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Russia Ukraine War: यूक्रेन के 15% इलाके पर रूसी कब्जा, अमेरिका-यूरोप आगबबूला, रूस के कदम पर भारत का क्या रुख?

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Russia Ukraine War: यूक्रेन के 15% इलाके पर रूसी कब्जा, अमेरिका-यूरोप आगबबूला, रूस के कदम पर भारत का क्या रुख?

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Russia Ukraine Crisis

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– फोटो : Amar Ujala

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के चार इलाकों को रूस में मिलाने का एलान कर दिया है। इन इलाकों में रूस ने जनमत संग्रह कराया था। इस बीच पश्चिमी देश उन पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों को धता बताने का आरोप लगा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस उसका हिस्सा बने इन नए इलाकों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा। 

 कौन से इलाकों में रूस ने जनमत संग्रह कराया था? जनमत संग्रह के नतीजे क्या रहे? जनमत संग्रह  और उसके नतीजों पर यूक्रेन और अन्य रूस विरोधी देश क्या कह रहे हैं? रूस के इस कदम पर भारत का क्या रुख है? आइये जानते हैं…

कौन से इलाकों में रूस ने जनमत संग्रह कराया था?
रूस ने चार क्षेत्रों को रूस में शामिल कराने के लिए जनमत संग्रह कराया। जिन क्षेत्रों में ये जनमत संग्रह कराया गया उनमें डोनेत्स्क, लुहांस्क (पूर्वी यूक्रेन) और खेरसन, जैपोरिझ्झिया (दक्षिण यूक्रेन) शामिल हैं। यह चार क्षेत्र यूक्रेन का करीब 15 फीसदी जमीनी हिस्सा है। 23 से 27 सितंबर तक ये जनमत संग्रह हुआ। इसके बाद रूस ने इसके नतीजों का एलान किया। रूस के मुताबिक इस जनमत संग्रह में डोनेत्स्क के  99.23 फीसदी, लुहांस्क के 98.42 फीसदी,  खेरसन के 87.05 फीसदी और जैपोरिझ्झिया के 93.11 फीसदी लोगों ने रूस में शामिल होने के पक्ष में मतदान किया। 
इसके बाद पुतिन ने शुक्रवार को यूक्रेन के दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसन और जेपोरिझजिया क्षेत्रों को रूस में मिलाने के आदेश पर दस्तखत किए। इसके लिए क्रेमलिन में एक आयोजन किया गया। पुतिन ने इन राज्यों में प्रमुखों की भी नियुक्ति कर दी। इस दौरान पुतिन ने यूक्रेन से बातचीत के लिए साथ बैठने का आग्रह भी किया। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि मॉस्को रूस में शामिल किए गए उसके हिस्सों को नहीं छोड़ेगा।

क्या ये 2014 में क्रिमिया पर कब्जे जैसा ही कदम है?

2014 में कुछ इसी तरह से रूस ने क्रिमिया पर रूसी कब्जा स्थापित किया था। उस वक्त 27 फरवरी 2014 को रूसी सेनाओं ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था। रूसी लोगों के बहुमत वाले इस शहर को सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस ने यूक्रेन को सौंपा था। रूसे कब्जे के बाद 16 मार्च 2014 को क्रीमिया में जनमत संग्रह कराया गया। इस जनमत संग्रह के बाद रूस ने दावा किया कि यहां के 97 फीसदी लोगों ने यूक्रेन से अलग होने और रूस के साथ जाने के लिए वोट दिया। तब से ही क्रीमिया पर रूस का नियंत्रण है। 21 मार्च 2014 को रूस ने क्रीमिया पर औपचारिक रूप से अपने कब्जे में लिया। उस वक्त संघर्ष शुरू से एक महीने से भी कम समय में ये सब हो गया था। हालांकि, इस बार की लड़ाई रूस के लिए इतनी आसान नहीं रही है।    

जनमत संग्रह  और उसके नतीजों पर यूक्रेन और अन्य रूस विरोधी देश क्या कह रहे हैं?

रूस के जनमत संग्रह के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस की इस हरकत के बाद हम फास्ट ट्रैक नाटो (NATO) सदस्यता के लिए कोशिशें तेज करने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुतिन के रहते रूस के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं की जाएगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि हम यूक्रेन का समर्थन जारी रखेंगे। हम रूस के इस फैसले को नहीं मानते। अमेरिका 1000 से ज्यादा रूसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का एलान करता है। वहीं, अमेरिकी दूतावास ने सुरक्षा अलर्ट जारी कर अपने नागरिकों से कहा है कि वह तत्काल रूस छोड़ दें।

ब्रिटेन ने भी रूस पर नई सेवाओं और माल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। ईयू ने भी रूस पर और अधिक प्रतिबंध लगाने की बात कही है। 

यूक्रेन समर्थक पश्चिमी देशों के नेताओं ने रूस के कदम को अवैध और कब्जे की मानसिकता बताया है। इन देशों ने रूस द्वारा कराए गए जनमत संग्रह को मंच-प्रबंधित बताया जो झूठ के आधार पर भूमि को हड़पने के लिए बंदूक की नोंक पर कराया गया। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करा दिया। उन्होंने कहा कि इसका कोई कानूनी मूल्य नहीं है। उन्होंने इस कदम को खतरनाक बताया और कहा कि इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे शांति की संभावनाएं खतरे में पड़ेंगी। 

रूस के इस कदम पर भारत का क्या रुख है?

रूस के इस फैसले के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में रूस की निंदा के प्रस्ताव पर वोटिंग हुई। भारत ने इस वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। अमेरिका की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव का अल्बानिया ने समर्थन किया। 15 देशों की सुरक्षा परिषद में से, 10 देशों ने प्रस्ताव के लिए मतदान किया और चार देशों ने भाग नहीं लिया चीन, भारत, ब्राजील और गैबॉन। रूस द्वारा वीटो किए जाने के कारण यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका। 

भारत की ओर से UNSC में संयुक्त राष्ट्र के स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि किसी तरह की बयानबाजी से तनाव बढ़ना किसी के हित में नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि एक साथ बैठकर बातचीत से हल निकलना चाहिए। मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखकर भारत ने इस प्रस्ताव से दूर रहने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में हुए हाल के घटनाक्रम से भारत बहुत परेशान है। हमने हमेशा से कहा है कि बातचीत से हल निकलना चाहिए।   

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के चार इलाकों को रूस में मिलाने का एलान कर दिया है। इन इलाकों में रूस ने जनमत संग्रह कराया था। इस बीच पश्चिमी देश उन पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों को धता बताने का आरोप लगा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस उसका हिस्सा बने इन नए इलाकों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा। 

 कौन से इलाकों में रूस ने जनमत संग्रह कराया था? जनमत संग्रह के नतीजे क्या रहे? जनमत संग्रह  और उसके नतीजों पर यूक्रेन और अन्य रूस विरोधी देश क्या कह रहे हैं? रूस के इस कदम पर भारत का क्या रुख है? आइये जानते हैं…



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