[ad_1]
ख़बर सुनें
विस्तार
केंद्र सरकार में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के उतने अधिकारियों को भी तैनाती नहीं मिल पा रही है, जितने आने के लिए उपलब्ध हैं। यही नहीं, पिछले कई वर्षों से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व कोटे का एक तिहाई भी उपयोग नहीं हो रहा है। इससे आईएएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनाती के अवसर घटते जा रहे हैं।
दरअसल, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आईएएस अधिकारियों की तैनाती के लिए प्रत्येक राज्य का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व (सीडीआर) कोटा तय है। यह राज्य में सीनियर ड्यूटी पोस्ट के लिए उपलब्ध पदों का 40 प्रतिशत तक होता है। लेकिन, आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में इस कोटे के एक तिहाई संख्या में भी आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का अवसर नहीं पा रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2017 में सीडीआर के 35 प्रतिशत व 2018 में 36 फीसदी अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आए थे। इसके बाद के वर्षों में यह दायरा 30 फीसदी पर सिमट गया। इसी तरह केंद्र में तैनाती के लिए पैनल में शामिल होने के बाद अधिकारी केंद्र को नियुक्ति के लिए अपनी उपलब्धता की जानकारी देते हैं। इसके बाद केंद्र उन्हें तैनाती देने की कार्यवाही करता है। आंकड़े बताते हैं कि उपलब्धता बताने वाले तमाम अफसर तैनाती का इंतजार ही करते रह जा रहे हैं। आईएएस अफसरों की केंद्र में तैनाती घटने के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं।
सीडीआर उपयोग का प्रतिशत
2017 35%
2018 36%
2019 30%
2020 30%
2021 30%
स्रोत-डीओपीटी
प्रतिनियुक्ति में उपलब्धता व तैनाती की स्थिति
| वर्ष | उपलब्धता | नियुक्त | इंतजार में |
| 2017 | 99 | 85 | 14 |
| 2018 | 101 | 71 | 30 |
| 2019 | 127 | 101 | 26 |
| 2020 | 112 | 69 | 43 |
| 2021 | 124 | 71 | 53 |
| कुल | 563 | 397 | 166 |
आंकड़े बताते हैं कि केंद्र को नियुक्ति के लिए अपनी उपलब्धता बताने वाले तमाम अफसर तैनाती का इंतजार ही करते रह जा रहे हैं
समय से पहले मूल कैडर में वापसी भी
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने वाले तमाम अधिकारी प्रतिनियुक्ति का अपना समय भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इसके पीछे मूल संवर्ग में पदोन्नति का लाभ प्राप्त करने, व्यक्तिगत कारण व प्रशासनिक कारण आदि बताए जाते हैं। केंद्र से तालमेल न बिठा पाने की वजह से तैनाती अवधि पूरा करने से पहले ही मूल कैडर में वापसी भी एक अहम कारण माना जा रहा है।
- केंद्र ने यूपी कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रेणुका कुमार व पार्थसारथी सेन शर्मा को हाल में ही समय से पहले राज्य को वापस भेज दिया।
समय से पहले वापस हुए अफसर
वर्ष संख्या
2017 43
2018 25
2019 37
2020 14
2021 28
तैनाती घटने की मुख्य वजह
केंद्र में संयुक्त सचिव से सचिव तक के पदों पर आईएएस संवर्ग की मोनोपली चला करती थी। केंद्र ने दूसरे संवर्ग के अफसरों की संख्या बढ़ाकर निर्णय प्रक्रिया में विविधता लाने का प्रयास किया है।
- केंद्र ने क्षेत्र या कार्य विशेष में विशेष ज्ञान व विशेषज्ञता रखने वाले लोगों को लेटरल एंट्री के जरिए निदेशक, उप सचिव व संयुक्त सचिव जैसे पदों पर नियुक्ति की कार्यवाही शुरू की है। पिछले चार वर्षों में लेटरल एंट्री के जरिए 37 लोगों की नियुक्ति हो चुकी है।
- केंद्र में प्रतिनियुक्ति के लिए पैनल बनाने की कार्यवाही 360 डिग्री के जरिए हो रही है। इसमें पूर्व तैनाती अवधि में कार्यशैली व छवि का सख्ती से मूल्यांकन होता है।
- जिनको लगता है कि वे केंद्र में सचिव स्तर तक नहीं पहुंच सकते उनमें कई उप सचिव या संयुक्त सचिव स्तर पर केंद्र में जाने में रुचि नहीं दिखाते।
- राज्य स्तर पर अफसरों के निर्णय लेने में ज्यादा आजादी और कम नियंत्रण होने से भी कई अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं आना चाहते। केंद्र में तनिक भी मनमानी पर बेझिझक मूल कैडर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
[ad_2]
Source link