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आज का शब्द: जनक और बालकृष्ण शर्मा नवीन की कविता- हम गरज उठे कर घोर नाद

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आज का शब्द: जनक और बालकृष्ण शर्मा नवीन की कविता- हम गरज उठे कर घोर नाद

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'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- जनक, जिसका अर्थ है- जन्मदाता, पिता, बाप, सीता के पिता। प्रस्तुत है बालकृष्ण शर्मा नवीन की कविता- हम गरज उठे कर घोर नाद

हम ज्योति पुंज दुर्दम, प्रचंड,
हम क्रांति-वज्र के घन प्रहार,
हम विप्लव-रण-चंडिका-जनक,
हम विद्रोही, हम दुर्निवार!

हम गरज उठे कर घोर नाद,
हम कड़क उठे, हम कड़क उठे,
अंबर में छायी ध्वनि-ज्वाला,
हम भड़क उठे, हम भड़क उठे!

हम वज्रपाणि हम कुलिश हृदय,
हम दृढ़ निश्चय, हम अचल, अटल
हम महाकाल के व्याल रूप,
हम शेषनाग के अतुल गरल!

हम दुर्गा के भीषण नाहर,
हम सिंह-गर्जना के प्रसार
हम जनक प्रलय-रण-चंडी के,
हम विद्रोही, हम दुर्निवार!

हमने गति देकर चलित किया
इन गतिविहीन ब्रह्मांडों को,
हमने ही तो है सृजित किया
रज के इन वर्तुल भांडों को;

हमने नव-सृजन-प्रेरणा से
छिटकाये तारे अंबर में,
हम ही विनाश भर आए हैं
इस निखिल विश्व-आडंबर में;

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3 hours ago

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