Home Breaking News आज का शब्द: भव्य और अज्ञेय की कविता- सवेरे उठा तो धूप खिलकर छा गई थी

आज का शब्द: भव्य और अज्ञेय की कविता- सवेरे उठा तो धूप खिलकर छा गई थी

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आज का शब्द: भव्य और अज्ञेय की कविता- सवेरे उठा तो धूप खिलकर छा गई थी

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- भव्य, जिसका अर्थ है- दिव्य, विशाल, शानदार, आलीशान। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- सवेरे उठा तो धूप खिलकर छा गई थी 
                                                                                                
                                                     
                            

सवेरे उठा तो धूप खिलकर छा गई थी 
और एक चिड़िया अभी-अभी गा गई थी। 
मैंने धूप से कहा : मुझे थोड़ी गरमाई दोगी उधार? 
चिड़िया से कहा : थोड़ी मिठास उधार दोगी? 
मैंने घास की पत्ती से पूछा : तनिक हरियाली दोगी— 
तिनके की नोक भर? 
शंखपुष्पी से पूछा : उजास दोगी— 
किरण की ओक भर? 
मैंने हवा से माँगा : थोड़ा खुलापन—बस एक प्रश्वास, 
लहर से : एक रोम की सिहरन-भर उल्लास। 
मैंने आकाश से माँगी 
आँख की झपकी भर असीमता—उधार। 
 

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9 minutes ago

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