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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
– फोटो : File Photo
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60 वर्ष की आयु पूरी करते ही चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों को सेवानिवृत्त करने के सिंगल बेंच के आदेश पर लगी रोक को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हटा लिया है। 60 की उम्र के बाद भी सेवा देने की आस लगाए बैठे पीयू के प्रोफेसरों के लिए यह बड़ा झटका है। उधर, हाईकोर्ट का आदेश मिलते ही विवि ने गुरुवार शाम 60 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके 58 प्रोफेसरों को सेवामुक्त (रिलीव) करने का आदेश जारी कर दिया।
पीयू के प्रोफेसरों ने सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग की थी। प्रोफेसरों की इस मांग को मानने से पंजाब और केंद्र सरकार ने इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ पीयू के 50 से अधिक प्रोफेसर हाईकोर्ट पहुंचे और सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल की थी। सिंगल बेंच ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था और 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके प्रोफेसरों को तत्काल सेवानिवृत्त करने का आदेश दिया था। सिंगल बेंच के फैसले को शिक्षकों ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दे दी थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन प्रोफेसरों को पुन: रोजगार व्यवस्था के जरिए सेवा में लेने और वेतन जारी करने का आदेश दिया था।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ की ओर से लगाई गई रोक के कारण 61 प्रोफेसर ऐसे हैं जो 65 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी सेवा दे रहे हैं। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अब अपने ही रोक को हटाते हुए कहा कि अब रोक को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि हाईकोर्ट ने उन शिक्षकों से किसी प्रकार की रिकवरी नहीं करने का आदेश दिया है, जो 60 वर्ष के बाद भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हाईकोर्ट अब इस मामले में अपील पर जनवरी 2023 में सुनवाई होगी।
शिक्षकों की भारी कमी, गेस्ट फैकल्टी और जेआरआफ स्कॉलर्स के सहारे कई विभाग
पंजाब यूनिवर्सिटी में पहले ही शिक्षकों की भारी कमी है। 58 शिक्षकों को सेवामुक्त करने के बाद पीयू के पास नियमित शिक्षक लगभग 580 के करीब ही रह गए हैं। आगामी दिनों में पीयू में नैक का दौरा होना है। ऐसे में शिक्षकों की कमी का खामियाजा पीयू प्रशासन को टीम के समक्ष भी झेलना होगा। पीयू के आर्ट्स और लैंग्वेज के विभिन्न संकायों में नाममात्र के नियमित शिक्षक बचे हैं, विभाग गेस्ट फैकल्टी और जेआरआफ स्कॉलर्स के सहारे चलाए जा रहे हैं। पीयू शिक्षक वर्ग का कहना है कि पंजाब यूनिवर्सिटी को 60 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके प्रोफेसरों की री-इंप्लायमेंट होनी चाहिए जिससे शिक्षकों की कमी से बचा जा सके। इससे पीयू की अकादमिक व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी। अगर ऐसा नहीं करना है तो जल्द ही नियमित शिक्षकों की भर्ती करवाई जाए।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार संबंधित शिक्षकों को सेवामुक्त करने के आदेश वीरवार शाम को जारी कर दिए गए हैं। – प्रो वाईपी वर्मा, रजिस्ट्रार, पंजाब विवि
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