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Mukesh Kumar: सेना के टेस्ट तीन बार फेल, ऑटो चलाने वाले पिता की मौत, पर सबसे लड़कर टीम इंडिया में बनाई जगह

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Mukesh Kumar: सेना के टेस्ट तीन बार फेल, ऑटो चलाने वाले पिता की मौत, पर सबसे लड़कर टीम इंडिया में बनाई जगह

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मुकेश कुमार

मुकेश कुमार
– फोटो : सोशल मीडिया

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भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का एलान हो चुका है। रजत पाटीदार और मुकेश कुमार को पहली बार भारतीय टीम में शामिल किया गया है। रजत पाटीदार ने आईपीएल में रॉयल चैंलेंजर्स बैंगलोर के लिए कई कमाल की पारियां खेली और अपना नाम बनाया। इसके बाद मध्यप्रदेश को पहली बार रणजी चैंपियन बनाने में भी उनका योगदान काफी ज्यादा था। इंडिया ए बाकी घेरलू टूर्नामेंट में भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया और उनके बारे में सभी जानते हैं, लेकिन मुकेश कुमार के बारे में कम ही लोगों को पता है। 

मुकेश बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं। उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था और उनके पिता अपना परिवार पालने के लिए कोलकाता जाकर वहां ऑटो चलाने लगे। मुकेश पहले गोपालगंज में क्रिकेट खेलते थे और उनका प्रदर्शन अच्छा था। वह बिहार के लिए अंडर-19 क्रिकेट भी खेले। इसके बाद पिता ने नौकरी के लिए उन्हें कोलकाता बुला लिया। हालांकि, कोलकाता में भी मुकेश ने क्रिकेट खेलना जारी रखा।  

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इस बीच मुकेश ने सेना में शामिल होने के लिए जमकर प्रयास किए, लेकिन तीन बार वह मेडिकल टेस्ट में फेल हो गए। इसके बाद वह कोलकाता पहुंचे और क्रिकेट खेलने लगे। यहां आर्थिक दिक्कतों के चलते खेप के नाम से मशहूर टूर्नामेंट में खेलने लगे जहां प्राइवेट क्लबों से प्रति मैच 500 रुपये मिलते थे। 2014 में बंगाल क्रिकेट संघ के ट्रायल में हिस्सा लिया। कोच रानादेब बोस ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। रानादेब सर के कहने पर ही उन्हें ईडन गॉर्डन के एक कमरे में रहने की जगह भी मिल गई। 2015 में बंगाल के लिए पदार्पण किया।

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घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन
बंगाल के लिए रणजी डेब्यू करने के बाद मुकेश ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने आकाशदीप और ईशान पोरेल के साथ मिलकर बंगाल की गेंदबाजी को मजबूती दी। बंगाल की रणजी टीम का आक्रमण विश्व स्तरीय हो गया। आईपीएल में मुकेश को दिल्ली की टीम में बतौर नेट गेंदबाज भी शामिल किया गया। इस दौरान उन्होंने लगातार अपनी गेंदबाजी में सुधार किया। 2022 रणजी ट्रॉफी में कमाल करने के बाद इंडिया ए और ईरानी ट्रॉफी में भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया और इसी का फायदा उन्हें टीम इंडिया में जगह के रूप में मिला है। 

पिता की मौत के बावजूद नहीं रुके
मुकेश के पिता काशीनाथ सिंह की पिछले साल मौत हो गई थी। इसके बाद उनके लिए मुश्किलें बढ़ गईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पूरी लगन के साथ मुकेश अपने सपने को हकीकत में बदलने में लगे रहे। पिता की मौत के बाद बड़े स्तर पर उन्होंने और भी बेहतरीन प्रदर्शन किया और अब उन्हें भारतीय टीम में चुना जा चुका है। अगर उन्हें भारत के लिए खेलने का मौका मिलता है और वह यहां भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो आईपीएल में भी उनका बिकना तय है। ऐसा होने पर उन्हें आर्थिक समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। मुकेश का संघर्ष खत्म हो चुका है, लेकिन अभी भी उन्हें बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। 

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बाथरूम के लिए गए तो छिन गई जगह
पश्चिम बंगाल की रणजी टीम के लिए साल 2014 में बड़े स्तर पर ट्रायल हो रहा था। बंगाल के गेंदबाजी कोच रानादेब बोस बंगाल क्रिकेट के डायरेक्टर जयदीप मुखर्जी खिलाड़ियों का चयन कर रहे थे। ट्रायल देने वाले खिलाड़ियों की सूची में मुकेश का नाम आखिरी कुछ खिलाड़ियों में था। वह लाइन में खड़े थे और उन्होंने अपने पीछे खड़े लड़के से कहा कि वह उनकी जगह का ध्यान रखे। वह बाथरूम से आ रहे हैं, लेकिन जब मुकेश लौटे तो वहां कोई नहीं था। उन्होंने रानादेब बोस और जयदीप मुखर्जी को देखा। मुकेश दोनों के सामने जाकर एक मौके के लिए मिन्नतें करने लगे। लिस्ट देखी गई तो मुकेश के नाम के सामने लाल निशान था, क्योंकि कई बार उनका नाम पुकारे जाने के बाद जब कोई खिलाड़ी नहीं आया तो उनका नाम काट दिया गया था। 

रानादेब अंत में मान गए और मुकेश को गेंद दी। उन्होंने शानदार अंदर आती यॉर्कर गेंद की और बल्लेबाज परेशान हो गया। इसके बाद बंगाल की टीम के संभावित खिलाड़ियों में उनका चयन हो गया। मेडिकल टेस्ट हुए तो पता चला कि मुकेश को भरपूर खाना और जरूरी प्रोटीन नहीं मिल रहा है।

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छह भाई बहनों में सबसे छोटे हैं मुकेश
मुकेश अपने घर में सबसे छोटे बेटे हैं। उनसे बड़ी चार बहने हैं। उनके पिता एक ड्राइवर थे, लेकिन किसी तरह उन्होंने अपनी तीन बेटियों की शादी कर थी। ऐसे में वह मुकेश को वह सब नहीं दे पा रहे थे, जो एक क्रिकेटर के लिए जरूरी होता है। इसी वजह से बंगाल क्रिकेट का हिस्सा बनने के बाद जब मुकेश का मेडिकल टेस्ट हुआ तो वह पूरी तरह से फिट नहीं थे। इसके बाद रानादेब ने सौरव गांगुली से बात करके उन्हें ईडन गार्डन स्टेडियम में एक कमरा दिलवाया और उनके खाने का भी इंतजाम कराया। सारी सुविधाएं मिलने के बाद मुकेश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब भारतीय टीम का हिस्सा बन चुके हैं। पिछले साल उनके पिता के निधन के बाद मुकेश ने अपनी चौथी बहन की भी शादी कराई। हालांकि, इससे ज्यादा खुशी की बात यह है कि मुकेश अब भारतीय टीम का हिस्सा बन चुके हैं। 

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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम
शिखर धवन (कप्तान), ऋतुराज गायकवाड़, शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर (उप कप्तान), रजत पाटीदार, राहुल त्रिपाठी, इशान किशन (विकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), शाहबाज अहमद, शार्दुल ठाकुर, कुलदीप यादव, रवि बिश्नोई, मुकेश कुमार, आवेश खान, मोहम्मद सिराज और दीपक चाहर।

विस्तार

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का एलान हो चुका है। रजत पाटीदार और मुकेश कुमार को पहली बार भारतीय टीम में शामिल किया गया है। रजत पाटीदार ने आईपीएल में रॉयल चैंलेंजर्स बैंगलोर के लिए कई कमाल की पारियां खेली और अपना नाम बनाया। इसके बाद मध्यप्रदेश को पहली बार रणजी चैंपियन बनाने में भी उनका योगदान काफी ज्यादा था। इंडिया ए बाकी घेरलू टूर्नामेंट में भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया और उनके बारे में सभी जानते हैं, लेकिन मुकेश कुमार के बारे में कम ही लोगों को पता है। 

मुकेश बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं। उनका जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था और उनके पिता अपना परिवार पालने के लिए कोलकाता जाकर वहां ऑटो चलाने लगे। मुकेश पहले गोपालगंज में क्रिकेट खेलते थे और उनका प्रदर्शन अच्छा था। वह बिहार के लिए अंडर-19 क्रिकेट भी खेले। इसके बाद पिता ने नौकरी के लिए उन्हें कोलकाता बुला लिया। हालांकि, कोलकाता में भी मुकेश ने क्रिकेट खेलना जारी रखा।  

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