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संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 77वें सत्र में भाग लेने पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को भी यूएनजीए के उच्च-स्तरीय सत्र के इतर दुनिया भर के शीर्ष नेताओं के साथ बैठकों का दौर जारी रखा और आतंकवाद-रोधी सहयोग से लेकर कोविड-19 तक के मुद्दों पर चर्चा की। जयशंकर ने मंगलवार को घाना के राष्ट्रपति नाना अकुफो एडो से मुलाकात की। मुलाकात के बाद जयशंकर ने ट्वीट कर कहा कि घाना के राष्ट्रपति से मिल कर प्रसन्नता हुई, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दोनों देशों के बीच चल रहे सहयोग पर चर्चा की, विशेष रूप से आतंकवाद का मुकाबला करने पर। उन्होंने हमारी विकास साझेदारी की उपलब्धियों की सराहना की।
इसके अलावा जयशंकर ने कोमोरोस के राष्ट्रपति अजाली अस्सुमानी के साथ भी बैठक की। बैठक में जयशंकर ने कोविड-19 और डेंगू से निपटने में भारत के प्रयासों की प्रशंसा करने के लिए उनका आभार जताया। जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘हमारी विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा पर एकसाथ काम करने पर चर्चा की।’’ निकारागुआ के विदेश मंत्री डेनिस मोनकाडा के साथ अपनी बैठक के बाद जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘वैश्विक स्थिति और इसके बहुपक्षीय निहितार्थों पर चर्चा की।’’
इससे पहले जयशंकर ने भारत, यूएई व फ्रांस के बीच त्रिपक्षीय मंत्रिस्तरीय बैठक की। बैठक में तीनों देशों के बीच आर्थिक संबंध बेहतर करने के साथ कई मुद्दों पर सहमति बनाई गई। महासभा से इतर इस पहली बैठक में रणनीतिक भागीदारों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सदस्यों के बीच विचारों के सक्रिय आदान-प्रदान पर ध्यान देने के समकालीन तरीके पर भी चर्चा हुई।
जयशंकर के साथ यूएई की मेजबानी में हुई इस बैठक में वहां के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल-नाहयान और यूरोप व विदेश मामलों के लिए फ्रांसीसी मंत्री कैथरीन कोलोना ने भी हिस्सा लिया। जयशंकर ने व्यस्त कूटनीतिक सप्ताह की शुरुआत महासभा सत्र से इतर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों के साथ की। यह भारत, यूएई व फ्रांस की पहली मंत्रिस्तरीय ‘त्रिपक्षीय’ बैठक थी, जिसमें तीनों अलग-अलग देश होते हुए भी एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं। जयशंकर ने क्वाड और आई2यू2 की नजीर देते हुए कहा कि तीनों देश एक-दूसरे से काफी सहज हैं और कई क्षेत्रों में समन्वित ढंग से काम कर सकते हैं। यूएई के मंत्री से द्विपक्षीय बैठक के बाद जयशंकर ने ट्वीट किया, हमने साझेदारी की निरंतर प्रगति की समीक्षा की और सराहना की।
मिस्र और इथियोपियाई प्रतिनिधियों से भी की चर्चा
जयशंकर ने मिस्र के विदेश मंत्री समेह शौकी से भी मुलाकात कर द्विपक्षीय रिश्तों पर बात की। इथियोपिया के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री डेमेके मेकोनेन हसन के साथ अपनी बैठक में जयशंकर ने अफ्रीकी देश में ताजा घटनाओं पर उनकी टिप्पणियों की सराहना की। उन्होंने शिक्षा और व्यापार में अधिक सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने यूक्रेन व ऊर्जा सुरक्षा पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
यूएनजीए अध्यक्ष संग बैठक में बहुपक्षवाद के लिए प्रतिबद्धता
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र के अध्यक्ष साबा कोरोसी के साथ बैठक में बहुपक्षवाद के प्रति भारत की गहरी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने वैश्विक प्रगति के लिए सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के एजेंडे की जरूरत पर भी चर्चा की। विदेश मंत्री ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में भारत के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, भारत का मानना है कि वैश्विक एजेंडे में विश्व बिरादरी की वास्तविक जरूरतों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। मौजूदा समय में ये जरूरतें ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, कर्ज तथा उर्वरक-स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के रूप में दिखाई दे रही हैं।
अल्बानिया से द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती पर जोर
भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने अल्बानिया की विदेश मंत्री ओल्टा जहाका के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। जयशंकर ने ओल्टा जहाका के साथ मुलाकात की तस्वीरें भी ट्वीट की और कहा कि हमने सुरक्षा परिषद में हमारे करीबी सहयोग को महत्व दिया है। इसके अलावा अल्बालिया से द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई।
जी-20 और म्यांमार की स्थिति पर चर्चा
विदेश मंत्री ने इंडोनेशिया के विदेश मंत्री रेटनो मार्सुडी से जी-20 समूह के अलावा म्यांमार की स्थिति पर भी बातचीत की। इंडोनेशिया अभी जी-20 का अध्यक्ष है और उसके बाद भारत समूह की अध्यक्षता करेगा। भारत एक दिसंबर 2022 से 20 नवंबर 2023 तक एक वर्ष के लिए समूह की अध्यक्षता करेगा। इस बैठक में दोनों पक्षों ने जी20, उससे जुड़ी चुनौतियों और आगे की रणनीति पर विचार साझा किए। दोनों ने म्यांमार गतिरोध पर चर्चा भी की।
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