Home Breaking News Indian Army Uniform: आयुध फैक्ट्रियों से क्यों छिनेगा 11 लाख कॉम्बैट डिजिटल वर्दी का आर्डर, हो रही साजिश!

Indian Army Uniform: आयुध फैक्ट्रियों से क्यों छिनेगा 11 लाख कॉम्बैट डिजिटल वर्दी का आर्डर, हो रही साजिश!

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Indian Army Uniform: आयुध फैक्ट्रियों से क्यों छिनेगा 11 लाख कॉम्बैट डिजिटल वर्दी का आर्डर, हो रही साजिश!

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Indian Army Uniform

Indian Army Uniform
– फोटो : Agency (File Photo)

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भारतीय सेना के लिए 11 लाख ‘कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड वर्दी’ तैयार करने का आर्डर, इस बार किसी प्राइवेट फर्म के हाथ में जा सकता है। आयुध निर्माणी बोर्ड के तहत संचालित होने वाले 41 आयुध कारखाने, जो 220 साल पुराने हैं, उन्हें पिछले साल सात निगमों में विभाजित कर दिया गया था। अब इन कारखानों से धीरे-धीरे सप्लाई आर्डर छीने जा रहे हैं। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार का दावा है कि ये सब एक साजिश के तहत जानबूझकर किया जा रहा है। दरअसल, केंद्र सरकार नहीं चाहती कि सात निगमों में विभाजित किए गए 41 आयुध कारखानें, आगे बढ़ते रहें। सरकार, जल्द से जल्द इन कारखानों का निजीकरण करना चाहती है।

टीसीएल के अंतर्गत 4 आयुध कारखानें, कॉम्बैट डिजिटल वर्दी’ बनाने में सक्षम हैं, लेकिन इन्हें सीधा आर्डर नहीं किया गया। चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने और आयुध कारखानों को नुकसान की ओर ले जाने के लिए सेना के इस सामान का खुली मार्केट में टेंडर जारी किया गया है। खास बात है कि भारतीय सेना, इसी तरह के आर्डर के लिए पहले आयुध कारखानों की तय समय पर सप्लाई और सामान की बेहतर क्वॉलिटी के लिए प्रशंसा पत्र दे चुकी है।

निगमीकरण को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती

एआईडीईएफ के महासचिव श्रीकुमार ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सात अक्तूबर को लिखे पत्र में उक्त मुद्दा उठाया है। उन्होंने लिखा, मोदी सरकार ने रक्षा कर्मचारी संघों के साथ पिछले आश्वासनों और समझौतों का उल्लंघन करते हुए जून 2021 के दौरान आयुध निर्माणी बोर्ड के 220 साल पुराने संगठन के तहत संचालित हो रहे 41 आयुध कारखानों को 7 गैर-व्यवहार्य निगमों में विभाजित करने का निर्णय लिया था। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के मनमाने फैसले को खारिज करते हुए इसे मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। किसी भी सरकारी संगठन का जब निगमीकरण किया जाता है, तो वह निजीकरण की दिशा में पहला कदम होता है।

एआईडीईएफ को केंद्र ने भरोसा दिलाया था कि नए निगमों पर सौ फीसदी सरकार का स्वामित्व होगा। अब सरकार अपने वादे से दूर जा रही है। ट्रूप कंफर्ट लिमिटेड के तहत 4 आयुध कारखानों को नष्ट करने के लिए सरकार ने आर्मी को कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड वर्दी के निर्माण का आर्डर आयुध कारखानों को देने के लिए नहीं कहा। खुली निविदा में जो शर्तें रखी गई हैं, वे अनैतिक हैं। इससे निजी कंपनियों को फायदा पहुंचेगा तो दूसरी ओर टीसीएल के तहत आयुध कारखानों के बंद होने की नौबत आ जाएगी। सरकार ने आयुध कारखानों को तबाह करने और अपने पसंदीदा निजी उद्योगों को उभारने की ठान ली है।  

चार आयुध कारखानों के मामले में हो रहा ये उल्लंघन

अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से इस टेंडर को रद्द करने की मांग की है। सेना की कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड वर्दी का आर्डर, टीसीएल के तहत 4 आयुध कारखानों को दिया जाए। केंद्र सरकार ने आयुध कारखानों को सात गैर-व्यवहार्य निगमों में विभाजित करने का निर्णय लिया। जब 41 आयुध कारखानों को निगमों में तब्दील किया जा रहा था, तो रक्षा मंत्री और डीडीपी के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई बार यह आश्वासन दिया था कि आयुध कारखानों के निगमीकरण के बाद, सरकार वित्तीय एवं गैर-वित्तीय दोनों तरह से, आयुध कारखानों के अस्तित्व व विकास के लिए हर संभव प्रयास करेगी। अब सरकार ने वे सब बातें भुला दी हैं। चार आयुध कारखानों के मामले में इस आश्वासन का उल्लंघन किया जा रहा है। फेडरेशन ने रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव, थल सेनाध्यक्ष और एमजीओ से अनुरोध किया है कि टीसीएल के अंतर्गत आयुध फैक्ट्रियों को नवनिर्मित डिजिटल कॉम्बैट यूनिफॉर्म के निर्माण का आर्डर दिया जाए।

सेना प्रमुख और एमजीओ द्वारा की गई थी सराहना

टीसीएल के तहत आयुध फैक्ट्रियां विशेष रूप से ओसीएफ अवाडी और ओईएफ हजरतपुर, सामरिक लड़ाकू सेना की वर्दी के निर्माण में एक्सपर्ट हैं। इन फैक्ट्रियों ने पिछले एक दशक से अधिक समय के दौरान भारतीय सेना को लगभग एक करोड़ कॉम्बैट आर्मी यूनिफॉर्म सेट की आपूर्ति की है। आयुध कारखानों द्वारा इस वर्दी की गुणवत्ता, कारीगरी और समय पर डिलीवरी की। कई बार भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों सहित सेना प्रमुख और एमजीओ द्वारा सराहना की गई है। चारों आयुध कारखाने, सशस्त्र बलों के लिए आवश्यक सभी प्रकार के परिधानों के निर्माण के लिए सीएडी और सीएएम सहित आवश्यक संयंत्र व मशीनरी से पूरी तरह सुसज्जित हैं। ओसीएफ अवाडी ने पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत प्रतिनियुक्त सैनिकों के लिए लड़ाकू वर्दी का निर्माण किया है। इन कारखानों में रक्षा असैनिक कर्मचारियों के रूप में कार्यरत लगभग 2,000 महिला कर्मचारियों सहित लगभग 8,000 कर्मचारी हैं।

आयुध कारखानों के निगमीकरण के बाद वे सभी डीम्ड प्रतिनियुक्ति पर हैं। किसी भी उद्योग के अस्तित्व के लिए कार्यभार प्रमुख कारक है। हैरानी की बात है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से टीसीएल के तहत 4 आयुध कारखानों के लिए लगभग शून्य कार्यभार है। ऐसे में इन फैक्ट्रियों और उसके कर्मचारियों का भविष्य क्या होगा।

यहां भी नहीं मिला अनुकूल रेस्पांस

रक्षा क्षेत्र में टीसीएल और जीआईएल के अंतर्गत ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ने भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण स्वदेशी उत्पाद तैयार किए हैं। इनमें कॉम्बैट यूनिफॉर्म डिजिटल पैटर्न एंटी माइक्रोबायल फिनिश, एनआईआर केमफ्लॉगिंग, कॉम्बेट डिजिटल पैटर्न लाइटर वर्जन, कोट ईसीसी न्यू वर्जन, बेलेस्टिक हेलमेट, बुलेट रजिस्टेंट जैकेट एनआईजे 3 प्लस और बुलेट रजिस्टेंट वेस्ट एनआईजे 3ए जैसे 28 उत्पाद शामिल हैं। ये सभी उत्पाद भारतीय आयुध निर्माणियों की रिसर्च एंड डेवेलपमेंट यूनिट के प्रयासों का नतीजा हैं। हैरानी की बात है कि ये उत्पाद तैयार होने के बाद कारखानों को रक्षा मंत्रालय एवं सेना मुख्यालय की ओर से कोई अनुकूल रेस्पांस नहीं मिला है। इन कारखानों के पास मौजूदा वर्कलोड न के बराबर है। वर्ष 2023 24 के लिए भी वर्कलोड नहीं है। सेना के लिए अति महत्वपूर्ण उपकरण तैयार करने वाले कारखानों का स्टाफ खुद को संकट में मान रहा है। माल सप्लाई का ऑर्डर न मिलने के कारण कर्मचारी चिंतित हैं। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ एआईडीईएफ ने इस बाबत बीस सितंबर को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है।

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भारतीय सेना के लिए 11 लाख ‘कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड वर्दी’ तैयार करने का आर्डर, इस बार किसी प्राइवेट फर्म के हाथ में जा सकता है। आयुध निर्माणी बोर्ड के तहत संचालित होने वाले 41 आयुध कारखाने, जो 220 साल पुराने हैं, उन्हें पिछले साल सात निगमों में विभाजित कर दिया गया था। अब इन कारखानों से धीरे-धीरे सप्लाई आर्डर छीने जा रहे हैं। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार का दावा है कि ये सब एक साजिश के तहत जानबूझकर किया जा रहा है। दरअसल, केंद्र सरकार नहीं चाहती कि सात निगमों में विभाजित किए गए 41 आयुध कारखानें, आगे बढ़ते रहें। सरकार, जल्द से जल्द इन कारखानों का निजीकरण करना चाहती है।

टीसीएल के अंतर्गत 4 आयुध कारखानें, कॉम्बैट डिजिटल वर्दी’ बनाने में सक्षम हैं, लेकिन इन्हें सीधा आर्डर नहीं किया गया। चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने और आयुध कारखानों को नुकसान की ओर ले जाने के लिए सेना के इस सामान का खुली मार्केट में टेंडर जारी किया गया है। खास बात है कि भारतीय सेना, इसी तरह के आर्डर के लिए पहले आयुध कारखानों की तय समय पर सप्लाई और सामान की बेहतर क्वॉलिटी के लिए प्रशंसा पत्र दे चुकी है।

निगमीकरण को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती

एआईडीईएफ के महासचिव श्रीकुमार ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सात अक्तूबर को लिखे पत्र में उक्त मुद्दा उठाया है। उन्होंने लिखा, मोदी सरकार ने रक्षा कर्मचारी संघों के साथ पिछले आश्वासनों और समझौतों का उल्लंघन करते हुए जून 2021 के दौरान आयुध निर्माणी बोर्ड के 220 साल पुराने संगठन के तहत संचालित हो रहे 41 आयुध कारखानों को 7 गैर-व्यवहार्य निगमों में विभाजित करने का निर्णय लिया था। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के मनमाने फैसले को खारिज करते हुए इसे मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। किसी भी सरकारी संगठन का जब निगमीकरण किया जाता है, तो वह निजीकरण की दिशा में पहला कदम होता है।

एआईडीईएफ को केंद्र ने भरोसा दिलाया था कि नए निगमों पर सौ फीसदी सरकार का स्वामित्व होगा। अब सरकार अपने वादे से दूर जा रही है। ट्रूप कंफर्ट लिमिटेड के तहत 4 आयुध कारखानों को नष्ट करने के लिए सरकार ने आर्मी को कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड वर्दी के निर्माण का आर्डर आयुध कारखानों को देने के लिए नहीं कहा। खुली निविदा में जो शर्तें रखी गई हैं, वे अनैतिक हैं। इससे निजी कंपनियों को फायदा पहुंचेगा तो दूसरी ओर टीसीएल के तहत आयुध कारखानों के बंद होने की नौबत आ जाएगी। सरकार ने आयुध कारखानों को तबाह करने और अपने पसंदीदा निजी उद्योगों को उभारने की ठान ली है।  

चार आयुध कारखानों के मामले में हो रहा ये उल्लंघन

अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से इस टेंडर को रद्द करने की मांग की है। सेना की कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड वर्दी का आर्डर, टीसीएल के तहत 4 आयुध कारखानों को दिया जाए। केंद्र सरकार ने आयुध कारखानों को सात गैर-व्यवहार्य निगमों में विभाजित करने का निर्णय लिया। जब 41 आयुध कारखानों को निगमों में तब्दील किया जा रहा था, तो रक्षा मंत्री और डीडीपी के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई बार यह आश्वासन दिया था कि आयुध कारखानों के निगमीकरण के बाद, सरकार वित्तीय एवं गैर-वित्तीय दोनों तरह से, आयुध कारखानों के अस्तित्व व विकास के लिए हर संभव प्रयास करेगी। अब सरकार ने वे सब बातें भुला दी हैं। चार आयुध कारखानों के मामले में इस आश्वासन का उल्लंघन किया जा रहा है। फेडरेशन ने रक्षा मंत्री, रक्षा सचिव, थल सेनाध्यक्ष और एमजीओ से अनुरोध किया है कि टीसीएल के अंतर्गत आयुध फैक्ट्रियों को नवनिर्मित डिजिटल कॉम्बैट यूनिफॉर्म के निर्माण का आर्डर दिया जाए।

सेना प्रमुख और एमजीओ द्वारा की गई थी सराहना

टीसीएल के तहत आयुध फैक्ट्रियां विशेष रूप से ओसीएफ अवाडी और ओईएफ हजरतपुर, सामरिक लड़ाकू सेना की वर्दी के निर्माण में एक्सपर्ट हैं। इन फैक्ट्रियों ने पिछले एक दशक से अधिक समय के दौरान भारतीय सेना को लगभग एक करोड़ कॉम्बैट आर्मी यूनिफॉर्म सेट की आपूर्ति की है। आयुध कारखानों द्वारा इस वर्दी की गुणवत्ता, कारीगरी और समय पर डिलीवरी की। कई बार भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों सहित सेना प्रमुख और एमजीओ द्वारा सराहना की गई है। चारों आयुध कारखाने, सशस्त्र बलों के लिए आवश्यक सभी प्रकार के परिधानों के निर्माण के लिए सीएडी और सीएएम सहित आवश्यक संयंत्र व मशीनरी से पूरी तरह सुसज्जित हैं। ओसीएफ अवाडी ने पिछले 5 वर्षों से अधिक समय से संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत प्रतिनियुक्त सैनिकों के लिए लड़ाकू वर्दी का निर्माण किया है। इन कारखानों में रक्षा असैनिक कर्मचारियों के रूप में कार्यरत लगभग 2,000 महिला कर्मचारियों सहित लगभग 8,000 कर्मचारी हैं।

आयुध कारखानों के निगमीकरण के बाद वे सभी डीम्ड प्रतिनियुक्ति पर हैं। किसी भी उद्योग के अस्तित्व के लिए कार्यभार प्रमुख कारक है। हैरानी की बात है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 से टीसीएल के तहत 4 आयुध कारखानों के लिए लगभग शून्य कार्यभार है। ऐसे में इन फैक्ट्रियों और उसके कर्मचारियों का भविष्य क्या होगा।

यहां भी नहीं मिला अनुकूल रेस्पांस

रक्षा क्षेत्र में टीसीएल और जीआईएल के अंतर्गत ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ने भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण स्वदेशी उत्पाद तैयार किए हैं। इनमें कॉम्बैट यूनिफॉर्म डिजिटल पैटर्न एंटी माइक्रोबायल फिनिश, एनआईआर केमफ्लॉगिंग, कॉम्बेट डिजिटल पैटर्न लाइटर वर्जन, कोट ईसीसी न्यू वर्जन, बेलेस्टिक हेलमेट, बुलेट रजिस्टेंट जैकेट एनआईजे 3 प्लस और बुलेट रजिस्टेंट वेस्ट एनआईजे 3ए जैसे 28 उत्पाद शामिल हैं। ये सभी उत्पाद भारतीय आयुध निर्माणियों की रिसर्च एंड डेवेलपमेंट यूनिट के प्रयासों का नतीजा हैं। हैरानी की बात है कि ये उत्पाद तैयार होने के बाद कारखानों को रक्षा मंत्रालय एवं सेना मुख्यालय की ओर से कोई अनुकूल रेस्पांस नहीं मिला है। इन कारखानों के पास मौजूदा वर्कलोड न के बराबर है। वर्ष 2023 24 के लिए भी वर्कलोड नहीं है। सेना के लिए अति महत्वपूर्ण उपकरण तैयार करने वाले कारखानों का स्टाफ खुद को संकट में मान रहा है। माल सप्लाई का ऑर्डर न मिलने के कारण कर्मचारी चिंतित हैं। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ एआईडीईएफ ने इस बाबत बीस सितंबर को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है।



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