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'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- भव्य, जिसका अर्थ है- दिव्य, विशाल, शानदार, आलीशान। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- सवेरे उठा तो धूप खिलकर छा गई थी
सवेरे उठा तो धूप खिलकर छा गई थी
और एक चिड़िया अभी-अभी गा गई थी।
मैंने धूप से कहा : मुझे थोड़ी गरमाई दोगी उधार?
चिड़िया से कहा : थोड़ी मिठास उधार दोगी?
मैंने घास की पत्ती से पूछा : तनिक हरियाली दोगी—
तिनके की नोक भर?
शंखपुष्पी से पूछा : उजास दोगी—
किरण की ओक भर?
मैंने हवा से माँगा : थोड़ा खुलापन—बस एक प्रश्वास,
लहर से : एक रोम की सिहरन-भर उल्लास।
मैंने आकाश से माँगी
आँख की झपकी भर असीमता—उधार।
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9 minutes ago
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