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डब्ल्यूएचओ ने बताया, इन चारों उत्पादों की सैंपल टेस्टिंग में डायथाइलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की अधिकता पाई गई है, जिसका शरीर पर कई प्रकार से विषाक्त प्रभाव हो सकता है। इन चार उत्पादों को गाम्बिया में बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद पहचान में लाया गया है। इसके खतरे को देखते हुए सभी लोगों को इन दवाइयों को प्रयोग में न लाने की सलाह दी जाती है।
वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने यह भी कहा कि इन उत्पादों के सभी बैचों को “असुरक्षित माना जाना चाहिए” जब तक कि संबंधित राष्ट्रीय नियामक अधिकारियों द्वारा उनकी जांच नहीं की जाती। आइए समझते हैं कि आखिर इन उत्पादों में पाए गए तत्व किस प्रकार से खतरनाक हैं? और शरीर पर इसका किस तरह से दुष्प्रभाव हो सकता है?
गौरतलब है कि पिछले साल नई दिल्ली में भी तीन बच्चों की मौत डेक्सट्रोमेथॉर्फ़न युक्त कफ सिरप के सेवन से हुई थी, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा चिह्नित चार सिरप में से एक में मौजूद घटक है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। कथित तौर पर, फार्मा कंपनी ने अब तक केवल गाम्बिया को ही उत्पाद बेचे हैं। डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में इन दवाइयों में जिन दो रसायनों डायथाइलीन ग्लाइकॉल या एथिलीन ग्लाइकॉल की मौजूदगी की बात की है, ये पेट में दर्द, उल्टी, दस्त से लेकर गंभीर मामलों में किडनी फेलियर तक की कारण बन सकते हैं जिससे मौत का खतरा होता है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेबियस ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि इन दवाओं के उपयोग के कारण बच्चों में किडनी इंजरी के मामले देखे गए हैं। डब्ल्यूएचओ इस संबंध में भारत की कंपनी और नियामक प्राधिकरणों के साथ पूछताछ कर रहा है। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार इस बारे में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) या भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कोई भी बयान सामने नहीं आया है। उत्पादों की आपूर्ति भारत में की गई थी या नहीं, यह भी फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
कुछ रिपोर्टस के मुताबिक दवाएं सिर्फ गाम्बिया में ही निर्यात की गई हैं। आइए जानते हैं कि इन दवाओं की विषाक्तता का क्या कारण है?
अब सवाल यह है कि कफ सिरप में पाए गए रासायनिक पदार्थ किस प्रकार से शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं? इस बारे में मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) स्वाद में मीठा, रंगहीन, गंधहीन, हीड्रोस्कोपिक तरल है, यह तंबाकू, छपाई की स्याही और गोंद के लिए प्रयोग में लाई जाती रही है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि डायथाइलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल का सेवन मनुष्यों के लिए विषाक्त प्रभाव वाला हो सकता है। ये तत्व असुरक्षित हैं और विशेष रूप से बच्चों में अंगों की क्षति और मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं।
इस प्रकार की दवाइयों से होने वाले नुकसान के बारे में जानने के लिए हमने नोएडा स्थित इंटरनेल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ उत्कर्ष साहनी से संपर्क किया। डॉ उत्कर्ष कहते हैं, इन कफ सिरप में जिन पदार्थों की मौजूदगी का दावा किया जा रहा है, वह मानव शरीर के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक हो सकते हैं। विशेषकर रक्त में मिलकर ये क्रोनिक किडनी इंजरी के खतरे को बढ़ा देते हैं, फिलहाल अन्य किन दवाओं में यह उत्पाद हैं और भारत में इनकी उपलब्धता कितनी है इस बारे में आगे की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। एहतियात के तौर पर यदि आपके पास इस तरह के उत्पाद हैं, तो कृपया उनका उपयोग न करें।
सर्दी-खांसी जैसी समस्या होने पर खुद से ही कफ सिरप लेकर सेवन की आदत कई प्रकार से हानिकारक है। एक व्यक्ति में जो दवा प्रभावी है वह जरूरी नहीं है कि सभी पर एक ही तरह से असर करे। इसलिए छोटी-छोटी समस्याओं में भी बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवा के सेवन से बचें।
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स्रोत और संदर्भ
Medical Product Alert N°6/2022: Substandard (contaminated) paediatric medicines
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