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Niira Radia Tapes: क्या था नीरा राडिया टेप कांड, जिसमें नेता से लेकर पत्रकारों तक के आए नाम? जानें अब क्या हुआ

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Niira Radia Tapes: क्या था नीरा राडिया टेप कांड, जिसमें नेता से लेकर पत्रकारों तक के आए नाम? जानें अब क्या हुआ

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नीरा राडिया टेप केस यूपीए-II सरकार के दौरान बेहद चर्चित मामलों में एक था। इस मामले में सीबीआई ने कहा है कि इसमें कोई भी आपराधिकता नहीं पाई गई है। सीबीआई ने ये जानकारी सुप्रीम कोर्ट दी है। नीरा राडिया टेप में हुई बातचीत की सीबीआई ने करीब 13 साल तक जांच की।   

आखिर नीरा राडिया हैं कौन? उनसे जुड़ा टेप कांड क्या था? इस टेप कांड में कितने लोगों के नाम सामने आए? मामले में जांच एजेंसियों ने क्या-क्या कदम उठाए? और आखिर सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने आपराधिकता न मिलने को लेकर क्या कहा? आइये जानते हैं…

 
नीरा राडिया का जन्म 1959 में केन्या में बसे एक पंजाबी परिवार में हुआ था। नीरा के पढ़ाई के दौरान ही उनका परिवार ब्रिटेन चला गया, जहां उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। 1981 में 22 साल की उम्र में ही नीरा की शादी जनक राडिया से हुई। यहां से शुरू हुआ नीरा राडिया का आंत्रप्रेन्योर के तौर पर सफर। नीरा ने पहले पति के साथ ट्रैवल एजेंसी का काम संभाला। बाद में उन्होंने खुद को उड्डयन क्षेत्र के एक एक्सपर्ट के तौर पर पेश करना शुरू किया। बताया जाता है कि उदारीकरण के बाद नीरा राडिया ने भारत में एंट्री ली और उड्डयन क्षेत्र में सस्ती सेवाएं मुहैया कराने वाली एयरलाइंस के साथ काम शुरू किया। 1994 में सहारा एयरलाइंस से विमानों की डील पर बातचीत के लिए राडिया भारत आईं और बाद में उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए राजनीति से लेकर व्यापार जगत तक में जबरदस्त पैठ स्थापित की। 
क्या है नीरा राडिया टेपकांड?
नवंबर 2010 में ओपन मैगजीन (Open Magazine) ने कवर स्टोरी प्रकाशित की थी। इसे नाम दिया था- द एक्स टेप (The X-Tapes)। मैगजीन ने इसमें नीरा राडिया से जुड़े कुछ ऑडियो टेप में हुई बातचीत के अंश प्रकाशित किए थे। इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक जगत में भूचाल आ गया। दो दिन बाद ही एक और पत्रिका आउटलुक ने भी कुछ ऑडियो फाइल्स और नीरा राडिया की अहम लोगों से हुई बातचीत छापी। इसमें डीएमके के ए. राजा, कनिमोझी से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य तक से हुई बातचीत के कुछ अंश शामिल थे। इन ऑडियो टेप में राडिया और कुछ पत्रकारों के बीच हुई बातचीत भी शामिल थी। जिन पत्रकारों के नाम तब टेपकांड में सामने आए थे, उनमें बरखा दत्त, शंकर अय्यर, शालिनी सिंह, जहांगीर पोचा और वीर सांघवी शामिल थे। राडिया के नेताओं, व्यापारियों और पत्रकारों से हुई इसी बातचीत को राडिया टेप्स (Radia Tapes) नाम दिया गया। 
किसने की राडिया की फोन टैपिंग, क्या थी वजह?
बताया जाता है कि नीरा राडिया के फोन की टैपिंग 2007 से 2009 के बीच की गई थी। इस टैपिंग को इनकम टैक्स विभाग की तरफ से किया गया था। इसमें नीरा की नेताओं, टॉप बिजनेसमैन और पत्रकारों से बातचीत शामिल थी। हालांकि, आज तक यह साफ नहीं हुआ है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को इस टैपिंग के लिए निर्देश किससे मिले। इन टेप्स को प्रकाशित करने वाली मैगजीन के कुछ पत्रकारों का दावा था कि आईटी विभाग ने टैपिंग का कदम गृह मंत्रालय के कहने पर उठाया, जबकि एक और धड़े ने बाद में इसके पीछे वित्त मंत्रालय के निर्देशों को वजह बताया। 
1. अनंत कुमार
बताया जाता है कि नीरा राडिया के संपर्क न सिर्फ भाजपा के नेताओं से, बल्कि कांग्रेस और अन्य पार्टियों के बड़े नेताओं से भी रहे। भारत के उड्डयन क्षेत्र में उनका प्रभाव बढ़ने की वजह भाजपा नेता अनंत कुमार को माना जाता है, जो अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में एक समय उड्डयन मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे थे। दिवंगत पत्रकार गौरी लंकेश ने 2003 में अपनी पत्रिका ‘लंकेश पत्रिके’ में नीरा राडिया और कर्नाटक से भाजपा नेता अनंत कुमार के कथित संपर्कों का खुलासा भी किया था। 

2. ए. राजा
नीरा राडिया के टेप्स बाहर आने के बाद जिस नेता से उनकी बातचीत की सबसे ज्यादा चर्चा थी, वह थे डीएमके के नेता ए. राजा। आरोप थे कि राडिया ने 2009 के आम चुनाव के बाद ए. राजा को टेलिकॉम मंत्री बनाने और डीएमके-कांग्रेस का गठबंधन तय करवाने के लिए लॉबिंग की। हालांकि, ए. राजा से उनके संपर्कों की जांच का आधार था 2G स्पेक्ट्रम केस, जिसे लेकर सीबीआई और ईडी ने राडिया की भूमिका की जांच की। राडिया के जो टेप्स सामने आए थे, उनमें उनकी और ए. राजा के बीच यूपीए-II सरकार के मंत्रिमंडल गठन और डीएमके की सीटों को लेकर बातचीत शामिल थी। इसी मामले में इनकम टैक्स विभाग ने राडिया और कनिमोझी की बातचीत की भी रिकॉर्डिंग की। 

3. रंजन भट्टाचार्य
अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य और नीरा राडिया के बीच जो बातचीत हुई, वह भी राजा को यूपीए-II में जगह दिलाने से ही जुड़ी थी। टेप्स में नीरा राडिया और भट्टाचार्य के बीच गुलाम नबी आजाद, सुनील, मुकेश और कनी (कनिमोझी) को लेकर चर्चा की बात सामने आई थी। 
किन-किन उद्योगपतियों से था राडिया की कंपनी का कनेक्शन?
नीरा राडिया ने शुरुआती दिनों में अपने पीआर कंपनी वैष्णवी कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस शुरू की थी। उनके पीआर कौशल से प्रभावित होकर रतन टाटा ने उन्हें टाटा ग्रुप की कंपनियों के जनसंपर्क को संभालने की जिम्मेदारी दे दी। राडिया की कंपनी ने बाद में नोएसिस स्ट्रैटजिक कंसल्टिंग सर्विसेज नाम की एक और कंपनी का अधिग्रहण किया और उनके क्लाइंट्स में टाटा के अलावा वेदांता रिसोर्सेज और ओमान सरकार का नाम भी जुड़ा। इसके अलावा राडिया ने यूनिटेक ग्रुप, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (CII), हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी और जीएमआर ग्रुप (GMR Group) के पीआर का काम संभाला।  2008 में मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के पब्लिक रिलेशन और लॉबिंग का काम राडिया को दिया। 
मामले में जांच एजेंसियों ने क्या-क्या कदम उठाए?
इन टेप्स की जांच के बाद ही 2009 में ए. राजा पर 2जी केस में इस्तीफा देने का दबाव बना। भारत की सीएजी ने तब जांच के बाद अनुमान लगाया था कि 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की वजह से सरकार को 1.76 लाख करोड़ का नुकसान हुआ, क्योंकि कई स्पेक्ट्रम अयोग्य कंपनियों को दे दिए गए। 

इन टेप्स के सामने आने के बाद नीरा राडिया सिर्फ सीबीआई और ईडी की जांच के दायरे में ही नहीं आईं, बल्कि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) ने 2013 में राडिया की जनसंचार कंपनी वैष्णवी कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ कंपनीज एक्ट, 2013 के तहत मामला दर्ज किया और कंपनी के 11 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव दिया। इतना ही नहीं नीरा राडिया का नाम पनामा पेपर्स में भी आया था। अक्तूबर 2021 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने यस बैंक से जुड़े 300 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी केस में नीरा राडिया से पूछताछ की।
कोर्ट में अब तक क्या हुआ?
16 नवंबर 2009: नीरा राडिया पर जानकारी के लिए सीबीआई ने आयकर विभाग निदेशालय से संपर्क किया। 

20 नवंबर 2009: आईटी विभाग की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, टेलिकॉम विभाग के नीति निर्माण में कॉरपोरेट दखल होने की बात सामने आई। 

15 नवंबर 2010: वकील प्रशांत भूषण के सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और टेप की बातचीत को सार्वजनिक करने की मांग की।

18 नवंबर 2010:  ए. राजा और नीरा राडिया की बातचीत को मीडिया ने सार्वजनिक किया। 

29 नवंबर 2010: रतन टाटा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर नीरा राडिया टेप्स में अपनी बातचीत की रिलीज रोकने की मांग की। 
24 जनवरी 2011: नीरा राडिया टेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। 

19 अक्तूबर 2013: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को टेपकांड से जुड़े 14 मुद्दों की जांच करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि राडिया की बातचीत निजी कंपनियों में अंदरूनी गड़बड़ियों का खुलासा करती है। 

22 मई 2015: सीबीआई ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए नीरा राडिया को छोड़ा। 

6 जनवरी 2018: दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्रकार वीर सांघवी की ओर से दायर मानहानि के केस को मंजूर किया। 

21 सितंबर 2022: सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसे राडिया टेप में हुई बातचीत में किसी तरह की आपराधिकता का पता नहीं चला।

विस्तार

नीरा राडिया टेप केस यूपीए-II सरकार के दौरान बेहद चर्चित मामलों में एक था। इस मामले में सीबीआई ने कहा है कि इसमें कोई भी आपराधिकता नहीं पाई गई है। सीबीआई ने ये जानकारी सुप्रीम कोर्ट दी है। नीरा राडिया टेप में हुई बातचीत की सीबीआई ने करीब 13 साल तक जांच की।   

आखिर नीरा राडिया हैं कौन? उनसे जुड़ा टेप कांड क्या था? इस टेप कांड में कितने लोगों के नाम सामने आए? मामले में जांच एजेंसियों ने क्या-क्या कदम उठाए? और आखिर सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई ने आपराधिकता न मिलने को लेकर क्या कहा? आइये जानते हैं…

 

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