Home Breaking News Assembly Election: गुजरात चुनाव का अभी क्यों नहीं हुआ एलान? जानें तीन सबसे बड़े कारण और उनके सियासी मायने

Assembly Election: गुजरात चुनाव का अभी क्यों नहीं हुआ एलान? जानें तीन सबसे बड़े कारण और उनके सियासी मायने

0
Assembly Election: गुजरात चुनाव का अभी क्यों नहीं हुआ एलान? जानें तीन सबसे बड़े कारण और उनके सियासी मायने

[ad_1]

गुजरात विधानसभा चुनाव 2022

गुजरात विधानसभा चुनाव 2022
– फोटो : अमर उजाला

ख़बर सुनें

चुनाव आयोग ने आज हिमाचल प्रदेश की चुनावी तिथियों का एलान कर दिया। एक चरण में होने वाले चुनाव के लिए 17 अक्तूबर को अधिसूचना जारी होगी और 12 नवंबर को वोटिंग होगी। मतगणना 08 दिसंबर को होगी। आयोग ने अभी गुजरात चुनाव के लिए एलान नहीं किया है। बताया जा रहा है कि दिपावली के बाद गुजरात चुनाव की तिथियों की घोषणा होगी। हिमाचल में मतदान और वोटों की गिनती के बीच 26 दिन का अंतर है।

ऐसे में अकटलें हैं कि गुजरात के चुनाव भी आठ दिसंबर के पहले हो जाएंगे। सवाल ये हैं कि क्यों आयोग ने दोनों राज्यों के लिए चुनावी तिथियों का एलान एक साथ नहीं किया? इसके मायने क्या हैं? विपक्ष के क्या कहना है? आइए समझते हैं…
 
तीन कारण, जिसके चलते नहीं हुआ गुजरात चुनाव का एलान
इसे समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, ‘गुजरात और हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति अलग है। यही कारण है कि दोनों राज्यों में अलग-अलग चुनाव होंगे। इसके दो बड़े कारण हैं।’
 
1. गुजरात से पहले हिमाचल विधानसा का कार्यकाल खत्म होगा: हिमाचल प्रदेश की मौजूदा विधान सभा का कार्यकाल आठ जनवरी 2023 को खत्म हो रहा है। वहीं, गुजरात विधानसभा का कार्यकाल 23 फरवरी 2023 को खत्म होगा। यूं तो दोनों ही राज्यों में चुनाव कराने के लिए आयोग के पास पर्याप्त समय है। 
 
2. हिमाचल में मौसम खराब रहता है: हिमाचल प्रदेश में ठंड के समय मौसम काफी खराब रहता है। कई जगहों पर बर्फबारी के चलते दिसंबर में चुनाव नहीं कराए जा सकते हैं। मौसम खराब होने से पहले चुनाव आयोग हिमाचल प्रदेश में पहले की प्रक्रिया नवंबर में संपन्न करा लेगा। वहीं, गुजरात में दिसंबर में भी चुनाव कराए जा सकते हैं। 
3. 2017 की पुनरावृत्ति : 2017 में भी गुजरात चुनाव का एलान होने से पहले हिमाचल की चुनाव तारीखों का एलान हुआ था। तब विपक्ष ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री की कुछ सरकारी रैलियां होनी बाकी थीं, इसलिए ऐसा किया गया। इस बार भी इसी तरह की बातें हो रही हैं। कहा जा रहा है कि पीएम मोदी बीते दिनों में कई योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन कर रहे हैं। सरकारी कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। 18 से 20 अक्तूबर तक गुजरात के गांधीनगर में डिफेंस एक्सपो आयोजित होना है। इसका शुभारंभ पीएम मोदी खुद कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर भाजपा अध्यक्ष अभी गुजरात में गौरव यात्रा निकाल रहे हैं। यह यात्रा राज्य की 182 विधानसभा सीटों में 144 सीटों से होकर गुजरेगी। इसमें भाजपा के कई दिग्गज नेता शामिल हो रहे हैं। ये यात्रा दस दिन तक चलेगी। 
 
चुनाव आयोग ने क्या कहा? 
गुजरात विधानसभा चुनाव को बाद में कराने पर उठे सवाल का चुनाव आयोग ने जवाब दिया है। आयोग ने बताया कि दोनों राज्यों की विधानसभा के कार्यकाल का अंतर 40 दिन का है। हिमाचल प्रदेश में मौसम की काफी समस्या है। खासतौर पर ऊपरी इलाकों में, जहां बर्फबारी बहुत होती है। ऐसे में आयोग ने मानकों को देखते हुए ही ये फैसला लिया है। 
पिछली बार कब हुए थे चुनाव? 
गुजरात में पिछली बार दो चरण में चुनाव हुए थे। 25 अक्टूबर 2017 को चुनाव तारीखों का एलान हुआ। पहले चरण के लिए 14 नवंबर को अधिसूचना जारी हुई थी और दूसरे चरण के लिए 20 नवंबर को वोट डाले गए थे। पहले चरण का चुनाव नौ दिसंबर 2017 और दूसरे चरण का चुनाव 14 दिसंबर को नतीजे आए थे। पहले चरण में 89 और दूसरे चरण में 93 सीटों पर वोटिंग हुई थी।
विपक्ष ने क्या आरोप लगाया था?
पिछली बार यानी 2017 में भी चुनाव आयोग ने पहले हिमाचल प्रदेश की तिथियों का एलान किया था। हिमाचल प्रदेश में चुनाव तारीखों का एलान 12 अक्तूबर को हुआ था। 13 दिन बाद 25 अक्तूबर को गुजरात चुनाव की तारीखों का एलान हुआ था। दोनों राज्यों में अलग-अलग तारीख पर चुनाव तारीखों का एलान करने पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे। तब विपक्ष ने कहा था कि सरकारी पैसों पर रैली कराने के लिए ऐसा किया जा रहा है। विपक्ष ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि आयोग ने भाजपा सरकार के दबाव में गुजरात में चुनाव तारीखों के एलान में देरी की। 
 
क्या इस बार बदलेंगे समीकरण?
यूं तो पिछले 24 साल से गुजरात की सत्ता में भारतीय जनता पार्टी ही काबिज है, लेकिन इस बार समीकरण बदले नजर आएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि दिल्ली और पंजाब जीतने के बाद आम आदमी पार्टी ने गुजरात में भी पूरी ताकत लगा दी है। ऐसे में मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। 

कांग्रेस में 2017 के कई बड़े चेहरे इस बार साथ पार्टी छोड़ चुके हैं। इसमें सबसे बड़ा नाम हार्दिक पटेल का है। हार्दिक ने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली है। 2017 में हार्दिक ने गुजरात में पाटिदार आंदोलन करके बड़ा नाम कमाया था। उनके साथ जिग्नेश मेवानी जैसे कई युवा कांग्रेस के साथ जुड़ गए थे। अब हार्दिक भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

विस्तार

चुनाव आयोग ने आज हिमाचल प्रदेश की चुनावी तिथियों का एलान कर दिया। एक चरण में होने वाले चुनाव के लिए 17 अक्तूबर को अधिसूचना जारी होगी और 12 नवंबर को वोटिंग होगी। मतगणना 08 दिसंबर को होगी। आयोग ने अभी गुजरात चुनाव के लिए एलान नहीं किया है। बताया जा रहा है कि दिपावली के बाद गुजरात चुनाव की तिथियों की घोषणा होगी। हिमाचल में मतदान और वोटों की गिनती के बीच 26 दिन का अंतर है।

ऐसे में अकटलें हैं कि गुजरात के चुनाव भी आठ दिसंबर के पहले हो जाएंगे। सवाल ये हैं कि क्यों आयोग ने दोनों राज्यों के लिए चुनावी तिथियों का एलान एक साथ नहीं किया? इसके मायने क्या हैं? विपक्ष के क्या कहना है? आइए समझते हैं…

 



[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here