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NASA: नासा का डार्ट मिशन धरती को बचाने में सफल, अंतरिक्ष यान की टक्कर से क्षुद्रग्रह दूसरी कक्षा में गया

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NASA: नासा का डार्ट मिशन धरती को बचाने में सफल, अंतरिक्ष यान की टक्कर से क्षुद्रग्रह दूसरी कक्षा में गया

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Nasa crashes Dart spacecraft on asteroid

Nasa crashes Dart spacecraft on asteroid
– फोटो : social media

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उल्का पिंड पृथ्वी से टकरा कर जीवन खत्म कर सकते हैं, वैज्ञानिकों को यह चिंता हमेशा रही है। इस खतरे से निपटने के लिए नासा का अंतरिक्ष यान डार्ट धरती से 68 लाख किमी दूर एक उल्का पिंड डिमोर्फोस से टकराया। नासा का कहना है कि अंतरिक्ष यान के टकराव ने पृथ्वी को भविष्य के खतरों से बचाने के लिए परीक्षण में एक क्षुद्रग्रह की कक्षा को बदल दिया है। अंतरिक्ष यान ने पृथ्वी को बचाने के लिए परीक्षण में क्षुद्रग्रह को सफलतापूर्वक विक्षेपित कर दिया है। न्यूज एजेंसी एएफपी ने यह जानकारी दी है।

यह उल्का पिंड 525 फुट की डाइडिमोस नामक चट्टानी उल्का की परिक्रमा कर रहा था। अंतरिक्ष यान के टकराव से उल्काओं का मार्ग बदल गया है। इसीलिए इसे डबल एस्ट्रॉयड री-डायरेक्शन टेस्ट यानी डार्ट नाम दिया गया था। 

क्यों पड़ी इस परीक्षण की जरूरत
दोनों उल्काएं वैसे तो पृथ्वी के लिए खतरा नहीं थे। फिर भी परखा जा रहा था कि भविष्य में कोई उल्का अगर सच में पृथ्वी की ओर आई तो क्या हम उसका मार्ग बदल सकते हैं? इसे ‘पृथ्वी की सुरक्षा का परीक्षण’ मिशन कहा गया। वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि टक्कर से उल्काओं का मार्ग बदलेगा। दोनों उल्काओं के पथ पर वैज्ञानिकों की नजर लंबे समय से थी। टक्कर के बाद बदलाव का पता दूरबीनों से लगाया गया।

2500 करोड़ रुपये का डार्ट, उपग्रह भी साथ

  • 24 नवंबर 2021 में धरती से प्रक्षेपित डार्ट पर 2,500 करोड़ खर्च।
  • ड्रेको उल्का इस टक्कर के हर सेकंड की तस्वीरें लेने में मदद की।
  • एक छोटा उपग्रह ‘लाइट इटैलियन क्यूबसैट’ भी भेजा गया था, जो टकराव से पहले यान से अलग होकर पूरी घटना का गवाह बना।
  • इससे टकराव की तीन मिनट बाद तक की बेहद साफ तस्वीरें सामने आई।

अंतरिक्ष में हजारों किमी. में फैले एस्टेरॉयड के टुकड़े
पृथ्वी की तरफ आने वाले उल्कापिंड से पृथ्वी की रक्षा करने के लिए नासा द्वारा पिछले महीने किया गया डार्ट मिशन सफल रहा। इस मिशन के तहत अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ के एक अंतरिक्ष यान ने परीक्षण के तहत एक क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) को सफलतापूर्वक टक्कर मारी जिसके बाद एस्टेरॉयड चूर-चूर हो गया। इस मिशन की तस्वीरों को जेम्स वेब और हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरें जारी की गईं। नासा के इस मिशन पर दुनियाभर के अंतरिक्ष विज्ञानियों की नजर थीं। इस परीक्षण से वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि क्या पृथ्वी की तरफ आने वाले किसी उल्कापिंड को टक्कर मारकर उसकी दिशा बदली जा सकती है, ताकि धरती की रक्षा हो सके।
 

इस मिशन के दौरान पूरे घटनाक्रम और उसके प्रभाव पर जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप और हबल टेलीस्कोप सहित तमाम कैमरों और टेलीस्कोप से यान पर नजर रखी जा रही थी। पृथ्वी से जुड़ी दूरबीनों द्वारा ली गई छवियों में टक्कर के बाद डिमोर्फोस से बाहर निकलने वाले धूल के एक विशाल बादल को दिखाया गया है। जेम्स वेब और हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों को जूम करके देखने पर पता चलता है कि टक्कर के बाद एस्टेरॉयड के टुकड़े अंतरिक्ष में हजारों किलोमीटर से अधिक की दूरी तक फैल गए। 

मिशन की सफलता को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे जीवनकाल में पृथ्वी से किसी क्षुद्रग्रह के टकराने की आशंका बहुत कम है। बंगलूरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के वैज्ञानिक क्रिसफिन कार्तिक ने कहा कि  ‘हम कई क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं से घिरे हुए हैं जो हमारे सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उनमें से बहुत कम पृथ्वी के लिए खतरनाक हैं। फिर भी पृथ्वी के भविष्य की सुरक्षा की तैयारी करना अच्छा कदम है।’ 

डिमोर्फोस, पृथ्वी से 96 लाख किलोमीटर दूर है। इसका नाम ग्रीक भाषा के शब्द ‘डिडिमोस‘ पर आधारित है। इसका अर्थ जुड़वां होता है। असल में यह 2500 फीट के क्षुद्रग्रह ‘डिडिमोस‘ का हिस्सा है। डिडिमोस की खोज 1996 में की गई थी। डिमोर्फोस करीब 525 फीट लंबा था और यह डिडिमोस से 1.2 किलोमीटर की दूरी पर परिक्रमा कर रहा था। 

उल्का पिंड पृथ्वी से टकरा कर जीवन खत्म कर सकते हैं, वैज्ञानिकों को यह चिंता हमेशा रही है। इस खतरे से निपटने के लिए नासा का अंतरिक्ष यान डार्ट धरती से 68 लाख किमी दूर एक उल्का पिंड डिमोर्फोस से टकराया। नासा का कहना है कि अंतरिक्ष यान के टकराव ने पृथ्वी को भविष्य के खतरों से बचाने के लिए परीक्षण में एक क्षुद्रग्रह की कक्षा को बदल दिया है। अंतरिक्ष यान ने पृथ्वी को बचाने के लिए परीक्षण में क्षुद्रग्रह को सफलतापूर्वक विक्षेपित कर दिया है। न्यूज एजेंसी एएफपी ने यह जानकारी दी है।

यह उल्का पिंड 525 फुट की डाइडिमोस नामक चट्टानी उल्का की परिक्रमा कर रहा था। अंतरिक्ष यान के टकराव से उल्काओं का मार्ग बदल गया है। इसीलिए इसे डबल एस्ट्रॉयड री-डायरेक्शन टेस्ट यानी डार्ट नाम दिया गया था। 

क्यों पड़ी इस परीक्षण की जरूरत

दोनों उल्काएं वैसे तो पृथ्वी के लिए खतरा नहीं थे। फिर भी परखा जा रहा था कि भविष्य में कोई उल्का अगर सच में पृथ्वी की ओर आई तो क्या हम उसका मार्ग बदल सकते हैं? इसे ‘पृथ्वी की सुरक्षा का परीक्षण’ मिशन कहा गया। वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि टक्कर से उल्काओं का मार्ग बदलेगा। दोनों उल्काओं के पथ पर वैज्ञानिकों की नजर लंबे समय से थी। टक्कर के बाद बदलाव का पता दूरबीनों से लगाया गया।

2500 करोड़ रुपये का डार्ट, उपग्रह भी साथ

  • 24 नवंबर 2021 में धरती से प्रक्षेपित डार्ट पर 2,500 करोड़ खर्च।
  • ड्रेको उल्का इस टक्कर के हर सेकंड की तस्वीरें लेने में मदद की।
  • एक छोटा उपग्रह ‘लाइट इटैलियन क्यूबसैट’ भी भेजा गया था, जो टकराव से पहले यान से अलग होकर पूरी घटना का गवाह बना।
  • इससे टकराव की तीन मिनट बाद तक की बेहद साफ तस्वीरें सामने आई।


अंतरिक्ष में हजारों किमी. में फैले एस्टेरॉयड के टुकड़े

पृथ्वी की तरफ आने वाले उल्कापिंड से पृथ्वी की रक्षा करने के लिए नासा द्वारा पिछले महीने किया गया डार्ट मिशन सफल रहा। इस मिशन के तहत अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ के एक अंतरिक्ष यान ने परीक्षण के तहत एक क्षुद्रग्रह (एस्टेरॉयड) को सफलतापूर्वक टक्कर मारी जिसके बाद एस्टेरॉयड चूर-चूर हो गया। इस मिशन की तस्वीरों को जेम्स वेब और हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरें जारी की गईं। नासा के इस मिशन पर दुनियाभर के अंतरिक्ष विज्ञानियों की नजर थीं। इस परीक्षण से वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि क्या पृथ्वी की तरफ आने वाले किसी उल्कापिंड को टक्कर मारकर उसकी दिशा बदली जा सकती है, ताकि धरती की रक्षा हो सके।

 

इस मिशन के दौरान पूरे घटनाक्रम और उसके प्रभाव पर जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप और हबल टेलीस्कोप सहित तमाम कैमरों और टेलीस्कोप से यान पर नजर रखी जा रही थी। पृथ्वी से जुड़ी दूरबीनों द्वारा ली गई छवियों में टक्कर के बाद डिमोर्फोस से बाहर निकलने वाले धूल के एक विशाल बादल को दिखाया गया है। जेम्स वेब और हबल स्पेस टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों को जूम करके देखने पर पता चलता है कि टक्कर के बाद एस्टेरॉयड के टुकड़े अंतरिक्ष में हजारों किलोमीटर से अधिक की दूरी तक फैल गए। 

मिशन की सफलता को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। भारतीय वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे जीवनकाल में पृथ्वी से किसी क्षुद्रग्रह के टकराने की आशंका बहुत कम है। बंगलूरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के वैज्ञानिक क्रिसफिन कार्तिक ने कहा कि  ‘हम कई क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं से घिरे हुए हैं जो हमारे सूर्य की परिक्रमा करते हैं। उनमें से बहुत कम पृथ्वी के लिए खतरनाक हैं। फिर भी पृथ्वी के भविष्य की सुरक्षा की तैयारी करना अच्छा कदम है।’ 

डिमोर्फोस, पृथ्वी से 96 लाख किलोमीटर दूर है। इसका नाम ग्रीक भाषा के शब्द ‘डिडिमोस‘ पर आधारित है। इसका अर्थ जुड़वां होता है। असल में यह 2500 फीट के क्षुद्रग्रह ‘डिडिमोस‘ का हिस्सा है। डिडिमोस की खोज 1996 में की गई थी। डिमोर्फोस करीब 525 फीट लंबा था और यह डिडिमोस से 1.2 किलोमीटर की दूरी पर परिक्रमा कर रहा था। 



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