Home Breaking News आज का शब्द: दशमी और मैथिलीशरण गुप्त की कविता- जानकी जीवन

आज का शब्द: दशमी और मैथिलीशरण गुप्त की कविता- जानकी जीवन

0
आज का शब्द: दशमी और मैथिलीशरण गुप्त की कविता- जानकी जीवन

[ad_1]

                
                                                                                 
                            

'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- दशमी, जिसका अर्थ है- चान्द्र मास के किसी पक्ष की दसवीं तिथि, दशहरा, विजयादशमी। प्रस्तुत है मैथिलीशरण गुप्त की कविता- जानकी जीवन 

जानकी जीवन, विजयदशमी तुम्हारी आज है,
दीख पड़ता देश में कुछ दूसरा ही साज है।
राघवेंद्र! हमें तुम्हारा आज भी कुछ ज्ञान है,
क्या तुम्हें भी अब कभी आता हमारा ध्यान है?

वह शुभ स्मृति आज भी मन को बनाती है हरा,
देव! तुम तो आज भी भूली नहीं है यह धरा।
स्वच्छ जल रखती तथा उत्पन्न करती अन्न है,
दीन भी कुछ भेंट लेकर दीखती संपन्न है॥

व्योम को भी याद है प्रभुवर तुम्हारी वह प्रभा!
कीर्ति करने बैठती है चंद्र-तारों की सभा।
भानु भी नव-दीप्ति से करता प्रताप प्रकाश है,
जगमगा उठता स्वयं जल, थल तथा आकाश है॥

आगे पढ़ें

1 hour ago

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here