[ad_1]

Suella Braverman
– फोटो : Twitter
ख़बर सुनें
विस्तार
ब्रिटेन में सियासी संकट गहराता जा रहा है। भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार संधि पर अपने बयान से विवादों में आईं गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन के पद से हटने की अटकलें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वह गृह मंत्री नहीं रहेंगी। इससे पहले ब्रिटेन के वित्त मंत्री को भी अचानक पद से हटा दिया गया था। खुद प्रधानमंत्री लिज ट्रस की कुर्सी भी खतरे में हैं और कंटरवेटिव पार्टी में उन्हें हटाए जाने की मुहिम चल रही है।
भारत के साथ संधि को लेकर दिया था तीखा बयान
सुएला ब्रेवरमैन भारत के साथ होने वाले मुक्त व्यापार संधि को लेकर तीखा बयान देकर चर्चा में आई थीं। कहा गया कि सुएला ब्रेवरमैन द्वारा वीजा ओवरस्टेयर्स पर कार्रवाई को लेकर की गई टिप्पणियों से भारत सरकार के नाराज होने के बाद भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) कथित तौर पर टूटने की कगार पर है। ब्रिटेन की एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था। हालांकि इस समझौते को लेकर अभी भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है।
गृह मंत्री ने एफटीए के तहत भारत के लिए ‘खुली सीमाओं’ की पेशकश पर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि कई भारतीय वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी ब्रिटेन नहीं छोड़ते जिससे दबाव बढ़ रहा है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने एफटीए के लिए इस साल दिवाली तक की समयसीमा तय की थी। हालांकि, अब इस समय तक समझौता होने की संभावना कम होती जा रही है।
कहा था, समझौते से भारतीयों की संख्या बढ़ सकती है
भारतीय मूल की गृह मंत्री ब्रेवरमैन ने एक साक्षात्कार में कहा था कि उन्हें डर है कि भारत के साथ व्यापार समझौते से ब्रिटेन में आने वाले भारतीयों की संख्या बढ़ सकती है, जबकि पहले से ही वीजा ओवरस्टेयर्स के सबसे बड़े समूह के रूप में भारतीय शामिल हैं। ब्रेवरमैन ने साप्ताहिक समाचार पत्रिका द स्पेक्टेटर को बताया कि मुझे भारत के साथ खुली सीमाओं वाली आव्रजन नीति को लेकर आपत्ति है क्योंकि मुझे नहीं लगता कि लोगों ने इसके लिए ब्रेक्जिट के पक्ष में मतदान किया था।
भारत-यूके एफटीए के तहत छात्रों और उद्यमियों के लिए वीजा में लचीलेपन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मुझे कुछ आपत्तियां हैं। इस देश में प्रवासियों को देखें, तो ओवरस्टे करने वाले लोगों का जो सबसे बड़ा समूह भारतीय प्रवासियों का है। इस संबंध में बेहतर सहयोग के लिए हमने पिछले साल भारत सरकार के साथ एक समझौता भी किया था। लेकिन जरूरी नहीं कि इसके बहुत अच्छा नतीजे मिले हों। ब्रेवरमैन ने पिछले साल मई में गृह मंत्रालय में अपने पूर्ववर्ती भारतीय मूल की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच प्रवासन और मोबिलिटी साझेदारी (एमएमपी) का उल्लेख करते हुए यह बात कही थी।
[ad_2]
Source link