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आईआरसीटीसी घोटाले में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को मिली जमानत रद्द करने की सीबीआई की मांग के दो दिन बाद राजद नेता ने सोमवार को दोहराया कि सभी केंद्रीय जांच एजेंसियां- सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग उनके आवास पर कार्यालय खोल सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा पूरी विश्वसनीयता खो चुकी है और अब उन्हें घेरने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करने की कोशिश कर रही है क्योंकि पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव हारने का डर है।
मेरे घर पर अपने कार्यालय खोल सकती हैं तीनों एजेंसियां
तेजस्वी ने कहा, मैंने पहले भी केंद्रीय जांच एजेंसियों को यह प्रस्ताव दिया था। मैं उन्हें (सीबीआई, ईडी और आईटी) फिर से कह रहा हूं कि वे मेरे घर पर अपने कार्यालय खोल सकते हैं यह उनके (अधिकारियों) के लिए सुविधाजनक होगा। मैंने हमेशा सहयोग किया है। तेजस्वी को दी गई जमानत को रद्द करने की मांग को लेकर दिल्ली की एक अदालत में गई सीबीआई को लेकर पत्रकारों के सवालों के जवाब में यादव ने यह चुटकी ली। यह घोटाला इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) के दो होटलों का परिचालन ठेका एक निजी फर्म को देने में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
सीबीआई के अनुसार, राजद नेता ने अगस्त में पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथित तौर पर अपने अधिकारियों को धमकाया था। 2018 में यादव को दी गई जमानत को रद्द करने की मांग करते हुए दिल्ली की एक अदालत के समक्ष अपनी याचिका में सीबीआई ने कहा था कि डिप्टी सीएम ने जांच अधिकारियों को धमकी दी थी और मामले को प्रभावित किया।
तेजस्वी ने कहा कि भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव से डरी हुई है। मेरी जमानत रद्द करने के सीबीआई के कदम के पीछे डर के अलावा कुछ नहीं है। लोग 2024 में भाजपा को खारिज कर देंगे क्योंकि वह पिछले चुनावों से पहले किए गए सभी वादों को पूरा करने में विफल रही है। बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने से राष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ेगा। भाजपा नेताओं ने मतदाताओं की विश्वसनीयता और विश्वास खो दिया है।
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