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पौड़ी के कांडा गांव से दुल्हन लेने गए लालढांग और आसपास के 16 बराती अब कभी वापस नहीं लौट पाएंगे। बराती दुल्हन तो नहीं ला सके, लेकिन सफेद कपड़ों में लिपटे उनके शव बृहस्पतिवार को सुबह तक गांव पहुंच जाएंगे। बस दुर्घटना के बाद गांव में कोहराम मचा है। हर तरफ चीख पुकार मची है। अपनों की मौत की खबर से परिवार बेसुध हैं। दूल्हा संदीप बुधवार को शाम पांच बजे बिना दुल्हन के गांव पहुंचा। संदीप हादसे से टूट गया है, लेकिन उसकी खामोशी नहीं टूट रही है। शादी वाले गांव में विजयदशमी की खुशियों की जगह मातम छाया है। गांव में अधिकतर घरों में चूल्हे नहीं जले हैं। लालढांग मिश्रित आबादी का कस्बा है। यहां पर हिंदू, मुस्लिम और सिख सुख-दुख में एक-दूसरे के साथी हैं। खेतीबाड़ी से ही ग्रामीणों की आजीविका चलती है। शादी-ब्याह में सभी लोग शामिल होते हैं।
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