Home Breaking News आज का शब्द: मार्ग और हरिशंकर परसाई की कविता- शूल से है प्यार मुझको, फूल पर कैसे चलूं मैं?

आज का शब्द: मार्ग और हरिशंकर परसाई की कविता- शूल से है प्यार मुझको, फूल पर कैसे चलूं मैं?

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आज का शब्द: मार्ग और हरिशंकर परसाई की कविता- शूल से है प्यार मुझको, फूल पर कैसे चलूं मैं?

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- मार्ग, जिसका अर्थ है- रास्ता, पथ, राह, प्रवेश द्वार। प्रस्तुत है हरिशंकर परसाई की कविता- शूल से है प्यार मुझको, फूल पर कैसे चलूं मैं? 
                                                                                                
                                                     
                            

किसी के निर्देश पर चलना नहीं स्वीकार मुझको
नहीं है पद चिह्न का आधार भी दरकार मुझको
ले निराला मार्ग उस पर सींच जल कांटे उगाता
और उनको रौंदता हर कदम मैं आगे बढ़ाता

शूल से है प्यार मुझको, फूल पर कैसे चलूं मैं?

बांध बाती में हृदय की आग चुप जलता रहे जो
और तम से हारकर चुपचाप सिर धुनता रहे जो
जगत को उस दीप का सीमित निबल जीवन सुहाता
यह धधकता रूप मेरा विश्व में भय ही जगाता

प्रलय की ज्वाला लिए हूं, दीप बन कैसे जलूं मैं?

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4 hours ago

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