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बिहार भी गजब है। यह विचार व कर्म की भूमि रही तो नरसंहारों ने इस पर कालिख भी पोती, जंगलराज जैसे जुमले भी बने। बीते वर्षों में ‘भारत बदल रहा’ है तो बिहार भी कैसे पीछे रह सकता है। महिलाओं के दम पर राज्य में करीब छह साल पहले पूर्ण शराबबंदी की गई, लेकिन अब इससे रोचक खबर यह आई है कि इस दौरान जब्त शराब की बोतलों से महिलाओं के सौभाग्य की प्रतीक चूड़ियों का निर्माण होगा।
बिहार में अप्रैल 2016 में जब से राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी। इस दौरान बड़े पैमाने पर शराब की बोतलें जब्त की गईं। यह सिलसिला अब भी जारी है, क्योंकि अवैध व चोरी-छिपे शराब की बिक्री के मामले भी सामने आते रहते हैं। ऐसे में अधिकारियों के लिए जब्त बोतलों को नष्ट करना बड़ी समस्या बन गया है। इन्हें बुलडोजर से नष्ट तो कर दिया जाता था, लेकिन कांच के चूरे का क्या किया जाए, यह सूझ नहीं रहा था।
समस्या हो तो उसकी समाधान भी निकलता ही है। आखिरकार अधिकारियों को कांच की बोतलों के चूरे से चूड़ियां बनाने का विचार आया। बात शुरू हुई तो आगे बढ़ी और विचार योजना और क्रियान्वयन तक पहुंचा। अब फैसला किया गया है कि नष्ट बोतलों से चूड़ियां बनाकर महिलाओं का सम्मान किया जाए।
शराब से सबसे ज्यादा पीड़ित होती हैं महिलाएं
शराबखोरी की सबसे ज्यादा पीड़ित महिलाएं होती हैं। अक्सर शराब के नशे में पतियों द्वारा पत्नियों से मारपीट, दुर्व्यवहार के मामले सामने आते रहते हैं। शराब व शराब दुकानों को बंद करने को लेकर बिहार समेत देश के कई राज्यों में महिलाओं ने ही आंदोलन का नेतृत्व किया था। बिहार व गुजरात में शराबंदी में महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई है।
महिलाओं को चूड़ी बनाने का प्रशिक्षण लेने भेजा यूपी
बोतलों से चूड़ियां बनाने की योजना का एक अहम पक्ष यह भी है कि इनका निर्माण भी महिलाएं ही करेंगी। बिहार के आबकारी व मद्य निषेध विभाग ने राज्य की महिलाओं को चूड़ी बनाने का प्रशिक्षण लेने के लिए यूपी के फिरोजाबाद भेजा है। प्रशिक्षण व योजना को मूर्त रूप देने के लिए आरंभिक रूप से 1 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसे ‘जीविका’ मिशन के रूप में इस योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
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