[ad_1]
हिंदी हमारी मातृभाषा है। यह विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है। इसी के जरिए हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं, इसलिए प्रमुख हिंदी समाचार पत्र होने के नाते अमर उजाला भाषा के गौरव को फिर से जगाना और बढ़ाना चाहता है और लोगों के जीवन में इसका सार वापस लाना चाहता है। इसी सोच के तहत 'हिंदी हैं हम' अभियान शुरू किया गया।
इस कड़ी में अमर उजाला द्वारा अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के साथ हिंदी भाषा के भविष्य और उसके प्रसार को लेकर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें हारवर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े प्रोफेसर रिचर्ड डिलेसी अपने हिंदी प्रेम के सवाल पर कहा- पहली बार जब हिंदुस्तान का भ्रमण हुआ तब हिंदी नहीं आती थी, लोगों से उनकी भाषा में संप्रेषण नहीं हो पा रहा था जो मुझे ठीक नहीं लगा, फिर स्वदेश वापस लौटने पर मन में हिंदी के प्रति प्रेम जगा, फिर एक साल के लिए छात्रवृत्ति के माध्यम से भारत आया और दिल्ली रहा, उत्तराखंड के भीमताल में भी रहा कुछ दिन। लोगों को जानने- समझने का अवसर मिला लेकिन ऑस्ट्रेलिया में जब पढ़ाने का मौका मिला तो ज्यादा सीखने का मौका मिला, अब तो और कुछ नहीं कर सकता, अब यही मेरा जीवन है। लोगों को हिंदी सीखने के प्रति प्रेरित करना मेरा लक्ष्य है। लोगों से उनकी भाषा में उनके जीवनशैली और उनके रहन-सहन को जानने के लिए उनकी भाषा में ही संवाद होना चाहिए।
प्रिय हिंदी लेखक के सवाल पर रिचर्ड डिलेसी कहते हैं- 'एक नाम लेना बड़ा मुश्किल है फिर भी अगर नाम लेना जरूरी हो तो प्रेमचंद का नाम तो लेना ही पड़ेगा, क्योंकि किसी ने कहा था कि जब तक उन्हें नहीं पढ़ोगे तब तक हिंदी में बात कैसे करोगे। इसके अलावा यशपाल, राजेन्द्र यादव, मोहन राकेश, मैत्रेयी पुष्पा, अजय नावरिया और गीतांजलि श्री की किताबें पढ़ी। आधुनिक उपन्यासकार नीलोत्पल मृणाल की किताबें पढ़ी, काव्य क्षेत्र में हरिवंशराय बच्चन की कविताएं प्रिय हैं। पहले तो अमेरिका में उपन्यास और लघु कहानियां लिखते थे लेकिन अभी की स्थिति वैसी नहीं है, जरूरी यह है कि लोग लिखते रहें। प्रकाशित कराने की कोशिश करें।'
आगे पढ़ें
27 seconds ago
[ad_2]
Source link