के लोकसभा चुनाव में बड़ा कर दिखाया। उसे चार लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई। तेलंगाना राष्ट्रवादी समिति को नौ और कांग्रेस पार्टी के खाते में तीन लोकसभा सीटें आईं थीं। यहीं से भाजपा को इशारा मिल गया कि वह 2023 के विधानसभा चुनाव में बड़ा उल्टफेर कर सकती है। अपनी इसी रणनीति के चलते भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने तेलंगाना में अपने दौरे बढ़ा दिए। इतना ही नहीं, कुछ माह पहले पार्टी ने अपनी दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी हैदराबाद में आयोजित की थी। शाह ने एक रैली में कहा था, अब भाजपा को तेलंगाना में मौका मिलेगा। अगली सरकार भाजपा की होगी। तेलंगाना में हिंदुओं की लगभग 82 फीसदी आबादी को साधने के मकसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हैदराबाद को ‘भाग्यनगर’ कह कर पुकारा था।

‘वे हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाने से डरते रहे’

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद मुक्ति दिवस पर कहा, 15 अगस्त, 1947 के दिन पूरा देश आजादी का उत्सव मना रहा था, लेकिन तब हैदराबाद को आजादी नसीब नहीं हुई थी। 13 महीनों तक निजाम के अन्यायों और अत्याचारों को ये क्षेत्र सहन करता रहा। उसके बाद जब सरदार पटेल ने पुलिस एक्शन लिया, तब तेलंगाना स्वतंत्र हुआ था। इस आजादी के लिए कोमाराम भीम, रामजी गोंड, स्वामी रामानंद तीर्थ, एम चिन्नारेड्डी, नरसिम्हा राव, शाइक बंदगी, के वी नरसिम्हा राव, विद्याधर गुरु और पंडित केशवराव कोरटकर जैसे अनगिनत लोगों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया था। वर्षों से इस क्षेत्र के लोगों की मांग थी कि हैदराबाद मुक्ति दिवस को सरकारी तौर पर मनाया जाए, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि 75 सालों में भी जिन्होंने यहां शासन किया, उन्होंने वोट बैंक की राजनीति की। इसी वजह से वे लोग हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाने का साहस नहीं कर सके। यह दिवस मनाने का उद्देश्य इस मुक्ति संग्राम के इतिहास और जाने-अनजाने शहीदों की गाथाओं को युवा पीढ़ी के मन में पुनर्जीवित कर उनके मन में देशभक्ति की लौ जगाना है।

शाह ने ऐसा क्यों कहा, तो जनता भी उन्हें भूल जाती है

अमित शाह ने कहा, इस महान तेलंगाना राज्य की रचना जिस उद्देश्य से हुई है, सत्ता प्राप्ति करने वाले लोगों ने उन उद्देश्यों को भुला दिया। याद रहे कि जो लोग उन उद्देश्यों को भूल गए हैं, जनता भी उन्हें भूल जाती है। शाह का इशारा, मुख्यमंत्री केसीआर की ओर था। आज पीएम मोदी ने हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाने की जो परंपरा शुरू की है, उसे हैदराबाद को स्वतंत्र करने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के सम्मान में इससे भी ज्यादा जोर शोर से अनेक सालों तक मनाया जाएगा। शाह ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश को सुरक्षित और विकसित किया है, भारतीय और भारतीयता को उच्चतम शिखर पर बिठाने के लिए वे आगे बढ़ रहे हैं, देश के सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, वो उपक्रम निश्चित रूप से जारी रहेगा। इसी कड़ी में हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाना, भी निश्चित रूप से जारी रहेगा।

धार्मिक कट्टरता बढ़ी तो राष्ट्र के जीवन को नष्ट कर देगी

मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने कहा, हमारी सरकार ने तीन सितंबर को यह घोषणा कर दी थी कि 17 सितंबर को तेलंगाना राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना में सांप्रदायिक ताकतें समाज को बांटने और लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश कर रही हैं। तेलंगाना राष्ट्रीय एकता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद राव ने कहा, अगर धार्मिक कट्टरता बढ़ती है, तो वह समूचे राष्ट्र के जीवन को नष्ट कर देगी। आज देश में धार्मिक कट्टरता अपने चरम पर है। कुछ लोग अपनी जहरीली टिप्पणियों से लोगों में नफरत फैला रहे हैं। तेलंगाना को उन ताकतों के कपटपूर्ण प्रयासों को विफल करना होगा, जो देश के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, ये एक खतरा है कि पलक झपकते ही भूल जाने पर भी समाज को उथल-पुथल में डाल दिया जाएगा। शुक्रवार को केसीआर और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला के बीच मुलाकात हुई थी। राष्ट्रीय राजनीति में इस बैठक का बड़ा मायने निकाले जा रहे हैं। हाल ही में केसीआर ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार के साथ भी बैठक की थी।
 

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तेलंगाना में शनिवार को राजनीतिक दल, एक-दूसरे पर निशाना साधने में लगे रहे। केंद्र सरकार और भाजपा ने 17 सितंबर को 75वें ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ के तौर पर मनाया, जबकि तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने ‘तेलंगाना जतेय समिक्यता दिनोत्सवम’ यानी तेलंगाना राष्ट्रीय एकता दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया। केंद्र की तरफ से खुद गृह मंत्री अमित शाह ने समारोह में शिरकत की। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ‘केसीआर’ ने तेलंगाना राष्ट्रीय एकता दिवस पर अपनी बात रखी। दोनों नेताओं ने एक दूसरे पर तंज कसा। अमित शाह ने कहा, सत्ता में आकर इन उद्देश्यों को जो लोग भूल जाते हैं, जनता भी उन्हें भूल जाती है। समारोह के थोड़ी देर बाद केसीआर ने भी बयान जारी कर दिया। उन्होंने कहा, एक खतरा है कि पलक झपकते ही भूल जाने पर समाज को उथल-पुथल में डाल दिया जाएगा। उनका इशारा भाजपा की तरफ था।

मजबूत राजनीतिक पारी खेलने की तैयारी में भाजपा

भाजपा इस बार तेलंगाना में मजबूत राजनीतिक पारी खेलने की योजना बना रही है। 2018 के विधानसभा चुनाव में भले ही भाजपा के खाते में एक सीट आई थी, मगर उसे 6.98 फीसदी वोट मिले थे। भाजपा ने इस छोटी सी बढ़त को 2019 के लोकसभा चुनाव में बड़ा कर दिखाया। उसे चार लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई। तेलंगाना राष्ट्रवादी समिति को नौ और कांग्रेस पार्टी के खाते में तीन लोकसभा सीटें आईं थीं। यहीं से भाजपा को इशारा मिल गया कि वह 2023 के विधानसभा चुनाव में बड़ा उल्टफेर कर सकती है। अपनी इसी रणनीति के चलते भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने तेलंगाना में अपने दौरे बढ़ा दिए। इतना ही नहीं, कुछ माह पहले पार्टी ने अपनी दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी हैदराबाद में आयोजित की थी। शाह ने एक रैली में कहा था, अब भाजपा को तेलंगाना में मौका मिलेगा। अगली सरकार भाजपा की होगी। तेलंगाना में हिंदुओं की लगभग 82 फीसदी आबादी को साधने के मकसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में हैदराबाद को ‘भाग्यनगर’ कह कर पुकारा था।

‘वे हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाने से डरते रहे’

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद मुक्ति दिवस पर कहा, 15 अगस्त, 1947 के दिन पूरा देश आजादी का उत्सव मना रहा था, लेकिन तब हैदराबाद को आजादी नसीब नहीं हुई थी। 13 महीनों तक निजाम के अन्यायों और अत्याचारों को ये क्षेत्र सहन करता रहा। उसके बाद जब सरदार पटेल ने पुलिस एक्शन लिया, तब तेलंगाना स्वतंत्र हुआ था। इस आजादी के लिए कोमाराम भीम, रामजी गोंड, स्वामी रामानंद तीर्थ, एम चिन्नारेड्डी, नरसिम्हा राव, शाइक बंदगी, के वी नरसिम्हा राव, विद्याधर गुरु और पंडित केशवराव कोरटकर जैसे अनगिनत लोगों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर किया था। वर्षों से इस क्षेत्र के लोगों की मांग थी कि हैदराबाद मुक्ति दिवस को सरकारी तौर पर मनाया जाए, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि 75 सालों में भी जिन्होंने यहां शासन किया, उन्होंने वोट बैंक की राजनीति की। इसी वजह से वे लोग हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाने का साहस नहीं कर सके। यह दिवस मनाने का उद्देश्य इस मुक्ति संग्राम के इतिहास और जाने-अनजाने शहीदों की गाथाओं को युवा पीढ़ी के मन में पुनर्जीवित कर उनके मन में देशभक्ति की लौ जगाना है।

शाह ने ऐसा क्यों कहा, तो जनता भी उन्हें भूल जाती है

अमित शाह ने कहा, इस महान तेलंगाना राज्य की रचना जिस उद्देश्य से हुई है, सत्ता प्राप्ति करने वाले लोगों ने उन उद्देश्यों को भुला दिया। याद रहे कि जो लोग उन उद्देश्यों को भूल गए हैं, जनता भी उन्हें भूल जाती है। शाह का इशारा, मुख्यमंत्री केसीआर की ओर था। आज पीएम मोदी ने हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाने की जो परंपरा शुरू की है, उसे हैदराबाद को स्वतंत्र करने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के सम्मान में इससे भी ज्यादा जोर शोर से अनेक सालों तक मनाया जाएगा। शाह ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश को सुरक्षित और विकसित किया है, भारतीय और भारतीयता को उच्चतम शिखर पर बिठाने के लिए वे आगे बढ़ रहे हैं, देश के सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, वो उपक्रम निश्चित रूप से जारी रहेगा। इसी कड़ी में हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाना, भी निश्चित रूप से जारी रहेगा।

धार्मिक कट्टरता बढ़ी तो राष्ट्र के जीवन को नष्ट कर देगी

मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने कहा, हमारी सरकार ने तीन सितंबर को यह घोषणा कर दी थी कि 17 सितंबर को तेलंगाना राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना में सांप्रदायिक ताकतें समाज को बांटने और लोगों में नफरत फैलाने की कोशिश कर रही हैं। तेलंगाना राष्ट्रीय एकता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद राव ने कहा, अगर धार्मिक कट्टरता बढ़ती है, तो वह समूचे राष्ट्र के जीवन को नष्ट कर देगी। आज देश में धार्मिक कट्टरता अपने चरम पर है। कुछ लोग अपनी जहरीली टिप्पणियों से लोगों में नफरत फैला रहे हैं। तेलंगाना को उन ताकतों के कपटपूर्ण प्रयासों को विफल करना होगा, जो देश के सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, ये एक खतरा है कि पलक झपकते ही भूल जाने पर भी समाज को उथल-पुथल में डाल दिया जाएगा। शुक्रवार को केसीआर और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला के बीच मुलाकात हुई थी। राष्ट्रीय राजनीति में इस बैठक का बड़ा मायने निकाले जा रहे हैं। हाल ही में केसीआर ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार के साथ भी बैठक की थी।

 

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